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Supreme Court: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 'आप' को क्यों नहीं बनाया गया आरोपी, ईडी से 'सुप्रीम' सवाल

Wed, 04 Oct 2023 09:56 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आदर्श शर्मा Updated Wed, 04 Oct 2023 09:56 PM IST
सार

आबकारी नीति घोटाले के लाभार्थी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय से गंभीर सवाल पूछे हैं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा लाभार्थी आम आदमी पार्टी(आप) को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी क्यों नहीं बनाया गया।

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Supreme Court updates Supreme Court asked ED why AAP was not made an accused in the money laundering case?
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

आबकारी नीति घोटाले के लाभार्थी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय से गंभीर सवाल पूछे हैं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा लाभार्थी आम आदमी पार्टी(आप) को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी क्यों नहीं बनाया गया।
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न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और एसवीएन भट्टी की पीठ ने यह सवाल तब उठाया, जब भ्रष्टाचार के मामले में पूर्व उपमुख्यमंत्री और आप नेता मनीष सिसौदिया की दो अलग-अलग जमानत याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की गई, जिसकी जांच सीबीआई द्वारा की जा रही है। वहीं संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच ईडी द्वारा की जा रही है। ईडी ने दावा किया था कि आम आदमी पार्टी ने 2022 के गोवा विधानसभा चुनावों में अपने अभियान के लिए कई हितधारकों से रिश्वत में मिले 100 करोड़ रुपये का इस्तेमाल किया।
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मनीष सिसोदिया की तरफ से उनके वकील अभिषेक सिंघवी ने कहा, यह नियमित जमानत का मामला है,क्योंकि उन्होंने ट्रिपल टेस्ट सिंद्धात पास किया है। वह एक विधायक हैं इसलिए उनके भागने का प्रश्न ही नहीं उठता है। शीर्ष अदालत द्वारा निर्धारित ट्रिपल टेस्ट सिद्धांत के अनुसार, किसी आरोपी को जमानत दी जा सकती है यदि उसकी समाज में गहरी जड़ें हैं, भागने का जोखिम नहीं है और गवाहों को प्रभावित करने और सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोई संभावना नहीं है।
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बुधवार को मामले पर हुई सुनवाई बेनतीजा रही ,गुरुवार को सुनवाई जारी रहेगी।
 

कोयंबटूर विस्फोट मामला में दोषियों की जमानत याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने 1998 के कोयंबटूर बम विस्फोट मामले में कुछ दोषियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोयंबटूर बम विस्फोट में 58 लोगों की मौत हो गई थी और 250 लोग घायल हो गए थे। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ कुछ दोषियों द्वारा जमानत की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि दोषियों द्वारा उनकी दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखने वाले मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली अपीलों को फरवरी 2024 के पहले सप्ताह के लिए सूचीबद्ध किया जाए। पीठ ने कहा, जमानत का कोई सवाल ही नहीं है।
 

वकीलों के वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम को चुनौती वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम को चुनौती देने वाली याचिका पर बुधवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस सीटी रविकुमार और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने कहा कि इससे कभी-कभी आलोचना करना आसान होता है। पीठ ने याचिकाकर्ताओं में से एक वकील मैथ्यूज जे नेदुम्परा से कहा कि आलोचना आसान है लेकिन सिस्टम का रचनात्मक कार्य करना कठिन। पीठ ने कहा, हमने दलीलें सुन ली हैं और फैसला सुरक्षित रखा जाता है। याचिकाकर्ताओं ने अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 16 और 23 (5) को चुनौती देते हुए दावा किया है कि ये वकीलों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और अन्य अधिवक्ताओं के दो वर्ग बनाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप वास्तविक व्यवहार में अकल्पनीय असमानताएं पैदा हुई हैं। इस पहलू पर संसद ने कभी विचार नहीं किया। 
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