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प्रशांत भूषण के खिलाफ 2009 के अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तैयार किए तीन सवाल
Mon, 17 Aug 2020 10:49 PM IST
गौरव पाण्डेय
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Mon, 17 Aug 2020 10:49 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ता और कार्यकर्ता प्रशांत भूषण के खिलाफ साल 2009 के अवमानना मामले में सोमवार को विचार के लिए तीन सवाल तैयार किए। इनमें एक सवाल यह भी है कि न्यायाधीशों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों से संबंधित अवमानना मामले में क्या प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट
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विस्तार
शीर्ष अदालत ने प्रशांत भूषण और पत्रकार तरुण तेजपाल के खिलाफ 11 साल पुराने अवमानना के इस मामले में तैयार तीन प्रश्नों पर वरिष्ठ अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने की दिशा में कदम उठाए। न्यायालय अब इस मामले में 24 अगस्त को सुनवाई करेगा।
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न्यायालय ने प्रशांत भूषण द्वारा समाचार पत्रिका तहलका में अपने साक्षात्कार में शीर्ष अदालत के कुछ पीठासीन और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों पर कथित रूप से आक्षेप लगाए थे। तेजपाल इस पत्रिका के संपादक थे।
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न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, बीआर गवई और कृष्ण मुरारी की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि उसके समक्ष पेश मामले के दूरगामी नतीजे हैं। पीठ अधिवक्ताओं को सुनना चाहती है कि क्या न्यायाधीशों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए बयान दिये जा सकते हैं और ऐसे मामले में क्या प्रकिया अपनाई जानी चाहिए।
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भूषण ने रविवार को न्यायालय से कहा था कि न्यायाधीशों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाना न्यायालय की अवमानना नहीं होगी और सिर्फ भ्रष्टाचार के आरोप बोलना ही न्यायालय की अवमानना नहीं होगी।
अदालत ने भूषण की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन, शांति भूषण और कपिल सिब्बल से कहा कि वे इन तीन बिंदुओं पर न्यायालय को संबोधित करें- क्या इस तरह के बयान दिए जा सकते हैं, किन परिस्थितियों में ये दिए जा सकते हैं और पीठासीन व सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के मामलों में क्या प्रकिया अपनाई जानी चाहिए।
मामले की शुरूआत में धवन ने कहा कि न्यायालय को चुनिंदा सवालों पर विचार करना चाहिए और सारे मामले पर वृहद पीठ को सुनवाई करनी चाहिए। पीठ ने कहा कि न्यायालय मामले को खत्म करना भी चाहता हो तो भी कुछ ऐसे सवाल हैं जिन पर विचार करने की आवश्कता है।
धवन ने न्यायालय के उस हालिया फैसले का भी जिक्र किया जिसमें प्रशांत भूषण को न्यायपालिका के प्रति उनके दो अपमानजनक ट्वीट के कारण अवमानना का दोषी ठहराया गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में 14 अगस्त के फैसले पर पुनर्विचार के लिए भूषण याचिका दायर करने की सोच रहे हैं।
धवन ने न्यायालय से कहा कि ऐसा लगता है कि 14 अगस्त के फैसले में कई विसंगतियां हैं क्योंकि कुछ जगहों पर इसमें कहा गया है कि न्यायाधीशों के खिलाफ आरोप अवमानना नहीं बनता है। तेजपाल की ओर से सिब्बल ने कहा कि फिर तो इस मामले को खत्म कर दिया जाना चाहिए।