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SC: शर्तों में ढील के साथ हाईकोर्ट में तदर्थ जजों की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट ने दी हरी झंडी; जानिए मामला

Thu, 30 Jan 2025 04:28 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 30 Jan 2025 04:28 PM IST
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Supreme Court Updates SC Updates Supreme Court Verdicts SC faults summons order poor quality drugs
Supreme Court - फोटो : ANI
सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों में ढील देते हुए हाईकोर्ट में तदर्थ (एड हॉक) जजों की नियुक्ति को हरी झंडी दे दी। शीर्ष अदालत ने आदेश में कहा कि हाईकोर्ट लंबित आपराधिक अपीलों और अन्य लंबित मामलों को निपटाने के लिए तदर्थ सेवानिवृत्त जजों की नियुक्ति की सिफारिश कर सकते हैं। ये तदर्थ जज नियमित जजों के साथ खंडपीठों में बैठेंगे। शीर्ष अदालत ने अपने अप्रैल 2021 के फैसले की उस शर्त में ढील दी कि तदर्थ जजों की नियुक्ति तभी की जा सकती है जब रिक्तियां स्वीकृत संख्या के 20 फीसदी से अधिक हों।
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सीजेआई जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की विशेष पीठ ने कहा कि प्रत्येक हाईकोर्ट दो से पांच जजों की नियुक्ति कर सकता है। लेकिन किसी भी स्थिति में यह संख्या स्वीकृत संख्या के 10 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट अनुच्छेद 224ए का सहारा लेकर तदर्थ जजों की नियुक्ति करेगा। अनुच्छेद 224ए के अनुसार, हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जजों को हाईकोर्ट के जज के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। पीठ ने कहा, यदि आवश्यक हो तो यह पीठ आगे के निर्देशों के लिए फिर से सुनवाई करेगी। पक्षों को आवेदन दायर करने की स्वतंत्रता होगी।
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शीर्ष अदालत ने लोक प्रहरी बनाम भारत संघ के मामले में अप्रैल 2021 के अपने फैसले में पहली बार हाईकोर्ट में तदर्थ जजों की नियुक्ति को हरी झंडी दी थी। हालांकि उसी फैसले में अदालत ने नियमित जजों की नियुक्ति के बजाय तदर्थ आधार पर जजों की नियुक्ति के खिलाफ भी चेतावनी दी थी। कोर्ट ने कहा था कि तदर्थ जजों स्थायी जजों के नियमित विकल्प के रूप में नहीं देखा जा सकता है। इसलिए कुछ शर्तें भी निर्धारित की थीं।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट में सबसे अधिक 63 हजार आपराधिक अपीलें लंबित
सीजेआई खन्ना ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में सबसे अधिक लगभग 63000 आपराधिक अपीलें लंबित हैं। वहीं झारखंड में 13099, कर्नाटक में 20000, पटना में 21000, पंजाब और हरियाणा में 21000 और राजस्थान में 8000 आपराधिक अपीलें लंबित हैं। ऐसे में तदर्थ जजों के माध्यम से मामलों का निपटारा करवे में मदद मिलेगी।

बिना पासपोर्ट के अमेरिका भागा शख्स, सुप्रीम कोर्ट ने जांच और गिरफ्तारी के दिए आदेश
एक अनोखे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे व्यक्ति की जांच और गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं, जो अवमानना की कार्यवाही का सामना कर रहा है, लेकिन पासपोर्ट कोर्ट की हिरासत में होने के बावजूद अमेरिका भाग गया। मामले में न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से कोर्ट की सहायता करने और यह बताने को कहा कि व्यक्ति को बिना पासपोर्ट के इस देश से बाहर जाने की अनुमति कैसे दी गई।

पीठ ने कहा, 'हम इस बात से हैरान हैं कि कथित अवमाननाकर्ता/प्रतिवादी बिना पासपोर्ट के अमेरिका या किसी अन्य देश के लिए कैसे जा सकता है, जबकि उसका पासपोर्ट इस कोर्ट की हिरासत में है। जो भी हो, आज हमारे पास कथित अवमाननाकर्ता के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।' यह व्यक्ति अपने बच्चे को लेकर अपनी अलग रह रही पत्नी के साथ हिरासत की लड़ाई में उलझा हुआ है। शीर्ष अदालत ने गृह मंत्रालय को प्रतिवादी को गिरफ्तार करने और उसे न्याय के कटघरे में लाने के लिए कानून के तहत हर संभव कदम उठाने का निर्देश दिया। यह आदेश तब आया जब अवमाननाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने बताया कि वह विदेश चला गया है। पीठ ने मामले में आगे की सुनवाई 19 फरवरी को तय की है।

शीर्ष अदालत पत्नी की तरफ से अपने अलग हुए पति के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने 8 फरवरी, 2006 को शादी की और अमेरिका चले गए और उनका एक 10 साल का बच्चा भी है। हालांकि, वैवाहिक कलह के कारण, पति ने 12 सितंबर, 2017 को अमेरिका के मिशिगन की एक अदालत से तलाक का आदेश हासिल कर लिया। दूसरी ओर, पत्नी ने भारत में अलग हुए पति के खिलाफ कई कार्यवाही शुरू की।

21 अक्तूबर, 2019 को शीर्ष अदालत के समक्ष पक्षों के बीच एक समझौता हुआ, जिसमें से एक आधार यह था कि पति को बच्चे की कस्टडी अपनी अलग हुई पत्नी को दे देनी चाहिए। जब वह ऐसा करने में विफल रहा, तो महिला की तरफ से दायर याचिका पर अवमानना कार्यवाही शुरू की गई। 26 सितंबर, 2022 और 10 नवंबर, 2022 के आदेशों के बाद, उस व्यक्ति को अदालत में पेश होने के लिए कहा गया और वह वस्तुतः 13 दिसंबर, 2022 को पेश हुआ। 17 जनवरी, 2024 को, अदालत ने उसे सभी कार्यवाही में उपस्थित रहने के लिए कहा, लेकिन वह 22 और 29 जनवरी को सुनवाई के दौरान पेश नहीं हुआ।
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