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Supreme Court: वेदांता समूह को 'सुप्रीम' झटका, तमिलनाडु में प्लांट बंद करने के खिलाफ रिव्यू याचिका खारिज की गई
Sat, 16 Nov 2024 12:14 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Sat, 16 Nov 2024 12:14 PM IST
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Supreme Court
- फोटो : PTI
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के थूथुकुडी में वेदांता समूह की तरफ से अपने तांबा गलाने वाले संयंत्र को बंद करने के खिलाफ दायर समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया है। शीर्ष अदालत ने 29 फरवरी को स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य और कल्याण के महत्व को रेखांकित करते हुए थूथुकुडी में अपने तांबा गलाने वाले संयंत्र को फिर से खोलने के लिए वेदांता की याचिका को खारिज कर दिया था, जो मई 2018 से प्रदूषण संबंधी चिंताओं के कारण बंद है।
यह संयंत्र मई 2018 से बंद है, जब पुलिस ने कथित प्रदूषण के कारण विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए गोलीबारी की थी, जिसमें 13 लोग मारे गए थे। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ (अब सेवानिवृत्त) और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और मनोज मिश्रा की पीठ ने समीक्षा याचिका को खुली अदालत में सूचीबद्ध करने के लिए वेदांता के आवेदन को भी खारिज कर दिया। पीठ ने 22 अक्तूबर के अपने आदेश में कहा, समीक्षा याचिकाओं का अवलोकन करने के बाद, रिकार्ड में कोई त्रुटि नजर नहीं आती। सर्वोच्च न्यायालय नियम 2013 के आदेश XLVII नियम 1 के तहत समीक्षा का कोई मामला स्थापित नहीं हुआ है। इसलिए, समीक्षा याचिकाएं खारिज की जाती हैं।
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यह संयंत्र मई 2018 से बंद है, जब पुलिस ने कथित प्रदूषण के कारण विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए गोलीबारी की थी, जिसमें 13 लोग मारे गए थे। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ (अब सेवानिवृत्त) और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और मनोज मिश्रा की पीठ ने समीक्षा याचिका को खुली अदालत में सूचीबद्ध करने के लिए वेदांता के आवेदन को भी खारिज कर दिया। पीठ ने 22 अक्तूबर के अपने आदेश में कहा, समीक्षा याचिकाओं का अवलोकन करने के बाद, रिकार्ड में कोई त्रुटि नजर नहीं आती। सर्वोच्च न्यायालय नियम 2013 के आदेश XLVII नियम 1 के तहत समीक्षा का कोई मामला स्थापित नहीं हुआ है। इसलिए, समीक्षा याचिकाएं खारिज की जाती हैं।
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सीपीएस की नियुक्ति: हिमाचल प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
हिमाचल प्रदेश सरकार ने छह संसदीय सचिवों की नियुक्ति को अधिकृत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसे हाल ही में हाईकोर्ट ने अवैध और असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया था। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 13 नवंबर को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार की तरफ से छह मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति को रद्द कर दिया था और जिस कानून के तहत उन्हें नियुक्त किया गया था, उसे अमान्य घोषित कर दिया था।
शीर्ष अदालत के समक्ष अपनी अपील में राज्य सरकार ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश कानूनी रूप से गलत है और उसने हाईकोर्ट के निर्देश पर रोक लगाने की मांग की। राज्य सरकार की तरफ से दायर अपील में कहा गया है, कानूनी परिणाम यह होगा कि छह संसदीय सचिव, जो विधायक भी हैं, संविधान के अनुच्छेद 192 के तहत अयोग्य ठहराए जाने की संभावना है, क्योंकि लाभ के पद के मानदंडों से उन्हें दी गई सुरक्षा को बिना निर्णय के वापस ले लिया गया है, जिससे राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो रही है। नियुक्ति को रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि छह मुख्य संसदीय सचिवों की सभी सुविधाएं और विशेषाधिकार तत्काल प्रभाव से वापस लिए जाएं।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने छह संसदीय सचिवों की नियुक्ति को अधिकृत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसे हाल ही में हाईकोर्ट ने अवैध और असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया था। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 13 नवंबर को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार की तरफ से छह मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति को रद्द कर दिया था और जिस कानून के तहत उन्हें नियुक्त किया गया था, उसे अमान्य घोषित कर दिया था।
शीर्ष अदालत के समक्ष अपनी अपील में राज्य सरकार ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश कानूनी रूप से गलत है और उसने हाईकोर्ट के निर्देश पर रोक लगाने की मांग की। राज्य सरकार की तरफ से दायर अपील में कहा गया है, कानूनी परिणाम यह होगा कि छह संसदीय सचिव, जो विधायक भी हैं, संविधान के अनुच्छेद 192 के तहत अयोग्य ठहराए जाने की संभावना है, क्योंकि लाभ के पद के मानदंडों से उन्हें दी गई सुरक्षा को बिना निर्णय के वापस ले लिया गया है, जिससे राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो रही है। नियुक्ति को रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि छह मुख्य संसदीय सचिवों की सभी सुविधाएं और विशेषाधिकार तत्काल प्रभाव से वापस लिए जाएं।
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सुप्रीम कोर्ट में बुधवार और गुरुवार को सूचीबद्ध नहीं होंगे नियमित सुनवाई वाले मामले
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना के भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में कार्यभार संभालने के कुछ दिनों सुप्रीम कोर्ट ने मामलों की सुनवाई के संबंध में शनिवार को एक नोटिस जारी किया। इसके मुताबिक नियमित सुनवाई वाले मामले बुधवार और गुरुवार को सूचीबद्ध नहीं होंगे। अब से मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को स्थानांतरण याचिकाओं और जमानत मामलों सहित विभिन्न मामलों को सूचीबद्ध किया जाएगा। अगले आदेश तक कोई भी नियमित सुनवाई का मामला बुधवार और गुरुवार को सूचीबद्ध नहीं किया जाएगा।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना के भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में कार्यभार संभालने के कुछ दिनों सुप्रीम कोर्ट ने मामलों की सुनवाई के संबंध में शनिवार को एक नोटिस जारी किया। इसके मुताबिक नियमित सुनवाई वाले मामले बुधवार और गुरुवार को सूचीबद्ध नहीं होंगे। अब से मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को स्थानांतरण याचिकाओं और जमानत मामलों सहित विभिन्न मामलों को सूचीबद्ध किया जाएगा। अगले आदेश तक कोई भी नियमित सुनवाई का मामला बुधवार और गुरुवार को सूचीबद्ध नहीं किया जाएगा।
सीजेआई खन्ना बोले- वकालत से युवा प्रतिभाओं का पलायन चिंताजनक
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना ने वकालत से युवा प्रतिभाओं के पलायन पर चिंता जताई और कहा कि उनकी वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित स्वागत समारोह में खन्ना ने कहा कि युवा वकीलों के लिए उनके करियर के पहले कुछ वर्षों में न्यूनतम पारिश्रमिक मानक बनाने की आवश्यकता है।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना ने वकालत से युवा प्रतिभाओं के पलायन पर चिंता जताई और कहा कि उनकी वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित स्वागत समारोह में खन्ना ने कहा कि युवा वकीलों के लिए उनके करियर के पहले कुछ वर्षों में न्यूनतम पारिश्रमिक मानक बनाने की आवश्यकता है।