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सुप्रीम कोर्ट: कानून पैनल में अन्य अध्यक्षों की नियुक्ति की मांग वाली याचिका पर 31 अक्तूबर को SC करेगा सुनवाई

Fri, 28 Oct 2022 11:38 PM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Fri, 28 Oct 2022 11:38 PM IST
सार

मंत्रालय की दलील थी कि अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर याचिका निरर्थक है और इसमें दम नहीं होने के कारण इसे सुनवाई के लिए बनाये रखने की आवश्यकता नहीं है। 

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Supreme Court to hear on 31 october plea seeking appointment of chairperson others in law panel
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट 31 अक्तूबर को विधि आयोग को 'वैधानिक निकाय' घोषित करने और इसके अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों की नियुक्ति का केंद्र को निर्देश देने संबंधी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा। कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड की गई वाद सूची के अनुसार, याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायधीश यूयू ललित, न्यायमूर्ति एसआर भट और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ करेगी।
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दिसंबर 2021 में दायर जनहित याचिका के जवाब में विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा कहा गया कि विधि आयोग को वैधानिक निकाय बनाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। मंत्रालय ने अपने हलफनामे में कहा कि 22वें विधि आयोग का गठन 21 फरवरी, 2020 को किया गया था और अध्यक्ष एवं इसके सदस्यों की नियुक्ति संबंधित अधिकारियों के पास विचाराधीन है। हालांकि, विधि आयोग को एक वैधानिक निकाय बनाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। 
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मंत्रालय की दलील थी कि अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर याचिका निरर्थक है और इसमें दम नहीं होने के कारण इसे सुनवाई के लिए बनाये रखने की आवश्यकता नहीं है। जनहित याचिका में गृह मंत्रालय, कानून और विधि एवं न्याय मंत्रालय के साथ-साथ भारत के विधि आयोग को भी पक्षकार बनाया गया है। याचिका में कहा गया है कि वाद हेतु 31 अगस्त, 2018 को उस वक्त सामने आया, जब 21 वें विधि आयोग का कार्यकाल समाप्त हो गया, लेकिन केंद्र ने न तो आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाया है और न ही 22वें विधि आयोग को अधिसूचित किया है।
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उपाध्याय ने अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे के माध्यम से दायर याचिका में कहा है, हालांकि  19 फरवरी, 2020 को केंद्र ने 22वें विधि आयोग के गठन को मंजूरी दी थी, लेकिन उसने आज तक अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति नहीं की। याचिका में शीर्ष अदालत से खुद भी जरूरी कदम उठाने का अनुरोध किया गया है। 

वैकल्पिक रूप से संविधान के संरक्षक और मौलिक अधिकारों के रक्षक होने के नाते, न्यायालय भारत के ट्वेंटी सेकेंड लॉ कमीशन के अध्यक्ष और सदस्यों को नियुक्त करने के लिए अपनी पूर्ण संवैधानिक शक्ति का उपयोग करने की कृपा कर सकता है और घोषणा कर सकता है कि भारत का विधि आयोग एक वैधानिक है।


उपाध्याय ने कानून पैनल को निर्देश देने की मांग की है कि वह राजनेताओं और अपराधियों के बीच कथित गठजोड़ पर वोहरा आयोग की रिपोर्ट पर कार्रवाई की मांग करने वाले उनके अनुरोध पर भी विचार करे। जनहित याचिका में एक प्रतिनिधित्व के रूप में लूटेरों को 100 प्रतिशत काले धन, बेनामी संपत्ति, आजीवन कारावास की जब्ती और तीन महीने के भीतर दो अलग-अलग रिपोर्ट तैयार करने की याचिका पर कानून पैनल से कार्रवाई की मांग की गई।
 
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