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SC: आरजी कर मामले की फिर से जांच कराने की मांग, पीड़िता के परिजन की याचिका पर तत्काल सुनवाई से 'सुप्रीम' इनकार

Fri, 07 Feb 2025 11:05 AM IST
अभिषेक दीक्षित पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 07 Feb 2025 11:05 AM IST
सार

इससे पहले आरजी कर मामले में 20 जनवरी को सजा का एलान कर दिया गया था। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए दोषी संजय रॉय को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सियालदह अदालत ने संजय रॉय पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

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Supreme Court Updates: Kolkata RG Kar Case: SC refuses to entertain parents plea seeking reinvestigation
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुई दुष्कर्म और हत्या की भयावह वारदात को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका लगाई गई है। याचिका में मामले की नए सिरे से जांच कराने की मांग की गई है। प्रशिक्षु महिला डॉक्टर के माता-पिता याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की थी। हालांकि, कोर्ट में याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट इस मामले को 17 मार्च को ही सुनेगा।

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निचली कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
इससे पहले आरजी कर मामले में 20 जनवरी को सजा का एलान कर दिया गया था। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए दोषी संजय रॉय को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सियालदह अदालत ने संजय रॉय पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था। सियालदह कोर्ट के जज अनिरबन दास ने कहा था कि यह दुर्लभतम मामला नहीं है। पीड़ित परिवार को उसकी मौत के लिए 10 लाख रुपये मुआवजा और 7 लाख रुपये अतिरिक्त दिया जाना चाहिए।
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क्या है मामला?
सियालदह की अदालत के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिर्बान दास ने शनिवार को संजय रॉय को पिछले साल नौ अगस्त को अस्पताल में स्नातकोत्तर प्रशिक्षु महिला चिकित्सक के साथ दुष्कर्म और हत्या का दोषी करार दिया था। इस जघन्य अपराध के कारण देश भर में आक्रोश फैल गया था और लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन जारी रहा था।
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10 अगस्त 2024 को गिरफ्तार किया गया था
संजय को आरजी कर अस्पताल के सेमिनार कक्ष में 31 वर्षीय चिकित्सक का शव पाए जाने के एक दिन बाद 10 अगस्त 2024 को गिरफ्तार किया गया था। न्यायाधीश ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64, 66 और 103(1) के तहत उसे दोषी ठहराया था। रॉय को जिन धाराओं के तहत दोषी करार दिया गया था, उसमें उसे न्यूनतम आजीवन कारावास, जबकि अधिकतम मौत की सजा हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने नए सिरे से नीट-पीजी काउंसलिंग कराने की मांग खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) पीजी 2024 काउंसलिंग के अखिल भारतीय कोटा (एआईक्यू) राउंड 3 को नए सिरे से कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। मेडिकल के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अभी देश भर में राउंड 3 की काउंसलिंग चल रही है।

जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की तरफ से पेश वकील की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। वकील ने कहा यदि अब इस तरह का कोई निर्देश दिया जाता है तो इसका सभी राज्यों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा क्योंकि छात्र पहले ही काउंसलिंग में भाग ले चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पीजी में दाखिले के लिए एक समय सीमा है।

पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि अगर हम तीन याचिकाकर्ताओं की इस याचिका पर विचार करते हैं तो हमारे सामने अन्य 30 याचिकाएं आ जाएंगी। 4 फरवरी को शीर्ष अदालत ने याचिका पर केंद्र, एनएमसी और अन्य से जवाब तलब किया था। दरअसल, याचिकाकर्ता का कहना था कि मध्य प्रदेश में राज्य काउंसलिंग के दूसरे राउंड के पूरा होने में देरी के बाद सीट ब्लॉक होने के मामले सामने आए हैं।

कारगिल युद्ध में सेना की चूक के आरोप वाली पूर्व सैन्य अफसर की जनहित याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम इन्कार

सुप्रीम कोर्ट ने 1999 के कारगिल युद्ध से पहले पाकिस्तान की घुसपैठ के संबंध में सूचना पर कार्रवाई करने में सेना की ओर से चूक के आरोप वाली पूर्व सैन्य अधिकारी की जनहित याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। सीजेआई जस्टिस संजीव खन्ना व जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने कहा, न्यायपालिका आम तौर पर राष्ट्रीय रक्षा के मामले में नहीं जाती है। 1999 के युद्ध में जो कुछ हुआ, वह कार्यकारी निर्णय से संबंधित आंतरिक मामला है। पीठ पंचकूला के पूर्व सैन्य अधिकारी मनीष भटनागर की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उन्होंने कारगिल घुसपैठ के बारे में विश्वसनीय जानकारी तब उपलब्ध करा दी थी, जब आधिकारिक तौर पर इस पर ध्यान नहीं दिया गया और उस पर कार्रवाई नहीं की गई। सीजेआई ने कहा, कुछ चीजें ऐसी हैं जिनमें न्यायपालिका को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। यह हमारी ओर से गलत होगा। आपने युद्ध में भाग लिया और अब मुद्दों को वैसे ही छोड़ दें जैसे वे हैं। इसके बाद भटनागर ने जनहित याचिका वापस लेने की मांग की, जिसे अनुमति दे दी गई। पैराशूट रेजिमेंट की 5वीं बटालियन के पूर्व अधिकारी भटनागर ने पहले घुसपैठ की खोज और बाद में संचालन के दौरान इनसे निपटने के तरीके के बारे में सवाल उठाए थे। उन्होंने पहले आरोप लगाया था कि कारगिल घुसपैठ के बारे में उनकी सूचनाएं जनवरी-फरवरी 1999 में ही उनके वरिष्ठों को भेज दी गई थीं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया।

छात्रों को डाक मतपत्र अधिकार की मांग वाली जनहित याचिका खारिज
 सुप्रीम कोर्ट ने अपने निवास क्षेत्र से बाहर रहने वाले छात्रों के लिए डाक मतपत्र सुविधाओं के मुद्दे से जुड़़ी जनहित याचिका को खारिज कर दिया। सीजेआई जस्टिस संजीव खन्ना व जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि देश का निर्वाचन आयोग पहले से ही अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर रहने वाले छात्रों को उनके वर्तमान स्थान पर मतदाता के रूप में पंजीकरण करने के लिए एक तंत्र प्रदान करता है। शीर्ष अदालत अर्नब कुमार मलिक की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अपने मूल स्थानों से बाहर रहने वाले छात्रों के लिए डाक मतपत्र अधिकार की मांग की गई थी।

पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि वर्तमान डाक मतपत्र प्रणाली रक्षा कर्मियों और बुजुर्गों जैसी विशिष्ट श्रेणियों के लिए आरक्षित है। सीजेआई ने उदाहरण देते हुए कहा कि जस्टिस कुमार अपना वोट डालने के लिए घर गए थे। याचिकाकर्ता के वकील ने छात्रों के मतदान अधिकारों को सुविधाजनक बनाने के लिए एनआरआई के लिए उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मॉडल को अपनाने का सुझाव दिया। हालांकि, याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि मतदाता सूची पर मैनुअल विशेष रूप से छात्रों को अपने मेजबान शहर या कस्बे में मतदाता के रूप में पंजीकरण करने की अनुमति देता है, बशर्ते वे पात्रता मानदंडों को पूरा करते हों।

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