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सुप्रीम कोर्ट अपडेट: शीर्ष अदालत परिसर में भीड़ जुटाने पर याचिका दायर, 15 अक्तूबर को सीजेआई करेंगे सुनवाई
Tue, 13 Oct 2026 01:01 PM IST
राकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Tue, 13 Oct 2026 01:01 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट परिसर में विपक्षी नेताओं और उनके समर्थकों की भीड़ जुटने के मामले में याचिकाएं दाखिल की गई हैं। सीजेआई सूर्यकांत ने 15 अक्तूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति दी है। सुप्रीम कोर्ट की बड़ी खबरों के लिए बने रहें अमर उजाला के साथ...
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सुप्रीम कोर्ट अपडेट
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट परिसर में सोमवार रात विपक्षी नेताओं के पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में लोगों के जुटने का मामला अब अदालत पहुंच गया है। इस घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया और महेश जेठमलानी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के सामने इन मामलों का जल्द सुनवाई के लिए रखा है। सीजेआई ने याचिकाओं को गुरुवार, 15 अक्तूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है।
दरअसल, सोमवार दोपहर राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के खिलाफ मार्च निकाला था। इस दौरान नेताओं ने चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की थी।
सोमवार शाम करीब सात बजे राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेता अपने समर्थकों के साथ सुप्रीम कोर्ट परिसर पहुंचे। इसके बाद वहां बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई। इस दौरान परिसर में हंगामे जैसी स्थिति बनने की बात सामने आई। अब इसी घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं।
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दरअसल, सोमवार दोपहर राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के खिलाफ मार्च निकाला था। इस दौरान नेताओं ने चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की थी।
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सोमवार शाम करीब सात बजे राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेता अपने समर्थकों के साथ सुप्रीम कोर्ट परिसर पहुंचे। इसके बाद वहां बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई। इस दौरान परिसर में हंगामे जैसी स्थिति बनने की बात सामने आई। अब इसी घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं।
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सीजेआई को ‘इस्तीफा दे दो’ कहने पर घिरी केरल कांग्रेस, सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की मांग
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को निशाना बनाकर कांग्रेस के केरल इकाई की ओर से किए गए सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट के वकील विनीत जिंदल ने सीजेआई को शिकायत भेजकर इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने और जरूरी कार्रवाई पर विचार करने का आग्रह किया है। उन्होंने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट परिसर में विपक्षी गठबंधन के नेताओं के मार्च और नारेबाजी की खबरों की भी जांच कराने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की गई है?
वकील जिंदल ने कहा है कि कांग्रेस केरल की ओर से एक्स पर किए गए पोस्ट की जांच होनी चाहिए, ताकि यह तय किया जा सके कि वह राजनीतिक आलोचना की सीमा में आता है या अदालत की अवमानना के तहत कार्रवाई पर विचार करने की जरूरत है। पोस्ट में लिखा गया था, 'प्रिय सूर्यकांत, अगर कानून-व्यवस्था आपका काम नहीं है, तो अभी इस्तीफा दे दीजिए। हम आपकी जगह किसी ऐसे व्यक्ति को ढूंढ लेंगे, जो इसे संभाल सके।' यह पोस्ट अब हटा दिया गया है।
अधिवक्ता ने संविधान के अनुच्छेद 129 और अवमानना कानून की धारा 2(सी) का हवाला देते हुए कहा कि मामले के पूरे तथ्य और कानूनी पहलुओं की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुई कथित नारेबाजी और प्रदर्शन को लेकर सीसीटीवी फुटेज, प्रवेश से जुड़े रिकॉर्ड, सुरक्षा व्यवस्था के दस्तावेज और अन्य सबूत सुरक्षित रखने की भी मांग की है। साथ ही, यह पता लगाने का आग्रह किया है कि कहीं किसी प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश तो नहीं किया गया या अदालत के कामकाज में बाधा तो नहीं पहुंचाई गई।
बार एसोसिएशन ने की बयान की निंदा
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन भी सीजेआई के इस्तीफे की मांग वाले बयानों की निंदा कर चुके हैं। दोनों संगठनों ने चिंता जताई थी कि इस तरह की टिप्पणियां न्यायपालिका की गरिमा को प्रभावित कर सकती हैं और न्यायिक कामकाज में हस्तक्षेप का कारण बन सकती हैं।
सोमवार को इंडिया गठबंधन के नेताओं ने कथित चुनावी अनियमितताओं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में मार्च निकाला था। इसके बाद राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त याचिका दाखिल की।
विपक्ष के खिलाफ चार केस दर्ज
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने इंडिया गठबंधन के मार्च को लेकर चार प्राथमिकी दर्ज की हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, तिलक मार्ग थाने में दो और मंदिर मार्ग तथा बाराखंभा थाने में एक-एक प्राथमिकी दर्ज की गई है। ये मामले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसए) की धारा 163 के कथित उल्लंघन से जुड़े हैं। वहीं, जंतर-मंतर पर अचानक हुए प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सदस्यों आशुतोष रांका और सौरव दास समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की गई है?
वकील जिंदल ने कहा है कि कांग्रेस केरल की ओर से एक्स पर किए गए पोस्ट की जांच होनी चाहिए, ताकि यह तय किया जा सके कि वह राजनीतिक आलोचना की सीमा में आता है या अदालत की अवमानना के तहत कार्रवाई पर विचार करने की जरूरत है। पोस्ट में लिखा गया था, 'प्रिय सूर्यकांत, अगर कानून-व्यवस्था आपका काम नहीं है, तो अभी इस्तीफा दे दीजिए। हम आपकी जगह किसी ऐसे व्यक्ति को ढूंढ लेंगे, जो इसे संभाल सके।' यह पोस्ट अब हटा दिया गया है।
अधिवक्ता ने संविधान के अनुच्छेद 129 और अवमानना कानून की धारा 2(सी) का हवाला देते हुए कहा कि मामले के पूरे तथ्य और कानूनी पहलुओं की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुई कथित नारेबाजी और प्रदर्शन को लेकर सीसीटीवी फुटेज, प्रवेश से जुड़े रिकॉर्ड, सुरक्षा व्यवस्था के दस्तावेज और अन्य सबूत सुरक्षित रखने की भी मांग की है। साथ ही, यह पता लगाने का आग्रह किया है कि कहीं किसी प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश तो नहीं किया गया या अदालत के कामकाज में बाधा तो नहीं पहुंचाई गई।
बार एसोसिएशन ने की बयान की निंदा
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन भी सीजेआई के इस्तीफे की मांग वाले बयानों की निंदा कर चुके हैं। दोनों संगठनों ने चिंता जताई थी कि इस तरह की टिप्पणियां न्यायपालिका की गरिमा को प्रभावित कर सकती हैं और न्यायिक कामकाज में हस्तक्षेप का कारण बन सकती हैं।
सोमवार को इंडिया गठबंधन के नेताओं ने कथित चुनावी अनियमितताओं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में मार्च निकाला था। इसके बाद राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त याचिका दाखिल की।
विपक्ष के खिलाफ चार केस दर्ज
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने इंडिया गठबंधन के मार्च को लेकर चार प्राथमिकी दर्ज की हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, तिलक मार्ग थाने में दो और मंदिर मार्ग तथा बाराखंभा थाने में एक-एक प्राथमिकी दर्ज की गई है। ये मामले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसए) की धारा 163 के कथित उल्लंघन से जुड़े हैं। वहीं, जंतर-मंतर पर अचानक हुए प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सदस्यों आशुतोष रांका और सौरव दास समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
दिल्ली में एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 15 अक्तूबर तक टली
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ दिल्ली में हुए प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई 15 अक्तूबर तक टाल दी है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ को मामले की सुनवाई करनी थी। हालांकि, न्यायमूर्ति मोहना की तबीयत खराब होने के कारण सुनवाई टाल दी गई। सभी पक्षों ने 15 अक्तूबर को सुनवाई किए जाने पर सहमति जताई।
चुनाव आयुक्तों को मिली कानूनी छूट को चुनौती
शीर्ष अदालत ने एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की ओर से दायर नई याचिका पर भी नोटिस जारी किया। इसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 16 को चुनौती दी गई है। इस प्रावधान के तहत चुनाव आयुक्तों को आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान किए गए कार्यों के लिए कानूनी छूट दी गई है।
11 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे अहम निर्देश
इससे पहले 11 अक्तूबर को विशेष सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि किसी भी व्यक्ति को कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अलावा हिरासत में नहीं लिया जाए। अदालत ने शांतिपूर्ण और निहत्थे लोगों के जमावड़े के संदर्भ में यह निर्देश दिया था। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा से संबंधित बोर्ड हटाने को कहा था, यदि ऐसा पहले से नहीं किया गया हो। अदालत ने कहा कि न्याय तक पहुंचने और अदालतों में आने-जाने को लेकर लोगों के मन में कोई आशंका नहीं होनी चाहिए।
मेट्रो, रेल और इंटरनेट सेवाओं को लेकर भी निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी स्थिति को छोड़कर मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलनी चाहिए। शहर में यातायात नियमों के अधीन लोगों की आवाजाही की अनुमति देने और वकीलों, पत्रकारों व अन्य पेशेवरों के काम में बाधा नहीं डालने का भी निर्देश दिया गया था। अदालत ने कानून-व्यवस्था और यातायात की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बैरिकेडिंग की तत्काल समीक्षा करने और शहर में इंटरनेट सेवाएं बाधित नहीं करने को कहा था।
अवमानना का प्रथम दृष्टया मामला, अधिकारियों से जवाब तलब
शीर्ष अदालत ने पहले दिए गए निर्देशों के पालन में प्रथम दृष्टया अवमानना का मामला पाते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया था। उनसे जवाब और अनुपालन हलफनामा भी मांगा गया था, जिसमें रेल और मेट्रो सेवाओं से जुड़े निर्देश शामिल थे।
राहुल गांधी के मार्च से पहले सीजेआई ने क्या कहा था?
12 अक्तूबर को राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं के मुख्य चुनाव आयुक्त और एसआईआर विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने और याचिका दाखिल करने की योजना के बीच मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मौखिक टिप्पणी की थी कि लोकतांत्रिक गतिविधियां निर्धारित स्थानों पर होनी चाहिए और सुप्रीम कोर्ट को ऐसे मामलों में नहीं घसीटना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि वकीलों, अदालत के कर्मचारियों और मुकदमे से जुड़े लोगों की आवाजाही में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। वकीलों की कथित अवैध हिरासत से जुड़े एक अन्य मामले में सीजेआई ने कहा था कि हर वकील को शांतिपूर्ण प्रदर्शन में हिस्सा लेने का अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ दिल्ली में हुए प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई 15 अक्तूबर तक टाल दी है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ को मामले की सुनवाई करनी थी। हालांकि, न्यायमूर्ति मोहना की तबीयत खराब होने के कारण सुनवाई टाल दी गई। सभी पक्षों ने 15 अक्तूबर को सुनवाई किए जाने पर सहमति जताई।
चुनाव आयुक्तों को मिली कानूनी छूट को चुनौती
शीर्ष अदालत ने एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की ओर से दायर नई याचिका पर भी नोटिस जारी किया। इसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 16 को चुनौती दी गई है। इस प्रावधान के तहत चुनाव आयुक्तों को आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान किए गए कार्यों के लिए कानूनी छूट दी गई है।
11 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे अहम निर्देश
इससे पहले 11 अक्तूबर को विशेष सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि किसी भी व्यक्ति को कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अलावा हिरासत में नहीं लिया जाए। अदालत ने शांतिपूर्ण और निहत्थे लोगों के जमावड़े के संदर्भ में यह निर्देश दिया था। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा से संबंधित बोर्ड हटाने को कहा था, यदि ऐसा पहले से नहीं किया गया हो। अदालत ने कहा कि न्याय तक पहुंचने और अदालतों में आने-जाने को लेकर लोगों के मन में कोई आशंका नहीं होनी चाहिए।
मेट्रो, रेल और इंटरनेट सेवाओं को लेकर भी निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी स्थिति को छोड़कर मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलनी चाहिए। शहर में यातायात नियमों के अधीन लोगों की आवाजाही की अनुमति देने और वकीलों, पत्रकारों व अन्य पेशेवरों के काम में बाधा नहीं डालने का भी निर्देश दिया गया था। अदालत ने कानून-व्यवस्था और यातायात की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बैरिकेडिंग की तत्काल समीक्षा करने और शहर में इंटरनेट सेवाएं बाधित नहीं करने को कहा था।
अवमानना का प्रथम दृष्टया मामला, अधिकारियों से जवाब तलब
शीर्ष अदालत ने पहले दिए गए निर्देशों के पालन में प्रथम दृष्टया अवमानना का मामला पाते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया था। उनसे जवाब और अनुपालन हलफनामा भी मांगा गया था, जिसमें रेल और मेट्रो सेवाओं से जुड़े निर्देश शामिल थे।
राहुल गांधी के मार्च से पहले सीजेआई ने क्या कहा था?
12 अक्तूबर को राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं के मुख्य चुनाव आयुक्त और एसआईआर विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने और याचिका दाखिल करने की योजना के बीच मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मौखिक टिप्पणी की थी कि लोकतांत्रिक गतिविधियां निर्धारित स्थानों पर होनी चाहिए और सुप्रीम कोर्ट को ऐसे मामलों में नहीं घसीटना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि वकीलों, अदालत के कर्मचारियों और मुकदमे से जुड़े लोगों की आवाजाही में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। वकीलों की कथित अवैध हिरासत से जुड़े एक अन्य मामले में सीजेआई ने कहा था कि हर वकील को शांतिपूर्ण प्रदर्शन में हिस्सा लेने का अधिकार है।