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Supreme Court: WBSSC केस में फैसले की समीक्षा नहीं होगी; चंडी देवी मंदिर हरिद्वार का मामला वापस हाईकोर्ट लौटा

Tue, 19 Aug 2025 07:17 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 19 Aug 2025 07:17 PM IST
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Supreme Court Updates: Decide plea over Haridwar temple receiver appointment, SC tells Uttarakhand HC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने कोर्ट से अपने पुराने फैसले की समीक्षा की मांग की थी। अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा संचालित और सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। कारण यह था कि पश्चिम बंगाल एसएससी द्वारा आयोजित 2016 की भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली और गड़बड़ी हुई थी। अपने तीन अप्रैल के फैसले में शीर्ष अदालत ने पूरी चयन प्रक्रिया को गलत और दूषित बताते हुए नियुक्तियों को अमान्य करार दिया था। कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी 22 अप्रैल 2024 के फैसले में नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश दिया था। साथ ही कहा था कि जिन लोगों ने गड़बड़ी करके नौकरी पाई थी, उन्हें प्राप्त वेतन/भुगतान वापस करने चाहिए। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के इस फैसले को बरकरार रखा था। पांच अगस्त को कई पुनर्विचार याचिकाएं न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ के समक्ष विचारार्थ आईं, लेकिन पीठ ने कहा कि सभी पहलुओं पर पहले ही गहराई से विचार हो चुका है, अब इस पर दोबारा सुनवाई की जरूरत नहीं है। 

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चंडी देवी मंदिर हरिद्वार का मामला वापस हाईकोर्ट लौटा
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह हरिद्वार में मौजूद मां चंडी देवी मंदिर के एक सेवायत की याचिका पर फैसला करे। यह याचिका हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ है, जिसमें बद्री-केदार मंदिर समिति को मंदिर प्रबंधन देखने के लिए रिसीवर (नियंत्रक) नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था। बता दें कि सेवायत वे पुजारी होते हैं जो मंदिर में दैनिक पूजा-पाठ और परंपरागत प्रबंधन में सक्रिय रहते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एसवीएन भट्टी शामिल थे, ने हरिद्वार के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) को मंदिर प्रबंधन में किसी तरह की गड़बड़ी है या नहीं, इस पर रिपोर्ट देने को कहा। अदालत ने कहा कि यह रिपोर्ट उत्तराखंड हाईकोर्ट को सौंपी जाए और इस मामले पर छह हफ्तों बाद सुनवाई हो।
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याचिकाकर्ता की दलील
महंत भवानी नंदन गिरी ने याचिका दाखिल की थी। उनका कहना है कि हाईकोर्ट ने बिना किसी शिकायत या सबूत के मंदिर का नियंत्रण समिति को सौंप दिया। 2012 में पहले से ही डीएम और एसएसपी की अध्यक्षता वाली एक समिति मंदिर की देखरेख कर रही है। याचिकाकर्ता ने कहा कि हाईकोर्ट ने यह आदेश एक आपराधिक मामले में अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान दिया, जबकि यह विषय उस मामले से जुड़ा ही नहीं था। उनका कहना है कि आदेश बिना नोटिस दिए और बिना उन्हें सुने ही पारित कर दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है।

मां चंडी देवी मंदिर का इतिहास
मां चंडी देवी मंदिर का निर्माण 8वीं सदी में जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने कराया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि तब से अब तक उनके पूर्वज ही सेवायत के रूप में मंदिर का प्रबंधन करते आए हैं। हाईकोर्ट ने आदेश तब दिया जब वह रोहित गिरी नामक मुख्य पुजारी की साथी रीना बिष्ट की अग्रिम जमानत याचिका सुन रहा था। रोहित गिरी की पत्नी गीताांजलि ने 21 मई को अपने पति, रीना बिष्ट और सात अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। आरोप था कि 14 मई को उनके बेटे को गाड़ी से कुचलने की कोशिश की गई। इसी दौरान रोहित गिरी को पंजाब पुलिस ने एक छेड़छाड़ के अलग मामले में गिरफ्तार कर लिया था और वह अभी न्यायिक हिरासत में हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि मंदिर ट्रस्ट के अंदर विषाक्त माहौल है और दान की रकम में गड़बड़ी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

दुष्कर्म के मामलों को वास्तविक प्रेम संबंध के मामलों से अलग किया जाए: सुप्रीम कोर्ट
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को दुष्कर्म और वयस्कता की ओर बढ़ रहे युवाओं से जुड़े वास्तविक प्रेम संबंधों के मामलों के बीच अंतर करने की आवश्यकता पर जोर दिया। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने सह-शिक्षा संस्थानों और विश्वविद्यालयों के अस्तित्व का उल्लेख करते हुए कहा कि अब उनमें एक-दूसरे के लिए भावनाएं विकसित होती हैं। क्या आप कह सकते हैं कि प्यार करना अपराध है? हमें दुष्कर्म आदि जैसे आपराधिक कृत्य और इससे अंतर रखना होगा। पीठ ने कहा कि जब वास्तविक प्रेम संबंध होते हैं, तो वे एक-दूसरे को पसंद करते हैं और वे शादी करना चाहते हैं। ऐसे मामलों को आपराधिक मामलों के समान न समझें। आपको समाज की वास्तविकता को ध्यान में रखना होगा। पीठ ने कहा कि यह समाज की कठोर वास्तविकता है। घर से भागने की घटनाओं को छिपाने के लिए भी पोक्सो अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए जाते हैं।

पलियेक्कारा प्लाजा पर टोल वसूली रोकने का केरल हाईकोर्ट का आदेश बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और त्रिशूर के पलियेक्कारा टोल प्लाजा का संचालन करने वाले कंसेसियनार की केरल हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ याचिकाएं खारिज कर दी हैं, जिसमें चार हफ्तों के लिए टोल वसूली रोकने का आदेश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोग पहले ही टैक्स चुका चुके हैं, इसलिए उनसे खराब और गड्ढों वाली सड़कों पर चलने के लिए दोबारा पैसे नहीं लिए जा सकते। मंगलवार शाम को अपलोड किए गए एक आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और जोर देकर कहा कि जब प्रशासनिक चूक और सड़कों की खराब स्थिति के कारण जनता को लंबे समय तक असुविधा हो रही हो, तो नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण को व्यावसायिक हितों से ज्यादा अहमियत दी जानी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने आदेश दिया, 'नागरिकों को उन सड़कों पर चलने की आजादी दी जाए, जिनके इस्तेमाल के लिए उन्होंने पहले ही टैक्स चुका दिया है, और उन्हें नालियों और गड्ढों से बचने के लिए और टैक्स नहीं देना होगा, जो अकुशलता के प्रतीक हैं।' पीठ ने उच्च न्यायालय की टिप्पणियों और निष्कर्षों से सहमति व्यक्त की।

इंदौर के कार्टूनिस्ट पीएम और संघ से मांगेंगे माफी, सोशल मीडिया पर लिखेंगे माफीनामा
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इंदौर के कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस के खिलाफ बनाए गए आपत्तिजनक कार्टून मामले में दी गई गिरफ्तारी से सुरक्षा को बढ़ा दिया। साथ ही अदालत ने मालवीय को आदेश दिया है कि वह दस दिन के भीतर फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर माफी प्रकाशित करें। इससे पहले शीर्ष अदालत ने मालवीय को हलफनामे के रूप में हिंदी में माफीनामा दायर करने का निर्देश दिया था। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि माफी प्रकाशित करने की शर्त पर अंतरिम सुरक्षा को अगली सुनवाई तक बढ़ाया जाता है। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि जांच चल रही है, इसलिए विवादित पोस्ट को डिलीट नहीं किया जाना चाहिए। मालवीय भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने का लिखित आश्वासन दें।

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