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जीएसटी चोरी में गिरफ्तार करने की शक्तियों की समीक्षा करेगा सुप्रीम कोर्ट
Thu, 30 May 2019 02:28 AM IST
Avdhesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Thu, 30 May 2019 02:28 AM IST
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जीएसटी
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सुप्रीम कोर्ट ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) चोरी के मामले में किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी को लेकर टैक्स अधिकारियों की शक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करने पर सहमति जता दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि विभिन्न हाईकोर्ट ने मामले पर अलग अलग विचार रखे हैं और इसलिए कानून के तहत गिरफ्तारी के अधिकार के प्रावधान पर फैसले की आवश्यकता है।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अवकाशकालीन पीठ ने बुधवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब देने को कहा है। केंद्र सरकार ने बांबे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की थी, जिसमें कुछ व्यक्तियों को जीएसटी चोरी के मामलों में गिरफ्तारी से राहत दी थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि वह फिलहाल बांबे हाईकोर्ट के आदेश में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा।
हालांकि पीठ ने स्पष्ट किया कि तब तक सभी हाईकोर्ट जीएसटी चोरी के मामलों में अग्रिम जमानत देते समय उसके पहले के आदेश को ध्यान में रखें, जिसमें उसने तेलंगाना हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा है। तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा था कि ऐसे मामलों में किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तारी से संरक्षण नहीं दिया जा सकता है।
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इसके साथ ही पीठ ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए तीन जजों की पीठ को सौंप दिया। इससे पहले 27 मई को शीर्ष अदालत ने तेलंगाना हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया था।
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चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अवकाशकालीन पीठ ने बुधवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब देने को कहा है। केंद्र सरकार ने बांबे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की थी, जिसमें कुछ व्यक्तियों को जीएसटी चोरी के मामलों में गिरफ्तारी से राहत दी थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि वह फिलहाल बांबे हाईकोर्ट के आदेश में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा।
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हालांकि पीठ ने स्पष्ट किया कि तब तक सभी हाईकोर्ट जीएसटी चोरी के मामलों में अग्रिम जमानत देते समय उसके पहले के आदेश को ध्यान में रखें, जिसमें उसने तेलंगाना हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा है। तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा था कि ऐसे मामलों में किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तारी से संरक्षण नहीं दिया जा सकता है।
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इसके साथ ही पीठ ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए तीन जजों की पीठ को सौंप दिया। इससे पहले 27 मई को शीर्ष अदालत ने तेलंगाना हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया था।