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Supreme Court: 'क्या हाईकोर्ट छुट्टी पर है?', अदालत में त्रिपुरा स्थायी निवास प्रमाण पत्र पर दायर याचिका खारिज

Fri, 14 Feb 2025 11:15 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Fri, 14 Feb 2025 11:15 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने त्रिपुरा के सरकारी विभागों में नौकरी के स्थायी निवास प्रमाण पत्र की अनिवार्यता को लेकर जारी अधिसूचना से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति बीआर गवई और ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह ने जांच के बाद याचिका पर सुनवाई करने में अनिच्छा दिखाई और याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट में जाने के लिए कहा। आइए पढ़ते हैं सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें...। 

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supreme court updates 'Is the HC on leave?', petition on Tripura Permanent Residence Certificate rejected
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने त्रिपुरा के सरकारी विभागों में नौकरी के स्थायी निवास प्रमाण पत्र की अनिवार्यता को लेकर जारी अधिसूचना से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति बीआर गवई और ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह ने जांच के बाद याचिका पर सुनवाई करने में अनिच्छा दिखाई और याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट में जाने के लिए कहा। इसके बाद वकील ने याचिका वापस ले ली।

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पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि क्या त्रिपुरा उच्च न्यायालय छुट्टी पर है? वकील ने तर्क दिया कि अधिसूचना में कहा गया है कि राज्य सरकार के विभागों और अर्ध-सरकारी निकायों में नौकरियों के लिए आवेदन करने के लिए त्रिपुरा का स्थायी निवासी प्रमाण पत्र आवश्यक है। जबकि शीर्ष अदालत ने एक फैसले में कहा है कि किसी राज्य द्वारा स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में निवास-आधारित आरक्षण असांविधानिक है।
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इस पर पीठ ने पूछा कि आप इस मुद्दे को उच्च न्यायालय में क्यों नहीं उठा सकते? आप उच्च न्यायालय क्यों नहीं जा सकते?इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि मामला कानून के बड़े सवाल से जुड़ा है, तो पीठ ने कहा कि क्या हाईकोर्ट को इन पर निर्णय लेने का अधिकार नहीं है? इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस ले ली।

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तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को लगाई फटकार
मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने में देरी करने पर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फटकार लगाई। मद्रास उच्च न्यायालय ने ईशा फाउंडेशन के खिलाफ पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन करने के लिए जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को रद्द कर दिया था। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएनपीसीबी) की याचिका को नौकरशाहों का दोस्ताना मैच करार दियाद्ध। पीठ ने कहा कि अधिकारियों को समय पर अदालत जाने से किसने रोका? इस याचिका को दायर करने में 637 दिनों की देरी हुई है, जो लगभग दो साल है। यह एक दोस्ताना मैच है, जहां अधिकारी याचिका को खारिज करने पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की मुहर चाहते हैं।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि जब राज्य की ओर से देरी की जाती है तो हमें संदेह होता है। कोर्ट ने विधि अधिकारी से कहा कि आप कैसे कह सकते हैं कि योग केंद्र एक शैक्षणिक संस्थान नहीं है? यदि वे योजना के अनुसार नहीं चल रहे हैं, तो आप गैर-अनुपालन को चुनौती दे सकते हैं, लेकिन आपको एक लाख गज से अधिक में निर्मित संरचना को ध्वस्त करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह किसी प्रकार की झोपड़ी नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अब जब ईशा फाउंडेशन ने कोयंबटूर जिले के वेल्लियांगिरी में एक योग और ध्यान केंद्र का निर्माण किया है, तो राज्य को पर्यावरण अनुपालन सुनिश्चित करना चाहिए। यहां सभी पर्यावरणीय मापदंडों सूरज की रोशनी, हरियाली, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का अनुपालन किया जाए। आप उन मुद्दों को उठा सकते हैं। इन मानदंडों का पालन करना सभी के लिए बाध्य है। ईशा फाउंडेशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने शीर्ष अदालत से शिवरात्रि के बाद मामले की सुनवाई करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हमारे पास सभी जरूरी मंजूरिया हैं। योग केंद्र 80 प्रतिशत हरित है। यह भारत के सबसे बेहतरीन केंद्रों में से एक है। पीठ ने मामले की सुनवाई शिवरात्रि के बाद तय की।

उपासना स्थल कानून पर सपा सांसद ने किया सुप्रीम कोर्ट का रुख
सपा की नेता और कैराना से सांसद इकरा चौधरी ने उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसके तहत किसी स्थान के धार्मिक चरित्र को 15 अगस्त, 1947 के अनुसार बनाए रखने का प्रावधान है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने शुक्रवार को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की ओर से प्रस्तुत सांसद की याचिका पर विचार किया। अदालत ने इसे 17 फरवरी को अन्य लंबित याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध करने का आदेश दिया। सीजेआई ने कहा, इतनी सारी नई याचिकाएं क्यों दायर की जा रही हैं? हर हफ्ते हमें एक याचिका मिलती है। चौधरी ने मस्जिदों और दरगाहों को निशाना बनाकर कानूनी कार्रवाई की बढ़ती प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने की मांग की। 

एजीआर बकाया में गलती सुधारने की भारती एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया की पुनर्विचार याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने दूरसंचार कंपनियों भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया सहित अन्य कंपनियों की ओर से दायर पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया। ये याचिकाएं समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) बकाया की गणना में हुई गलतियों को सुधारने के लिए दायर की गई थीं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से 2021 में दिए गए अपने पूर्व निर्णय को बरकरार रखा गया है, जिससे कंपनियों के पास अब कोई और कानूनी विकल्प नहीं बचा है। याचिका में दूरसंचार कंपनियों का तर्क था कि दूरसंचार विभाग (डीओटी) द्वारा की गई एजीआर बकाया की गणना में गंभीर त्रुटियां हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग ने उन भुगतानों को ध्यान में नहीं रखा, जो कंपनियों ने पहले ही कर दिए थे, जिससे बकाया राशि जरूरत से ज्यादा दिख रही थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दावे को खारिज करते हुए किसी भी पुनर्गणना की अनुमति देने से इन्कार कर दिया।

राजनीतिक दलों को आरटीआई के दायरे में लाने पर अप्रैल में सुनवाई करेगा शीर्ष कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों को सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई एक्ट) के दायरे में लाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई अप्रैल में करने का फैसला लिया है। देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने सभी पक्षों से कहा कि इस मामले से जुड़े सारे अनुरोध तब तक पूरे कर लें। कोर्ट 21 अप्रैल से आरंभ हो रहे सप्ताह में मामले की सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों को सार्वजनिक प्राधिकरण मानते हुए आरटीआई कानून के दायरे में लाने की मांग करने वाली कई याचिकाओं के समूह पर सुनवाई कर रहा है। इस मामले में कांग्रेस और भाजपा समेत कई राजनीतिक दलों को पक्षकार बनाया गया है। गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स समेत अन्य की ओर से दायर इन याचिकाओं में कहा गया है कि केंद्रीय सूचना आयुक्त (सीआईसी)ने 2013 और 2015 में अपने आदेश में कहा है कि सरकार से टैक्स छूट समेत अन्य लाभ लेने वाले राजनीतिक दलों को राजनीतिक प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए आरटीआई के दायरे में लाना चाहिए।

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