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SC: विशेष बच्चों के लिए शिक्षक नियुक्त न करने पर सुप्रीम कोर्ट खफा, राज्यों को दी अवमानना कार्रवाई की चेतावनी
Thu, 17 Jul 2025 10:01 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Thu, 17 Jul 2025 10:01 PM IST
सार
सात मार्च को शीर्ष अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे 28 मार्च तक विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षित करने के लिए शिक्षकों के स्वीकृत पदों की संख्या घोषित करें। शिक्षकों की नियुक्ति न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के शिक्षकों की नियुक्ति न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अवमानना की कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने हमारे आदेशों और निर्देशों का पालन नहीं किया है। पीठ ने अपने सात मार्च के आदेश का जिक्र करते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि वे निर्देशों के अनुपालन को लेकर तीन सप्ताह के भीतर अलग-अलग हलफनामे दाखिल करें।
'हलफनामा दाखिल न किया तो हों कोर्ट में पेश'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हलफनामा दाखिल नहीं करता है तो उनके शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव सुनवाई की अगली तारीख 29 अगस्त 2025 को कोर्ट में पेश होंगे। वे बताएंगे कि अदालत की अवमानना के लिए कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाए? कोर्ट ने कहा कि हलफनामा राज्य के शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी की ओर दाखिल किया जाए। हलफनामा दायर करने वाला अधिकारी उप सचिव के पद से नीचे का नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने हलफनामों की प्रतियां को मामले के न्यायमित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा के साथ साझा करने का आदेश दिया।
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ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, रूसी महिला और भारतीय पिता के बच्चे की तलाश के लिए पुलिस को निर्देश
'नियुक्ति तो दूर स्वीकृत पदों की अधिसूचना तक जारी नहीं की'
शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश ने शिक्षकों के स्वीकृत पदों पर नियुक्तियां नहीं कीं। यहां तक कि अधिकांश राज्यों ने तो राज्य में आवश्यक स्वीकृत पदों की पहचान तक नहीं की है। जबकि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के आंकड़े मौजूद हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शिक्षकों के स्वीकृत पदों की संख्या अधिसूचित करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने आदेश में कहा कि पदों को 28 मार्च, 2025 को या उससे पहले स्वीकृत और अधिसूचित किया जाना था। इसकी अधिसचूना शिक्षा विभाग और सरकार की वेबसाइटों के अलावा राज्य व्यापक प्रसार वाले कम से कम दो समाचार पत्रों में प्रकाशित की जानी चाहिए थे।
योग्य और पात्र शिक्षकों की ही नियुक्ति हो
कोर्ट ने कहा कि चयन और नियुक्ति केवल योग्य या सक्षम या पात्र शिक्षकों की ही होनी चाहिए। कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तदर्थ संविदा शिक्षक ऐसे बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं और उनकी कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। कुछ राज्यों में ये शिक्षक लगभग पिछले 20 वर्षों से कार्यरत हैं। ऐसे राज्यों को तुरंत एक स्क्रीनिंग कमेटी का गठन करना चाहिए। इस समिति में दिव्यांगजनों के लिए राज्य आयुक्त, शिक्षा विभाग के शिक्षा सचिव, भारतीय पुनर्वास परिषद के एक नामित व्यक्ति शामिल होंगे।
ये भी पढ़ें: एचडी कुमारस्वामी के खिलाफ अवमानना कार्यवाही पर 'सुप्रीम' रोक, NGO को जारी किया नोटिस; जमीन हड़पने का मामला
याचिका में यह मांग की गई थी
रजनीश कुमार पांडे और 17 शिक्षकों ने उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में विशेष शिक्षकों की कमी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। याचिका में कहा गया कि शिक्षा के अधिकार को सफल बनाने के लिए प्रत्येक स्कूल में योग्य पेशेवरों की नियुक्ति करना आवश्यक है, ताकि बच्चों को जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सके। शिक्षकों का दावा था कि उन्होंने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इसके बाद सात मार्च को शीर्ष अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे 28 मार्च तक विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षित करने के लिए शिक्षकों के स्वीकृत पदों की संख्या घोषित करें।
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न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने हमारे आदेशों और निर्देशों का पालन नहीं किया है। पीठ ने अपने सात मार्च के आदेश का जिक्र करते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि वे निर्देशों के अनुपालन को लेकर तीन सप्ताह के भीतर अलग-अलग हलफनामे दाखिल करें।
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'हलफनामा दाखिल न किया तो हों कोर्ट में पेश'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हलफनामा दाखिल नहीं करता है तो उनके शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव सुनवाई की अगली तारीख 29 अगस्त 2025 को कोर्ट में पेश होंगे। वे बताएंगे कि अदालत की अवमानना के लिए कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाए? कोर्ट ने कहा कि हलफनामा राज्य के शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी की ओर दाखिल किया जाए। हलफनामा दायर करने वाला अधिकारी उप सचिव के पद से नीचे का नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने हलफनामों की प्रतियां को मामले के न्यायमित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा के साथ साझा करने का आदेश दिया।
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'नियुक्ति तो दूर स्वीकृत पदों की अधिसूचना तक जारी नहीं की'
शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश ने शिक्षकों के स्वीकृत पदों पर नियुक्तियां नहीं कीं। यहां तक कि अधिकांश राज्यों ने तो राज्य में आवश्यक स्वीकृत पदों की पहचान तक नहीं की है। जबकि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के आंकड़े मौजूद हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शिक्षकों के स्वीकृत पदों की संख्या अधिसूचित करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने आदेश में कहा कि पदों को 28 मार्च, 2025 को या उससे पहले स्वीकृत और अधिसूचित किया जाना था। इसकी अधिसचूना शिक्षा विभाग और सरकार की वेबसाइटों के अलावा राज्य व्यापक प्रसार वाले कम से कम दो समाचार पत्रों में प्रकाशित की जानी चाहिए थे।
योग्य और पात्र शिक्षकों की ही नियुक्ति हो
कोर्ट ने कहा कि चयन और नियुक्ति केवल योग्य या सक्षम या पात्र शिक्षकों की ही होनी चाहिए। कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तदर्थ संविदा शिक्षक ऐसे बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं और उनकी कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। कुछ राज्यों में ये शिक्षक लगभग पिछले 20 वर्षों से कार्यरत हैं। ऐसे राज्यों को तुरंत एक स्क्रीनिंग कमेटी का गठन करना चाहिए। इस समिति में दिव्यांगजनों के लिए राज्य आयुक्त, शिक्षा विभाग के शिक्षा सचिव, भारतीय पुनर्वास परिषद के एक नामित व्यक्ति शामिल होंगे।
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याचिका में यह मांग की गई थी
रजनीश कुमार पांडे और 17 शिक्षकों ने उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में विशेष शिक्षकों की कमी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। याचिका में कहा गया कि शिक्षा के अधिकार को सफल बनाने के लिए प्रत्येक स्कूल में योग्य पेशेवरों की नियुक्ति करना आवश्यक है, ताकि बच्चों को जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सके। शिक्षकों का दावा था कि उन्होंने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इसके बाद सात मार्च को शीर्ष अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे 28 मार्च तक विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षित करने के लिए शिक्षकों के स्वीकृत पदों की संख्या घोषित करें।
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