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Supreme Court: खनिजों पर रॉयल्टी कर है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला

Thu, 25 Jul 2024 06:29 AM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Thu, 25 Jul 2024 06:29 AM IST
सार

नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ बेहद जटिल प्रश्न पर विचार कर रही थी। इसके मुताबिक क्या केंद्र खनन पट्टों पर रॉयल्टी वसूल सकता है, जिसे टैक्स माना जाएगा। 1989 में सात-न्यायाधीशों की पीठ ने यही फैसला पारित किया था।

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Supreme Court to pronounce verdict on tosay on whether royalty on minerals is tax know updates
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट अत्यंत विवादास्पद मुद्दे, क्या खनिजों पर देय रॉयल्टी खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत कर है या नहीं पर बृहस्पतिवार यानी आज फैसला सुनाएगा। साथ ही यह भी निर्णय करेगा कि क्या केवल केंद्र को ही ऐसी वसूली करने का अधिकार है या राज्यों को भी अपने क्षेत्र में खनिज युक्त भूमि पर कर लगाने का अधिकार है। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने विभिन्न राज्यों, खनन कंपनियों और पीएसयू की 86 याचिकाओं पर आठ दिनों तक सुनवाई के बाद 14 मार्च को फैसला सुरक्षित रखा था। 

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नौ जजों वाली संविधान पीठ कर रही थी सुनवाई
इस मुकदमे में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली नौ-न्यायाधीशों की पीठ सुनवाई कर रही थी। शीर्ष कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली नौ-न्यायाधीशों की पीठ में जस्टिस हृषिकेश रॉय, न्यायमूर्ति अभय एस ओका, जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस जेबी पारदीवाला, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह भी शामिल हैं। 
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सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा था कि संविधान में खनिज अधिकारों पर कर लगाने का अधिकार केवल संसद को ही नहीं, बल्कि राज्यों को भी दिया गया है।साथ ही, इस बात पर जोर दिया कि इस अधिकार को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने दलील दी थी कि खदानों और खनिजों पर कर लगाने के संबंध में केंद्र के पास सर्वोच्च शक्तियां हैं।
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क्या था मामला
बता दें कि  नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ बेहद जटिल प्रश्न पर विचार कर रही थी। इसके मुताबिक क्या केंद्र खनन पट्टों पर रॉयल्टी वसूल सकता है, जिसे टैक्स माना जाएगा। 1989 में सात-न्यायाधीशों की पीठ ने यही फैसला पारित किया था। इस मामले की जड़ें इंडिया सीमेंट लिमिटेड और तमिलनाडु सरकार के बीच विवाद से जुड़ी हैं। इंडिया सीमेंट ने तमिलनाडु में खनन पट्टा हासिल किया और राज्य सरकार को रॉयल्टी का भुगतान कर रही थी। बाद में राज्य सरकार ने इंडिया सीमेंट पर रॉयल्टी के अलावा एक और उपकर लगा दिया। इसके बाद इंडिया सीमेंट ने मद्रास उच्च न्यायालय का रुख किया। जहां उसने दलील दी कि रॉयल्टी पर उपकर का मतलब रॉयल्टी पर टैक्स है जो राज्य विधायिका के दायरे से परे है। बाद में 1989 में इंडिया सीमेंट्स लिमिटेड बनाम तमिलनाडु राज्य सरकार के मुकदमे पर शीर्ष अदालत की सात-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा था कि रॉयल्टी एक टैक्स ही है।

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