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Supreme Court: वकीलों को समन करने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट कल सुनाएगा फैसला; 12 अगस्त को फैसला सुरक्षित रखा

Thu, 30 Oct 2025 09:32 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Thu, 30 Oct 2025 09:32 PM IST
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Supreme Court  verdict on Friday in suo motu case over summoning of lawyers
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को जांच एजेंसियों की ओर से वकीलों को समन किए जाने के स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) मामले में अपना फैसला सुनाएगा। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में 12 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह मामला शीर्ष अदालत में 'इन रे: समनिंग एडवोकेट्स हू गिव लीगल ओपिनियन और रिप्रेजेंट पार्टीज ड्यूरिंग इन्वेस्टिगेशन ऑफ केसिस एंड रिलेटेड इश्यूज' शीर्षक से दर्ज है।

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29 जुलाई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यदि कोई व्यक्ति केवल अपने मुवक्किल को कानूनी राय दे रहा है या अदालत में उसका प्रतिनिधित्व कर रहा है, तो उसे जांच एजेंसियों की ओर से समन नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई वकील अपराध में सक्रिय रूप से सहायता कर रहा है, तो उसे तलब किया जा सकता है। इससे पहले अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की थी और कहा था कि एजेंसी सभी सीमाएं पार कर रही है। अदालत ने चिंता जताई थी कि ईडी की ओर से वकीलों को पूछताछ के लिए बुलाना न्यायिक व्यवस्था और वकालत के पेशे की स्वतंत्रता पर आघात है।
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ईडी ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं को जारी किया था समन
मामला तब उठा जब ईडी ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल को समन जारी किया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरओ) ने इस कदम की निंदा करते हुए इसे चिंताजनक प्रवृत्ति बताया था और मुख्य न्यायाधीश से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की थी। इस विवाद के बाद ईडी ने 20 जून को एक दिशा-निर्देश जारी कर कहा था कि मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच के दौरान किसी वकील को समन नहीं किया जाएगा। अपवाद की स्थिति में ऐसा केवल निदेशक की अनुमति से ही किया जा सकेगा।

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