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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा निजता विवाद, कोर्ट ने कहा 'जरूरत पड़ने पर होगी मामले की सुनवाई'

Thu, 03 Jan 2019 12:49 PM IST
Shani Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shani Mishra Updated Thu, 03 Jan 2019 12:49 PM IST
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Supreme court to hear issue Ten agencies full power of interception privacy home ministry
सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह किसी भी कंप्यूटर प्रणाली से सूचनाएं निकालने, उनकी निगरानी और कूट भाषा का विश्लेषण करने के लिये 10 केन्द्रीय एजेन्सियों को अधिकृत करने संबंधी सरकारी अधिसूचना को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर आवश्यकता पड़ने पर सुनवाई करेगा।

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प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ के समक्ष अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा ने अपनी जनहित याचिका का उल्लेख करते हये इस पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। याचिकाकर्ता ने कहा कि उसकी जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई की जानी चाहिए।
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पीठ ने कहा कि हम देखेंगे और आवश्यकता पड़ने पर मामले को सूचीबद्ध करेंगे। 

नए आदेश के तहत अधिसूचित 10 एजेंसियों में खुफिया ब्यूरो, स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (आय कर विभाग), राजस्व आसूचना निदेशालय, केन्द्रीय जांच ब्यूरो, राष्ट्रीय जांच एजेन्सी, रॉ, सिग्नल खुफिया निदेशालय (जम्मू कश्मीर, पूर्वोत्तर और असम में सक्रिय) और दिल्ली के पुलिस आयुक्त शामिल हैं।
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बता दें कि गृह मंत्रालय की 20 दिसंबर की अधिसूचना में 10 एजेंसियों का नाम लिया गया था। इस अधिसूचना ने राजनीतिक भूचाल ला दिया था और विपक्ष ने सरकार पर निगरानी राज्य बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अधिसूचना में बताई गई दस एजेंसियों को 2011 से इलेक्ट्रोनिक संचारों को बीच में रोककर जानकारी हासिल की शक्ति पहले से थी।


गृह मंत्रालय ने इस साल 20 दिसंबर को कुछ एजेंसियों का उल्लेख करते हुए 2011 की आदर्श परिचालन प्रक्रियाओं को दोहराया था जिसमें कहा गया कि इस तरह के हर इंटरसेप्ट के लिए संबंधित प्राधिकार (केन्द्रीय गृह सचिव या राज्य गृह सचिव) से पूर्व मंजूरी की जरूरत होगी।

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