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SC: सोने के 100 सिक्कों की मांग ठुकराने पर शादी समारोह में सहयोग न करने वाला दोषी करार; सुप्रीम कोर्ट का फैसला

Wed, 29 Jan 2025 07:56 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 29 Jan 2025 07:56 AM IST
सार

मामले में वर्ष 2006 में हुए सगाई समारोह के बाद दूल्हे और उसके परिवार ने जोर देकर कहा था कि वे विवाह समारोह में तभी सहयोग करेंगे जब उन्हें 100 सोने के सिक्के दिए जाएंगे। 

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Supreme Court Updates Person found guilty of not cooperating in wedding ceremony after refusing 100 gold coins
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने दहेज में 100 सोने के सिक्के की मांग को ठुकराने पर विवाह समारोह में सहयोग करने से मना करने के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए और दहेज निषेध अधिनियम की धारा 4 के तहत एक व्यक्ति की दोषसिद्धि को बरकरार रखा है। यह वैवाहिक संबंध केवल तीन दिनों तक चला था। इस मामले में वर्ष 2006 में हुए सगाई समारोह के बाद दूल्हे और उसके परिवार ने जोर देकर कहा था कि वे विवाह समारोह में तभी सहयोग करेंगे जब उन्हें 100 सोने के सिक्के दिए जाएंगे। 

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अपीलकर्ता के परिवार ने दुल्हन के भाई को विवाह के दिन रीति-रिवाजों को निभाने की अनुमति नहीं दी। हालांकि, उन्होंने रिसेप्शन में भाग लिया, पर अपीलकर्ता के पिता दूल्हे को रिसेप्शन के मंच से अपने साथ ले गए। विवाह रिसेप्शन समाप्त होने से पहले अपीलकर्ता रिसेप्शन के मंच से बाहर चला गया और बगल में खड़ा हो गया। दुल्हन के रिश्तेदारों के उससे विनती करने के बावजूद अपीलकर्ता ने मंच पर आने से इन्कार कर दिया। उस समय अपीलकर्ता ने रिश्तेदारों से कहा कि 100 सिक्के पेश किए जाने के बाद ही वे बोल सकते हैं। फोटोग्राफर ने यह भी गवाही दी कि अपीलकर्ता के परिवार ने शादी की तस्वीरें लेने में भी सहयोग नहीं किया
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धारा 498-ए के तत्व पूरी तरह सिद्ध होते हैं
24 जनवरी को दिए फैसले में जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने कहा, 'हम संतुष्ट हैं कि आईपीसी की धारा 498-ए के तत्व पूरी तरह से सिद्ध होते हैं। अपीलकर्ता ने पत्नी को सोने के सिक्कों की अवैध मांग को पूरा करने के लिए उसे और उसकी मां को मजबूर करने के उद्देश्य से परेशान किया। जब पत्नी और उसके रिश्तेदारों ने ऐसी मांग पूरी नहीं की तो उसे परेशान करना जारी रखा। आईपीसी की धारा 498-ए और डीपी अधिनियम की धारा 4 के तत्व स्पष्ट रूप से सिद्ध होते हैं।'

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डीके शिवकुमार के मामले में हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ भाजपा विधायक की अपील पर सुप्रीम सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच के लिए सीबीआई को दी गई सहमति वापस लेने के मामले में भाजपा विधायक बसंगौड़ा आर पाटिल (यतनाल) से सवाल किए। 

पीठ ने कहा-ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता राजनीतिक लाभ के लिए आए हैं सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने भाजपा विधायक के वकील के परमेश्वर से कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता राजनीतिक लाभ के लिए सुप्रीम कोर्ट आए हैं। जवाब में परमेश्वर ने कहा, राज्य सरकार ने अभी तक अपना जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया है। यह मुद्दा राजनीतिक नहीं है क्योंकि सीबीआई ने भी अपील दायर की है। यह आय से अधिक संपत्ति का मामला है, जहां राज्य सरकार ने सीबीआई को उस व्यक्ति की जांच करने से रोकने के लिए सामान्य सहमति वापस ले ली, जो अब राज्य का उपमुख्यमंत्री है। ऐसा नहीं हो सकता। सीबीआई के वकील कनु अग्रवाल ने कहा कि अदालत एजेंसी को मामले में कानून के सवाल पर दलीलें पेश करने की अनुमति दे सकती है।
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