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सुप्रीम कोर्ट अपडेट: एचपीवी टीकाकरण से जुड़ी याचिका खारिज, अदालत ने कहा- मामला गंभीर, नहीं लगेगी रोक
Thu, 10 Sep 2026 12:52 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नई दिल्ली।
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Thu, 10 Sep 2026 12:52 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट अपडेट
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
एचपीवी वैक्सीनेशन पर याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने सुनने से किया इनकार
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए किशोरियों के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे देशव्यापी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) टीकाकरण अभियान पर चिंता जताने वाली एक याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा कि जब भी गलत टीकाकरण का मामला सामने आता है, तो मुआवजे के सामान्य नियम लागू होंगे। बेंच ने पूछा, 'क्या आप इसे वापस लेना चाहते हैं? क्या आप चाहते हैं कि हम इस पर कोई टिप्पणी करें?' बेंच ने कहा, 'हमसे कड़ी टिप्पणी करने के लिए न कहें। अगर याचिकाकर्ता डॉक्टर हैं, तो यह बहुत ही गंभीर मामला है। यह हमारी लाखों बेटियों की सेहत का सवाल है। और आप इसे पटरी से उतारना चाहते हैं।'
सुप्रीम कोर्ट ने सालबोनी जमीन हड़पने के मामले में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के पर्सनल असिस्टेंट सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। इससे पहले हुई सुनवाई में, सुप्रीम कोर्ट ने रॉय की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। उन्हें जांच में शामिल होने और जांच एजेंसी का सहयोग करने का निर्देश दिया था। रॉय ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
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सुप्रीम कोर्ट में नाबालिगों की सोशल मीडिया सुरक्षा पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिगों के सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म इस्तेमाल को सुरक्षित बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया। याचिका NGO ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस’ ने दाखिल की है। इसमें कहा गया कि कई प्लेटफॉर्म 13 साल की उम्र से अकाउंट बनाने की अनुमति देते हैं, जबकि भारतीय कानून में 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति नाबालिग हैं। याचिका में 18 साल से कम उम्र के बच्चों से बिना माता-पिता की सहमति डिजिटल अनुबंध न करने, उम्र सत्यापन और पैरेंटल ई-केवाईसी जैसे सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिगों के सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म इस्तेमाल को सुरक्षित बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया। याचिका NGO ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस’ ने दाखिल की है। इसमें कहा गया कि कई प्लेटफॉर्म 13 साल की उम्र से अकाउंट बनाने की अनुमति देते हैं, जबकि भारतीय कानून में 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति नाबालिग हैं। याचिका में 18 साल से कम उम्र के बच्चों से बिना माता-पिता की सहमति डिजिटल अनुबंध न करने, उम्र सत्यापन और पैरेंटल ई-केवाईसी जैसे सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की गई है।
सीजेपी प्रदर्शनों के दौरान 17 मेट्रो स्टेशन बंद करने पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में सीजेपी प्रदर्शनों के दौरान 17 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के मामले में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस, डीएमआरसी और अन्य से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया कि सार्वजनिक सुविधा को बंद करने के लिए कोई स्पष्ट कानूनी आदेश जारी नहीं किया गया था। याचिकाकर्ता ने कहा कि इससे आम लोगों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हुए और दिल्ली में यातायात व्यवस्था भी बिगड़ गई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि स्टेशनों को बंद करने का कानूनी आधार क्या था। कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में सीजेपी प्रदर्शनों के दौरान 17 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के मामले में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस, डीएमआरसी और अन्य से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया कि सार्वजनिक सुविधा को बंद करने के लिए कोई स्पष्ट कानूनी आदेश जारी नहीं किया गया था। याचिकाकर्ता ने कहा कि इससे आम लोगों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हुए और दिल्ली में यातायात व्यवस्था भी बिगड़ गई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि स्टेशनों को बंद करने का कानूनी आधार क्या था। कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने पर विचार करेगा कोस्ट गार्ड, सुप्रीम कोर्ट ने 2 हफ्ते में फैसला मांगा
भारतीय तटरक्षक बल ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह शॉर्ट सर्विस अपॉइंटी (एसएसए) अधिकारी प्रियंका त्यागी और इसी तरह की स्थिति वाली अन्य महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने पर विचार करेगा। इसके लिए पहले उनकी विजिलेंस क्लियरेंस रिपोर्ट का इंतजार किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने रिपोर्ट मिलने के बाद दो हफ्ते के भीतर फैसला लेने को कहा है। त्यागी ने 14 साल से अधिक सेवा पूरी करने के बाद स्थायी कमीशन के लिए याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट इससे पहले कोस्ट गार्ड की नीति को अस्पष्ट और मनमाना बता चुका है।
भारतीय तटरक्षक बल ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह शॉर्ट सर्विस अपॉइंटी (एसएसए) अधिकारी प्रियंका त्यागी और इसी तरह की स्थिति वाली अन्य महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने पर विचार करेगा। इसके लिए पहले उनकी विजिलेंस क्लियरेंस रिपोर्ट का इंतजार किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने रिपोर्ट मिलने के बाद दो हफ्ते के भीतर फैसला लेने को कहा है। त्यागी ने 14 साल से अधिक सेवा पूरी करने के बाद स्थायी कमीशन के लिए याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट इससे पहले कोस्ट गार्ड की नीति को अस्पष्ट और मनमाना बता चुका है।