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SC Updates: मुंबई में नए यात्री जेटी के खिलाफ दायर याचिका खारिज; पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण रोकने से भी इनकार
Mon, 01 Sep 2025 01:47 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Mon, 01 Sep 2025 01:47 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई
दक्षिण मुंबई स्थित गेटवे ऑफ इंडिया पर एक नए यात्री जेटी और टर्मिनल के निर्माण के खिलाफ दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। हाई कोर्ट ने 15 जुलाई को गेटवे ऑफ इंडिया के पास महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड (एमएमबी) द्वारा प्रस्तावित 229 करोड़ रुपये की लागत वाली यात्री जेटी और टर्मिनल सुविधा के निर्माण को चुनौती देने वाली तीन याचिकाओं को खारिज कर दिया था।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ लॉरा डी सूजा द्वारा दायर अपील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह मुद्दा सरकार के नीतिगत अधिकार क्षेत्र में आता है। समुद्र में लगभग 1.5 एकड़ में फैली यह परियोजना, दक्षिण मुंबई में रेडियो क्लब के पास स्थित गेटवे ऑफ इंडिया से लगभग 280 मीटर की दूरी पर होगी। याचिका के अनुसार, परियोजना योजना में 150 कारों की पार्किंग, वीआईपी लाउंज/प्रतीक्षा क्षेत्र, एम्फीथिएटर और टिकट काउंटर/प्रशासनिक क्षेत्र के साथ-साथ समुद्र में खंभों पर टेनिस रैकेट के आकार का एक विशाल जेटी बनाना शामिल है। यह आरोप लगाया गया था कि इस परियोजना से स्थानीय लोगों को असुविधा होगी क्योंकि योजना में यातायात की समस्या के मुद्दे पर विचार नहीं किया गया है।
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मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ लॉरा डी सूजा द्वारा दायर अपील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह मुद्दा सरकार के नीतिगत अधिकार क्षेत्र में आता है। समुद्र में लगभग 1.5 एकड़ में फैली यह परियोजना, दक्षिण मुंबई में रेडियो क्लब के पास स्थित गेटवे ऑफ इंडिया से लगभग 280 मीटर की दूरी पर होगी। याचिका के अनुसार, परियोजना योजना में 150 कारों की पार्किंग, वीआईपी लाउंज/प्रतीक्षा क्षेत्र, एम्फीथिएटर और टिकट काउंटर/प्रशासनिक क्षेत्र के साथ-साथ समुद्र में खंभों पर टेनिस रैकेट के आकार का एक विशाल जेटी बनाना शामिल है। यह आरोप लगाया गया था कि इस परियोजना से स्थानीय लोगों को असुविधा होगी क्योंकि योजना में यातायात की समस्या के मुद्दे पर विचार नहीं किया गया है।
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20 प्रतिशत इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल की शुरुआत के खिलाफ जनहित याचिका खारिज
पेट्रोल पंप
- फोटो : AI
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक जनहित याचिका खारिज कर दी, जिसमें देश भर में 20 प्रतिशत इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी-20) की शुरुआत को चुनौती दी गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि लाखों वाहन चालकों को एथेनॉल मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि उनके वाहन इसके लिए डिजाइन नहीं हैं। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने अधिवक्ता अक्षय मल्होत्रा द्वारा दायर याचिका में उठाए गए तर्कों को खारिज कर दिया। याचिका में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को सभी पेट्रोल पंपों पर इथेनॉल-मुक्त पेट्रोल की उपलब्धता भी सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई थी।
याचिका में दावा किया गया है कि लाखों वाहन चालक पेट्रोल पंपों पर असहाय महसूस कर रहे हैं और उन्हें ऐसा ईंधन खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है जिसे उनके वाहन संभाल नहीं सकते। याचिका में दावा किया गया है कि 2023 से पहले निर्मित कारें और दोपहिया वाहन, और यहां तक कि कुछ नए BS-VI मॉडल भी, उच्च इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के लिए अनुकूल नहीं हैं। केंद्र ने याचिका का विरोध किया और दावा किया कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन गन्ना किसानों के लिए फायदेमंद है।
याचिका में दावा किया गया है कि लाखों वाहन चालक पेट्रोल पंपों पर असहाय महसूस कर रहे हैं और उन्हें ऐसा ईंधन खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है जिसे उनके वाहन संभाल नहीं सकते। याचिका में दावा किया गया है कि 2023 से पहले निर्मित कारें और दोपहिया वाहन, और यहां तक कि कुछ नए BS-VI मॉडल भी, उच्च इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के लिए अनुकूल नहीं हैं। केंद्र ने याचिका का विरोध किया और दावा किया कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन गन्ना किसानों के लिए फायदेमंद है।
ट्रांसजेंडर-समावेशी स्कूली पाठ्यपुस्तकों की मांग- केंद्र को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र, एनसीईआरटी और महाराष्ट्र सहित छह राज्यों से स्कूली पाठ्यक्रम में ट्रांसजेंडर-समावेशी व्यापक यौन शिक्षा (सीएसई) को शामिल करने की मांग वाली एक जनहित याचिका पर जवाब मांगा। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन की दलीलों पर गौर किया और प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर आठ सप्ताह के भीतर जवाब मांगा।
केंद्र और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के अलावा, याचिकाकर्ता काव्या मुखर्जी साहा ने याचिका में महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पंजाब, तमिलनाडु और कर्नाटक को पक्षकार बनाया। बारहवीं कक्षा की छात्रा साहा की तरफ से दायर जनहित याचिका में एनसीईआरटी और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की तरफ से तैयार स्कूली पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों में ट्रांसजेंडर-समावेशी सीएसई को शामिल करने का आग्रह किया गया था। याचिका में कहा गया है कि एनसीईआरटी और अधिकांश एससीईआरटी, नालसा बनाम भारत संघ मामले में शीर्ष अदालत के बाध्यकारी निर्देशों का पालन करने में विफल रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र, एनसीईआरटी और महाराष्ट्र सहित छह राज्यों से स्कूली पाठ्यक्रम में ट्रांसजेंडर-समावेशी व्यापक यौन शिक्षा (सीएसई) को शामिल करने की मांग वाली एक जनहित याचिका पर जवाब मांगा। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन की दलीलों पर गौर किया और प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर आठ सप्ताह के भीतर जवाब मांगा।
केंद्र और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के अलावा, याचिकाकर्ता काव्या मुखर्जी साहा ने याचिका में महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पंजाब, तमिलनाडु और कर्नाटक को पक्षकार बनाया। बारहवीं कक्षा की छात्रा साहा की तरफ से दायर जनहित याचिका में एनसीईआरटी और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की तरफ से तैयार स्कूली पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों में ट्रांसजेंडर-समावेशी सीएसई को शामिल करने का आग्रह किया गया था। याचिका में कहा गया है कि एनसीईआरटी और अधिकांश एससीईआरटी, नालसा बनाम भारत संघ मामले में शीर्ष अदालत के बाध्यकारी निर्देशों का पालन करने में विफल रहे हैं।
IGI एयरपोर्ट पर ध्वनि स्तर से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करे NGT- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से कहा कि वह इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे पर ध्वनि स्तर से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करे। शीर्ष अदालत ने कहा कि एनजीटी ध्वनि स्तर की निगरानी के संबंध में दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड को दिए गए अपने 2024 के निर्देशों के अनुपालन के संबंध में दायर की होने वाली किसी भी नई याचिका पर विचार करे।
एनजीटी ने रनवे संख्या 29/11 के उपयोग से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर आगे कोई निर्देश जारी करने से इन्कार कर दिया था। इसके बाद इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। रनवे संख्या 29/11 का उपयोग आईजीआई हवाई अड्डे पर 50 प्रतिशत से अधिक उड़ानों के आगमन और प्रस्थान के लिए किया जाता है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा, इस मामले में याचिकाकर्ता को एक बार फिर राष्ट्रीय हरित अधिकरण के समक्ष सभी सहायक सामग्री के साथ नया आवेदन दायर करे। पीठ ने कहा कि एनजीटी को नए आवेदन पर तेजी से सुनवाई करनी होगी। शीर्ष अदालत एनजीटी के जुलाई 2024 के आदेश के खिलाफ संस्कृति, विरासत, पर्यावरण, परंपराओं और राष्ट्रीय जागरूकता के संरक्षण के लिए सोसायटी की अपील पर सुनवाई कर रही थी।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से कहा कि वह इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे पर ध्वनि स्तर से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करे। शीर्ष अदालत ने कहा कि एनजीटी ध्वनि स्तर की निगरानी के संबंध में दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड को दिए गए अपने 2024 के निर्देशों के अनुपालन के संबंध में दायर की होने वाली किसी भी नई याचिका पर विचार करे।
एनजीटी ने रनवे संख्या 29/11 के उपयोग से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर आगे कोई निर्देश जारी करने से इन्कार कर दिया था। इसके बाद इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। रनवे संख्या 29/11 का उपयोग आईजीआई हवाई अड्डे पर 50 प्रतिशत से अधिक उड़ानों के आगमन और प्रस्थान के लिए किया जाता है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा, इस मामले में याचिकाकर्ता को एक बार फिर राष्ट्रीय हरित अधिकरण के समक्ष सभी सहायक सामग्री के साथ नया आवेदन दायर करे। पीठ ने कहा कि एनजीटी को नए आवेदन पर तेजी से सुनवाई करनी होगी। शीर्ष अदालत एनजीटी के जुलाई 2024 के आदेश के खिलाफ संस्कृति, विरासत, पर्यावरण, परंपराओं और राष्ट्रीय जागरूकता के संरक्षण के लिए सोसायटी की अपील पर सुनवाई कर रही थी।