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दिवालिया कानून की वैधता को सुप्रीम कोर्ट ने रखा बरकरार      

Fri, 25 Jan 2019 08:51 PM IST
Avdhesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Fri, 25 Jan 2019 08:51 PM IST
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Supreme Court upholds legitimacy of bankrupt law  
सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दिवालिया कानून(इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है। शीर्ष अदालत ने इस कानून की वैधता को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। शीर्ष अदालत ने इस बात पर खुशी जाहिर की है कि इस कानून केआने के बाद बड़ी संख्या में वित्तीय कर्ज चुकाए गए हैं।  
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न्यायमूर्ति रोहिंग्टन एफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिवालियापन कानून की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है। हालांकि पीठ ने यह स्पष्ट किया कि अधिनियम में उल्लेखित संबंधित पक्ष का आशय कारोबार से जुड़ा कोई व्यक्ति होना चाहिए न कि कोई और। वास्तव में कई कंपनियों ने दिवालिया कानून के प्रावधानों को चुनौती दी थी। इस फैसला ऑपरेशन लेनदारों के लिए झटका है। इनमें ग्राहक, ठेकदार और सप्लायर शामिल हैं। 
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सुप्रीम कोर्ट ने कानून के उस प्रावधान में बदलाव किया है जिसमें संबंधित व्यक्ति की परिभाषा दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने उस परिभाषा को स्पष्ट करते हुए कहा कि उस व्यक्ति को ही संबंधित व्यक्ति माना जाएगा जो कर्जदाता या डिफॉल्ट कर चुकी कंपनी से संबंधित होगा। सुप्रीम कोर्ट ने ऑपरेशनल लेनदारों को वित्तीय लेनदारों केसमान सुविधाएं देने से इनकार कर दिया है। 
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ऑपरेशन लेनदारों का कहना था कि उन्हें बैंकों व अन्य वित्तीय संस्थानों जैसे सुरक्षित लेनदारों की तरह से देखा जाए। कंपनियां चाहती थी कि वित्तीय लेनदारों और ऑपरेशनल लेनदारों को एक समान माना जाए। दिवालिया कानून के तहत सुरक्षित लेनदार ही सबसे पहले धन वापसी का दावा पेश कर सकते हैं। सनद रहे कि जून 2017 को दिवालिया कानून लाया गया था।  


सुप्रीम कोर्ट ने दिवालिया कानून पर सही बताते हुए कहा है कि हमें इस बात पर खुशी है दिवालिया कानून की वजह से बड़ी संख्या में वित्तीय कर्ज चुकाए गए हैं, जिसकी वजह से भारत के व्यावसायिक सेक्टर में वित्तीय संसाधनों में भारी बढ़ोतरी हुई है। कॉरपोरेट देनदार और लेनदारों केबीच अदालत केबाहर करीब 3300 मामलों का निपटारा हुआ और यह दावा 1 20390 करोड़ रुपये से अधिक का है।  
 
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