{"_id":"5de7780b8ebc3e5482770d51","slug":"supreme-court-to-consider-hearing-on-plea-for-stay-on-electoral-bond-scheme-in-january","type":"story","status":"publish","title_hn":"चुनावी बॉन्ड योजना: रोक की याचिका पर सुनवाई के बारे मे जनवरी मे विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
चुनावी बॉन्ड योजना: रोक की याचिका पर सुनवाई के बारे मे जनवरी मे विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट
Wed, 04 Dec 2019 02:40 PM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Wed, 04 Dec 2019 02:40 PM IST
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि चुनावी बॉन्ड योजना पर रोक लगाने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बारे में जनवरी में विचार किया जायेगा। यह योजना राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव लड़ने के लिए चंदा एकत्रित करने हेतु लाई गई थी।
विज्ञापन
प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबड़े, न्यायमूर्ति बी आर गवई और सूर्य कांत की तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष एक गैर सरकारी संगठन की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने इस मामले का उल्लेख किया और कहा कि इस योजना के तहत करीब 6,000 करोड़ रुपये एकत्रित किए गए, जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक और निर्वाचन आयोग जैसी संस्थाओं ने असहमति व्यक्त की है। यह जनहित याचिका गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने दायर की है।
विज्ञापन
भूषण ने कहा कि इस योजना पर रोक लगाने की जरूरत है क्योंकि यह घूस लेने, धनशोधन और काले धन के समान बन गई है। हमने इस योजना पर रोक लगाने के लिए अर्जी दायर की है। इस योजना का सत्तारूढ़ पार्टी दुरुपयोग कर रही है। इस योजना पर रिजर्व बैंक और चुनाव आयोग पहले ही इस पर अपने राय दे चुके हैं।
विज्ञापन
उनके इस दलील पर पीठ ने कहा कि हम जनवरी में इस पर विचार करेंगे।
इस संगठन ने अपनी याचिका में कहा है कि वित्त कानून, 2017 और वित्त कानून, 2016 में कतिपय संशोधन किये गये थे। इन दोनों कानूनों को धन विधेयक के रूप में पारित कराया गया था। इन संशोधनों ने असीमित राजनीतिक चंदा, विदेशी कंपनियों से भी, प्राप्त करने का रास्ता खोल दिया है।
याचिका में कहा गया है कि इस तरह के संशोधन बड़े पैमाने पर चुनावी भ्रष्टाचार को वैध बनाते हैं। वित्त कानून, 2017 में चुनावी बांड का प्रावधान किया, गया जिसके बारे में जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 के तहत खुलासा करने से छूट प्रदान की गयी और इस तरह से राजनीतिक दलों को अनियंत्रित और अज्ञात स्रोत से धन प्राप्त करने के दरवाजे खुल गये।
बता दें कि सरकार ने दो जनवरी 2018 को चुनावी बॉन्ड योजना को अधिसूचित किया था। इसके प्रावधानों के अनुसार, चुनावी बॉन्ड कोई भी व्यक्ति खरीद सकता है जो भारत का नागरिक है या जिसका भारत में कारोबार है।