SC Updates: निठारी कांड से जुड़ी याचिका पर सुनवाई को अदालत तैयार; बार काउंसिल से जुड़े निर्देश पर SCBA असहमत
सुप्रीम कोर्ट ने निठारी हत्याकांड मामले में सुरेंद्र कोली को बरी करने के मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है। इसके अलावा पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई है, जिसमें चंडीगढ़-मोहाली सड़क को खाली करने के लिए कहा गया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है। यह याचिका 2006 के निठारी हत्याकांड मामले में सुरेंद्र कोली को बरी करने के मामले से जुड़ी है। न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने पीड़ितों में से एक के पिता पप्पू लाल द्वारा दायर अपील पर नोटिस जारी किया है। पप्पू लाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गीता लूथरा और अधिवक्ता रूपेश कुमार सिन्हा और सतरूप दास ने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने निष्कर्ष में गलती की है। शीर्ष अदालत द्वारा मामले में कोली को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके अलावा रिजस्ट्री को निर्देश दिया है कि ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट से रिकॉर्ड मंगाए जाएं। अपनी याचिका में, लाल ने उच्च न्यायालय के 16 अक्टूबर के आदेश को चुनौती दी और केवल कोली को पक्षकार बनाया है।
शीर्ष अदालत के बार काउंसिल से जुड़े निर्देश पर SCBA असहमत
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने एक प्रस्ताव पारित किया है जिसमें कहा गया है कि वकीलों के निकाय की कार्यकारी समिति में महिलाओं के लिए पद आरक्षित करने का सुप्रीम कोर्ट का निर्देश उसकी स्वतंत्रता को प्रभावित करता है। साथ ही यह भी बताया गया 2 मई का आदेश शीर्ष अदालत ने एससीबीए नियमों पर विचार किए बिना अपने आप पारित कर दिया था। एसोसिएशन के प्रस्ताव में कहा गया कि इस मामले में एक बैठक आयोजित की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपने आदेश में कहा था कि एससीबीए के आगामी चुनावों में कोषाध्यक्ष का पद महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाए। साथ ही यह भी कहा कि वकीलों के निकाय की कार्यकारी समिति में कम से कम एक तिहाई सीटें आरक्षित करनी होंगी। इसके अगले ही दिन एससीबीए द्वारा यह प्रस्ताव पारित किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें अधिकारियों को चंडीगढ़-मोहाली सड़क को खाली करने के लिए कहा गया था। दरअसल प्रदर्शनकारियों के एक समूह द्वारा सड़क को अवरुद्ध किया गया था। न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने पंजाब सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया। इसके अलावा याचिका दायर करने वाले एक गैर सरकारी संगठन, केंद्र और चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब मांगा गया है। सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह पंजाब सरकार के रुख का समर्थन कर रहे हैं। इसके अलावा पंजाब के महाधिवक्ता गुरमिंदर सिंह ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाई जाए।