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SC Updates: 'सब्सिडी देने के बजाय व्यवस्था सुदृढ़ बनाना जरूरी', CEC-EC की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

Fri, 08 May 2026 06:57 AM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Fri, 08 May 2026 06:57 AM IST
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Supreme Court Update gov contract jobs teacher recruitment cec election commission Hearing
सुप्रीम कोर्ट अपडेट - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षा को अस्थायी उपायों से सब्सिडी देने के बजाय उसे सुदृढ़ बनाना समय की जरूरत है। शीर्ष अदालत ने झारखंड सरकार को निर्देश दिया कि वह चार सप्ताह के भीतर राज्य भर में सहायक शिक्षकों और सहायक आचार्यों के कुल रिक्त पदों में से 50 फीसदी पद विशेष रूप से संविदा पर नियुक्त शिक्षकों के लिए अधिसूचित करे। शिक्षकों की कमी को शीघ्रता से दूर करने के लिए सर्व शिक्षा अभियान जैसी सरकारी पहलों के तहत संविदा पर शिक्षकों को निश्चित अवधि के अनुबंधों पर नियुक्त किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कार्यपालिका के लिए आवधिक प्रदर्शन ऑडिट करने और सार्वजनिक रोजगार में संविदा की व्यवस्था को समाप्त करने का समय आ गया है।
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जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एसवीएन भट्टी ने कहा, आज की सबसे बड़ी आवश्यकता शिक्षा को मजबूत करना है, विशेषकर प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर, न कि उसे अस्थायी उपायों से आर्थिक सहायता देना। शिक्षा प्रदान करना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि व्यापक और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करना है। पीठ ने कहा, किसी भी सेवा में दक्षता बढ़ाने के लिए रोजगार की सुरक्षा का भाव अत्यंत आवश्यक है, और शिक्षा भी इससे अछूती नहीं है। शिक्षक-छात्र का रिश्ता अस्थायी नहीं होता, बल्कि शैक्षणिक वर्षों तक कायम रहता है। रोजगार की गारंटी के बिना संविदा शिक्षक से बच्चे के भविष्य और शिक्षा की गारंटी की अपेक्षा करना निराधार है।
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सिर्फ सांविधानिक खालीपन को भरने के लिए था सीईसी, ईसी की नियुक्ति पर फैसला: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में सीजेआई को शामिल करने संबंधी उसका 2023 का फैसला सिर्फ तब तक के लिए था, जब तक संसद इस विषय पर कानून नहीं बना देती। अदालत ने स्पष्ट किया कि उस फैसले में संसद को किसी विशेष ढांचे में कानून बनाने का निर्देश नहीं दिया गया था। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इस कानून में चयन समिति से सीजेआई को बाहर कर दिया गया है।

कांग्रेस नेता जया ठाकुर के वकील विजय हंसारिया ने दलील दी कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता न्यायपालिका जितनी ही महत्वपूर्ण है और नियुक्ति प्रक्रिया कार्यपालिका के प्रभाव से मुक्त होनी चाहिए। सुनवाई के दौरान पीठ ने लगातार सरकारों की ओर से लंबे समय तक इस विषय पर कानून नहीं बनाए जाने को निर्वाचितों का अत्याचार करार दिया। एडीआर की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि कानून के अभाव का फायदा हर सरकार ने उठाया, जिससे नियुक्तियों के दुरुपयोग की आशंका बनी रही। भूषण ने कहा कि कई सांसदों के निलंबन के कारण विधेयक पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो सकी। उन्होंने दलील दी कि नया कानून चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को कमजोर करता है, क्योंकि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह कार्यपालिका के प्रभाव में आ गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने अदालत में कहा कि संविधान पीठ के अनूप बरनवाल फैसले का उद्देश्य चुनाव आयोग को कार्यपालिका के हस्तक्षेप से मुक्त रखना था।
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