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SC: एचडी कुमारस्वामी के खिलाफ अवमानना कार्यवाही पर 'सुप्रीम' रोक, NGO को जारी किया नोटिस; जमीन हड़पने का मामला

Thu, 17 Jul 2025 04:10 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Thu, 17 Jul 2025 04:10 PM IST
सार

एक एनजीओ ने कुमारस्वामी और उनके परिवार के सदस्यों पर बिदादी के केथागनहल्ली गांव में बड़े पैमाने पर भूमि अतिक्रमण का आरोप लगाया है। इस मामले में केंद्रीय मंत्री एचडी कुमार स्वामी के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।

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'Supreme' stays contempt proceedings against HD Kumaraswamy, notice issued to NGO; land grabbing case
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

कर्नाटक के एक गांव में जमीन हड़पने को लेकर केंद्रीय मंत्री एचडी कुमार स्वामी के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर एचडीकुमार स्वामी की याचिका पर संज्ञान लेते हुए आरोप लगाने वाले एनजीओ समाज परिवर्तन समुदाय को नोटिस जारी किया है। एनजीओ ने कुमारस्वामी और उनके परिवार के सदस्यों पर बिदादी के केथागनहल्ली गांव में बड़े पैमाने पर भूमि अतिक्रमण का आरोप लगाया है।
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न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने कहा कि एक खंडपीठ की ओर से 14 जनवरी, 2020 को पारित आदेश की कथित अवज्ञा के लिए उच्च न्यायालय के समक्ष अवमानना की कार्यवाही लंबित है। याचिका में उपरोक्त आदेश उच्च न्यायालय द्वारा अतिरिक्त महाधिवक्ता के बयान के आधार पर पारित किया गया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्य कर्नाटक लोकायुक्त द्वारा पांच अगस्त, 2014 को पारित आदेश का तीन सप्ताह की अवधि के भीतर पालन करेगा।
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पीठ ने कहा कि लोकायुक्त का आदेश विस्तृत था, लेकिन प्रकृति में मध्यवर्ती था और बाद में लोकायुक्त ने तीन मार्च, 2021 को कार्यवाही बंद कर दी। शीर्ष अदालत में केंद्रीय मंत्री के वकील सीए सुंदरम ने कहा कि लोकायुक्त के अंतरिम आदेश पर अवमानना की कार्यवाही नहीं हो सकती। क्योंकि मामला लोकायुक्त ने ही बंद कर दिया था।
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उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित समय पर याचिकाकर्ता अवमानना कार्यवाही में पक्षकार नहीं था, लेकिन फिर भी उसके खिलाफ बेदखली की कार्रवाई की गई। इसलिए उच्च्तम न्यायालय ने 28 मई 2025 के आदेश के तहत याचिकाकर्ता द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका का निपटारा करते हुए उसे उच्च न्यायालय के संज्ञान में यह लाने की स्वतंत्रता दी कि उसे अवमानना कार्यवाही से हटा दिया गया है। सुंदरम ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद कुमारस्वामी ने उच्च न्यायालय में एक आवेदन दायर किया था, लेकिन उन्हें अवमानना कार्यवाही में पक्षकार बना दिया गया।


इस पर पीठ ने आदेश दिया कि यह दलील दी जा रही है कि उन्होंने पक्षकार बनने के लिए आवेदन नहीं किया है, बल्कि इस अदालत के निर्देशानुसार इसे अदालत के संज्ञान में लाया है। नोटिस जारी करें। नेता की याचिका पर कोई भी प्रतिक्रिया चार सप्ताह के भीतर दाखिल करने का निर्देश दिया गया। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस बीच 17 अप्रैल 2025 के आदेश का प्रभाव और संचालन स्थगित रहेगा। हालांकि पीठ ने मंत्री की याचिका पर कर्नाटक सरकार सहित अन्य पक्षों को नोटिस जारी नहीं किया।

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