Supreme Court: शीर्ष अदालत से UP सरकार को फटकार, कहा- मुकदमे को हल्के में नहीं ले सकते; पढ़ें कोर्ट की खबरें
हसदेव अरण्य वन क्षेत्र में परसा कोयला ब्लॉक के लिए भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली लंबित याचिकाओं पर कोई भी अंतरिम राहत देने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। अदालत ने इस दौरान यह भी कहा कि वह विकास के रास्ते में नहीं आना चाहती। पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें...
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सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को फटकार लगाई है। मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने में 1,173 दिनों की देरी करने और गलत विवरण से जुड़ा है। कोर्ट ने सरकार की ओर से मुकदमे को इतने हल्के में नहीं लिया जा सकता है।
कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस तरह के मामलों को सरसरी तौर पर दायर किया जाता है, इसीलिए याचिकाएं खारिज की जाती हैं। दरअसल, राज्य सरकार ने याचिका दायर करने में देरी की माफी के लिए अर्जी दायर की थी।
न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने कहा कि हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस तरह के मामले सतही तौर पर दायर किए जाते हैं, ताकि किसी तरह सुप्रीम कोर्ट द्वारा बर्खास्तगी का प्रमाणीकरण प्राप्त किया जा सके। हम इस तरह की प्रथा को पूरी तरह से अस्वीकार करते हैं और याचिकाकर्ताओं पर जुर्माना लगाना आवश्यक समझते हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य ने हाईकोर्ट के मई 2019 के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें जौनपुर की एक महिला को सरकार द्वारा अधिगृहीत की गई उसकी भूमि के मुआवजे में वृद्धि की गई थी। शीर्ष कोर्ट ने 12 दिसंबर को पारित अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार द्वारा 1,173 दिन के बाद याचिका दायर की गई है और इस प्रकार यह निर्धारित अवधि से अधिक होने के कारण प्रतिबंधित है।
छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य में खनन परियोजना पर रोक लगाने से SC का इंकार
शीर्ष अदालत ने परसा कोयला ब्लॉक मामले में छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य में खनन परियोजना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने अडानी समूह द्वारा संचालित और राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरआरवीयूएनएल) के स्वामित्व वाली कोयला खनन परियोजना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। पीठ ने साफ किया कि हसदेव अरण्य वन क्षेत्र में परसा कोयला ब्लॉक के लिए भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली लंबित याचिकाओं को कोयला खनन गतिविधियों के खिलाफ किसी भी तरह के प्रतिबंध के रूप में नहीं माना जाएगा।
न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने कहा कि हम विकास के रास्ते में नहीं आना चाहते हैं और हम इस पर बहुत स्पष्ट हैं। हम कानून के तहत आपके अधिकारों का निर्धारण करेंगे लेकिन विकास की कीमत पर नहीं।
केंद्र ने शीर्ष अदालत में दी जानकारी
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि पटना में गंगा के बाढ़ क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण की पहचान के लिए जियो-मैपिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है। शीर्ष अदालत राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के 30 जून, 2020 के आदेश के खिलाफ पटना निवासी अशोक कुमार सिन्हा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जस्टिस अनिरुद्ध बोस और सुधांशु धूलिया की पीठ को बताया कि इस कवायद में समय लगेगा।