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SC: सीईसी और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई टली; जानें मामला
Wed, 19 Feb 2025 03:16 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Wed, 19 Feb 2025 03:16 PM IST
सार
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त से जुड़े कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित कर दी है। इससे पहले मंगलवार को कोर्ट ने कहा था कि वह सीईसी और ईसी की नियुक्तियों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर 19 फरवरी को प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करेगा।
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उपासना स्थल कानून पर नई याचिकाओं से सुप्रीम कोर्ट नाराज
- फोटो : ANI
विस्तार
देश की सर्वोच्च न्यायालय ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई स्थगित कर दी है, जिसमें चुनाव आयुक्तों के चयन पैनल से भारत के मुख्य न्यायाधीश को हटा दिया गया था। इससे पहले कोर्ट ने मंगलवार को कहा था कि वह मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) और निर्वाचन आयुक्तों (ईसी) की नियुक्तियों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर 19 फरवरी को प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करेगा।
याचिकाकर्ताओं की क्या है दलील
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ को एक गैर सरकारी संगठन की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने बताया था कि संविधान पीठ के 2023 के फैसले में कहा गया था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्तियां ऐसा पैनल करेगा, जिसमें भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) भी शामिल होंगे। इसके बावजूद सरकार ने सीजेआई को इसमें शामिल नहीं किया और इस तरह से लोकतंत्र का मजाक उड़ाया।
उन्होंने कहा, 'यह मामला 19 फरवरी के लिए सूचीबद्ध है, लेकिन इसे आइटम नंबर 41 के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। सरकार ने संविधान पीठ के दृष्टिकोण की अनदेखी करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त, निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की है। कृपया इसे पहले उठाएं, क्योंकि मामले पर तत्काल विचार करने की आवश्यकता है।' याचिकाकर्ता जया ठाकुर की ओर से पेश हुए अधिवक्ता वरुण ठाकुर ने कहा था कि सरकार ने नए कानून के तहत तीन नियुक्तियां की हैं, जिन्हें चुनौती दी गई है।
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पीठ ने दिया था आश्वासन
इस पर पीठ ने भूषण और अन्य पक्षों को आश्वासन दिया कि कुछ अत्यावश्यक सूचीबद्ध मामलों के बाद वह 19 फरवरी को सुनवाई के लिए याचिकाओं पर विचार करेगी।
ज्ञानेश कुमार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया
इससे पहले सरकार ने सोमवार को ज्ञानेश कुमार को अगला मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया है। वे जनवरी 2024 में सहकारिता मंत्रालय में सचिव के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्हें मार्च 2024 में उन्हें निर्वाचन आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया। राजीव कुमार के मंगलवार शाम को सेवानिवृत्त होने के एक दिन बाद उन्होंने बुधवार को 26वें सीईसी के रूप में शपथ ली।
नए सीईसी के एलान पर कांग्रेस हमलावर
वहीं देश के नए मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा रही है, तब आधी रात को नए मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन का फैसला लेना प्रधानमंत्री, गृहमंत्री के लिए अपमानजनक और अशिष्ट है।
क्रिप्टो करंसी धोखाधड़ी मामले में आरोपी को जमानत मिली
सुप्रीम कोर्ट ने क्रिप्टो करंसी धोखाधड़ी मामले में छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के एक आरोपी को जमानत दी। शीर्ष कोर्ट ने उसे छह महीने के भीतर 35 लाख रुपये की राशि जमा करने की शर्त पर जमानत दी। रायपुर जिले में हुई इस धोखाधड़ी के मामले में करीब 2,000 निवेशकों का पैसा डूब गया था। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि इस मामले का मुकदमा लंबा चल सकता है और आोपी पर आर्थिक अपराध का आरोप है। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी को निचली अदालत की शर्तों के अनुसार जमानत दी जा सकती है।
क्या अदालतें मध्यस्थ पुरस्कारों में संशोधन कर सकती हैं? सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय सुरक्षित रखा
क्या अदालतें 1996 के मध्यस्थता और सुलह कानून के तहत मध्यस्थत पुरस्कारों को संशोधित कर सकती है, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। चीफ जस्टिस (सीजेआई) संजीव खन्ना, जस्टिस बी.आर. गवाई, जस्टिस संजय कुमार, जस्टिस के.वी.विश्वनाथन और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की संविधान पीठ ने तीन दिनों तक वरिष्ठ वकीलों की दलीलों को सुना। इनमें सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, अरविंद दातार, दरिय खंबाटा, शेखर नपाहडे और रितिन राय शामिल थे।
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याचिकाकर्ताओं की क्या है दलील
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ को एक गैर सरकारी संगठन की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने बताया था कि संविधान पीठ के 2023 के फैसले में कहा गया था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्तियां ऐसा पैनल करेगा, जिसमें भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) भी शामिल होंगे। इसके बावजूद सरकार ने सीजेआई को इसमें शामिल नहीं किया और इस तरह से लोकतंत्र का मजाक उड़ाया।
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उन्होंने कहा, 'यह मामला 19 फरवरी के लिए सूचीबद्ध है, लेकिन इसे आइटम नंबर 41 के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। सरकार ने संविधान पीठ के दृष्टिकोण की अनदेखी करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त, निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की है। कृपया इसे पहले उठाएं, क्योंकि मामले पर तत्काल विचार करने की आवश्यकता है।' याचिकाकर्ता जया ठाकुर की ओर से पेश हुए अधिवक्ता वरुण ठाकुर ने कहा था कि सरकार ने नए कानून के तहत तीन नियुक्तियां की हैं, जिन्हें चुनौती दी गई है।
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पीठ ने दिया था आश्वासन
इस पर पीठ ने भूषण और अन्य पक्षों को आश्वासन दिया कि कुछ अत्यावश्यक सूचीबद्ध मामलों के बाद वह 19 फरवरी को सुनवाई के लिए याचिकाओं पर विचार करेगी।
ज्ञानेश कुमार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया
इससे पहले सरकार ने सोमवार को ज्ञानेश कुमार को अगला मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया है। वे जनवरी 2024 में सहकारिता मंत्रालय में सचिव के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्हें मार्च 2024 में उन्हें निर्वाचन आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया। राजीव कुमार के मंगलवार शाम को सेवानिवृत्त होने के एक दिन बाद उन्होंने बुधवार को 26वें सीईसी के रूप में शपथ ली।
नए सीईसी के एलान पर कांग्रेस हमलावर
वहीं देश के नए मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा रही है, तब आधी रात को नए मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन का फैसला लेना प्रधानमंत्री, गृहमंत्री के लिए अपमानजनक और अशिष्ट है।
क्रिप्टो करंसी धोखाधड़ी मामले में आरोपी को जमानत मिली
सुप्रीम कोर्ट ने क्रिप्टो करंसी धोखाधड़ी मामले में छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के एक आरोपी को जमानत दी। शीर्ष कोर्ट ने उसे छह महीने के भीतर 35 लाख रुपये की राशि जमा करने की शर्त पर जमानत दी। रायपुर जिले में हुई इस धोखाधड़ी के मामले में करीब 2,000 निवेशकों का पैसा डूब गया था। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि इस मामले का मुकदमा लंबा चल सकता है और आोपी पर आर्थिक अपराध का आरोप है। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी को निचली अदालत की शर्तों के अनुसार जमानत दी जा सकती है।
क्या अदालतें मध्यस्थ पुरस्कारों में संशोधन कर सकती हैं? सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय सुरक्षित रखा
क्या अदालतें 1996 के मध्यस्थता और सुलह कानून के तहत मध्यस्थत पुरस्कारों को संशोधित कर सकती है, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। चीफ जस्टिस (सीजेआई) संजीव खन्ना, जस्टिस बी.आर. गवाई, जस्टिस संजय कुमार, जस्टिस के.वी.विश्वनाथन और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की संविधान पीठ ने तीन दिनों तक वरिष्ठ वकीलों की दलीलों को सुना। इनमें सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, अरविंद दातार, दरिय खंबाटा, शेखर नपाहडे और रितिन राय शामिल थे।
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