फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   West Bengal: Ban on firecrackers lifted, Supreme Court set aside Calcutta High Courts order

सुप्रीम कोर्ट: बंगाल में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के आदेश को किया दरकिनार, कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला खारिज

Mon, 01 Nov 2021 05:10 PM IST
Jeet Kumar राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 01 Nov 2021 05:10 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को आदेश दिया कि वह प्रतिबंधित पटाखों व अन्य संबंधित वस्तुओं की राज्य में आपूर्ति ही नहीं हो सके, ऐसे इंतजाम करे। 

विज्ञापन
West Bengal: Ban on firecrackers lifted, Supreme Court set aside Calcutta High Courts order
पटाखे... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को दरकिनार कर दिया, जिसमें पश्चिम बंगाल में काली पूजा, दिवाली, छठ पूजा, जगाधत्री पूजा, गुरु नानक जयंती, क्रिसमस और नए साल के पूर्व संध्या पर होने वाले जश्न के दौरान पटाखों के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था। जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस अजय रस्तोगी की अवकाश पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही उन पटाखों के उपयोग को विनियमित करने का आदेश पारित कर दिया है जिनमें प्रदूषणकारी सामग्री का उपयोग होता है। पीठ ने कहा कि पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं हो सकता है।

विज्ञापन


पीठ ने टिप्पणी की, 'अलग-अलग तरह के लोग हो सकते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूर्ण प्रतिबंध हो। हमें बेरियम साल्ट जैसे प्रतिबंधित पदार्थ के उपयोग के खिलाफ तंत्र को मजबूत करना होगा। पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं हो सकता।' सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2018, जुलाई और अक्टूबर 2021 के आदेश में हरे पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति देते हुए पटाखों में बेरियम सॉल्ट के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी।
विज्ञापन


कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस आधार पर पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था कि कार्यपालिका के लिए उल्लंघन करने वालों की पहचान करना और उनके खिलाफ कार्रवाई करना व्यावहारिक रूप से असंभव होगा क्योंकि हरित पटाखों को अलग करने के लिए कोई तंत्र नहीं है और कानून को लागू करने वाली एजेंसियों के लिए असंभव कार्य है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत का आदेश सभी राज्यों पर समान रूप से लागू होता है और पश्चिम बंगाल अपवाद नहीं हो सकता। शीर्ष अदालत ने कहा, 'यह कोई नया मुद्दा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही आदेश पारित कर चुका है। इसे समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।' पश्चिम बंगाल राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने पीठ के समक्ष कहा कि राज्य हरित पटाखों के उपयोग के बारे में 2018 में शीर्ष अदालत के आदेश का ईमानदारी से पालन कर रहा है।

उन्होंने बताया कि पुलिस स्थिति की निगरानी कर रही है और वास्तव में वर्ष 2018 में 24 प्राथमिकी दर्ज की गई थी और 46 गिरफ्तारियां हुई थी, 2019 में 22 प्राथमिकी और 26 गिरफ्तारियां, 2020 में 190 प्राथमिकी और 243 गिरफ्तारियां हुई थी और इस वर्ष सात प्राथमिकी और 10 गिरफ्तारियां हो चुकी है। वहीं, पटाखों के निर्माताओं और डीलरों के एक संघ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ भटनागर ने कहा कि वे 2018, 2020 और इस साल 29 अक्टूबर को पारित शीर्ष अदालत के आदेश का पालन कर रहे हैं जिसमें कहा गया था कि पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है।

शीर्ष अदालत ने सभी के बयानों को रिकॉर्ड पर लिया और हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार कर दिया। कलकत्ता हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर, 2021 को राज्य में कोविड महामारी की स्थिति और बिगड़ती वायु गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष पश्चिम बंगाल में सभी प्रकार के पटाखों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- दुरुपयोग रोकने का तंत्र करें मजबूत

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं हो सकता है। राज्य बेरियम जैसे प्रतिबंधित पदार्थ के दुरुपयोग के खिलाफ तंत्र को मजबूत करें। शीर्ष अदालत ने कहा, हरित पटाखों पर हमारा आदेश सभी राज्यों पर समान रूप से लागू होता है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में त्योहारों के दौरान पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने वाले कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार कर दिया।

जस्टिस एएम खानविलकर व जस्टिस अजय रस्तोगी की अवकाश पीठ ने सोमवार को कहा, सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही उन पटाखों के उपयोग को विनियमित करने का आदेश पारित कर दिया है, जिनमें प्रदूषणकारी सामग्री का उपयोग होता है। बंगाल अपवाद नहीं हो सकता। यह कोई नया मुद्दा नहीं है। इस पर अंतिम फैसला कार्यपालिका को लेना है। हाईकोर्ट ने 29 अक्तूबर, 2021 को राज्य में कोविड की स्थिति और प्रदूषण को देखते हुए काली   पूजा से लेकर नए साल के जश्न तक सभी पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

साधारण व हरित पटाखों में अंतर करना संभव नहीं: हाईकोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने अक्तूबर 2021 के आदेश में ग्रीन पटाखों की अनुमति देते हुए पटाखों में बेरियम सॉल्ट पर रोक लगा दी थी। कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस आधार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया कि हरित पटाखों की पहचान के लिए कोई तंत्र नहीं है और कानून को लागू करने वाली एजेंसियों के लिए यह मुश्किल कार्य है।

सुप्रीम कोर्ट-एनजीटी ने लगाई है रोक, वहीं अपील करें

राजधानी में पटाखों की बिक्री पर रोक नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और सुप्रीम कोर्ट ने लगाई है। इस मामले पर सुनवाई के लिए वहां अपील करें, हाईकोर्ट इसके लिए सही मंच नहीं है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को यह बात दिल्ली के पटाखा कारोबारियों की एक याचिका पर कही। कारोबारियों ने राजधानी में ग्रीन पटाखों की बिक्री और भंडारण पर रोक के खिलाफ याचिका दायर की थी। वे अपनी पटाखे राजधानी से बाहर बेचने की अनुमति भी चाहे रहे थे।

हाईकोर्ट के रुख को देख, उन्हाेंने याचिका वापस ले ली। जस्टिस संजीव सचदेवा ने उन्हें कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट जाइए, वहां पहले से इस मामले पर सुनवाई हो रही है। एनजीटी के पास भी जा सकते हैं, वे विशेषज्ञ एजेंसी हैं।’ हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता अच्छी है, तब भी अनुमति दी तो पटाखे अंतत: दिल्ली में ही बेचे जाएंगे। यह सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेश के विपरीत होगा। कारोबारी दिल्ली से बाहर पटाखे बेच सकते हैं, जहां कानूनन अनुमति हो। ब्यूरो

क्या हैं पूर्व आदेश
2 दिसंबर 2020 को एनजीटी ने एनसीआर सहित उन भी शहरों में पटाखे बेचने व जलाने पर पूरी तरह रोक लगाई थी, जहां हवा की गुणवत्ता खराब या बदतर स्तर पर है।
जुलाई 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी के आदेश में दखल देने से इनकार कर कहा था कि पटाखों के मानव स्वास्थ्य बुरे असर को बताने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत नहीं है।

महामारी खत्म नहीं हुई है
हाईकोर्ट ने चेताया, ‘महामारी अभी खत्म नहीं हुई है, सावधान रहने की जरूरत है। एम्स के डॉक्टरों के इंटरव्यू पढ़िए, वे मान रहे हैं कि संक्रमण बढ़ने लगा है। 36 दिन बाद देश में 30 हजार से अधिक मामले कल ही मिले हैं।’

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed