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Hindi News ›   India News ›   Supreme court updates 26 feb The Court has fixed the date for hearing in the Aravalli and Sonam Wangchuk cases

SC Updates: अरावली मामले में 'सुप्रीम' सख्ती, बनेगा विशेषज्ञ पैनल; सोनम वांगचुक की याचिका पर अंतिम सुनवाई तय

Thu, 26 Feb 2026 09:11 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Thu, 26 Feb 2026 09:11 PM IST
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Supreme court updates 26 feb The Court has fixed the date for hearing in the Aravalli and Sonam Wangchuk cases
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली क्षेत्र की सही परिभाषा तय करने के मामले में अगली सुनवाई तय की है। कोर्ट एक विशेषज्ञ समिति बनाने पर विचार करेगा, जो यह देखेगी कि अरावली क्षेत्र की सीमा क्या हो और उससे जुड़े मुद्दों को कैसे सुलझाया जाए। कोर्ट ने कहा कि फिलहाल जिन गतिविधियों, खासकर खनन के लिए लाइसेंस दिए गए थे, वे रुके रहेंगे। जब तक मामले का चरणबद्ध तरीके से समाधान नहीं होता, तब तक यथास्थिति बनी रहेगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि इतिहास के आधार पर देखें तो सुप्रीम कोर्ट की इमारत भी कभी अरावली क्षेत्र में मानी जा सकती थी, लेकिन आज ऐसा कहना सही नहीं होगा।

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सोनम वांगचुक की याचिका पर अंतिम सुनवाई तय
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे आंगमो की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम सुनवाई 10 मार्च को तय कर दी है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत वांगचुक की हिरासत को चुनौती दी गई है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने साफ कहा कि अब किसी भी पक्ष को अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई संदेह होगा तो उसी दिन पूछा जाएगा और फिर मामले की सुनवाई समाप्त कर दी जाएगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल्स को झंझट और जिम्मेदारीहीन करार दिया

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि देश के ट्रिब्यूनल्स अब एक झंझट और जिम्मेदारीहीन संस्था बन गए हैं। कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई कि कई ट्रिब्यूनल्स न्यायिक या किसी और के प्रति जवाबदेह नहीं हैं और कुछ तकनीकी सदस्य अपने फैसले खुद लिखने के बजाय उन्हें दूसरों से लिखवा रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और बेंच के अन्य न्यायाधीशों ने कहा कि ट्रिब्यूनल्स सरकार की बनाई संस्थाएं हैं, लेकिन अब यह नो-मैन’स लैंड बन गए हैं।

सीजेआई ने कहा कि तकनीकी सदस्य कई ट्रिब्यूनल्स में खुद जजमेंट नहीं लिखते, बल्कि न्यायिक सदस्य से अपना नाम देकर जजमेंट लिखवाते हैं। उन्होंने इसे पूरी तरह सिस्टम में गड़बड़ी बताया और कहा कि यह राष्ट्रीय हित में नहीं है। कोर्ट ने कहा कि तकनीकी सदस्य पर्यावरण, कॉर्पोरेट और दिवालियापन कानून नहीं समझते, जिससे उच्च न्यायालय के जज इन क्षेत्रों में अनुभव नहीं ले पा रहे। मामले में अंतरिम उपाय के तौर पर ट्रिब्यूनल्स के चेयरपर्सन की अवधि बढ़ाने का निर्देश दिया गया है, ताकि नई व्यवस्था बनने तक काम प्रभावित न हो। नवंबर 2025 में कोर्ट ने ट्रिब्यूनल्स सुधार अधिनियम, 2021 के कुछ प्रावधान रद्द किए थे।

 

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कचनाथम : मद्रास हाई कोर्ट ने 26 दोषियों की उम्रकैद बरकरार रखी

तमिलनाडु के शिवगंगा जिले के कचनाथम गांव में 2018 में हुई तीन दलित युवकों की हत्या के मामले में बड़ा फैसला आया है। मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने 26 दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है, जबकि एक आरोपी इलयराजा को बरी कर दिया गया। यह फैसला जस्टिस जी.के. इलंथिरैयन और जस्टिस आर. पूर्णिमा की खंडपीठ ने सुनाया। कोर्ट आरोपियों की उस अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने अपनी सजा को चुनौती दी थी।

इस मामले में 2022 में शिवगंगा की विशेष अदालत (एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई के लिए बनी अदालत) ने 27 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। ये सभी आरोपी एक प्रभावशाली जाति से थे। घटना 28 मई 2018 की है, जब आरोप है कि प्रभावशाली जाति के लोगों के एक समूह ने दलित समुदाय के लोगों पर घातक हथियारों से हमला किया। बताया गया कि हमलावर इस बात से नाराज़ थे कि गांव के दलितों ने उन्हें मंदिर में पारंपरिक सम्मान नहीं दिया और उनके सामने पैर पर पैर रखकर बैठे।

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