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मणिपुर हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: बोला- रोज हो सुनवाई, विशेष अदालतें गठित करें सरकार

Sat, 25 Jul 2026 04:19 AM IST
प्रशांत तिवारी अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sat, 25 Jul 2026 04:19 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा के मामलों में तेजी से न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष अदालतें गठित कर रोजाना सुनवाई कराने का सुझाव दिया है। अदालत ने जांच एजेंसियों को लंबित मामलों की जांच जल्द पूरी करने, पीड़ितों को आरोपपत्र की प्रतियां उपलब्ध कराने और सभी मामलों की अद्यतन स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इस बीच राज्य में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच तनाव अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

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Supreme Court stern on Manipur violence Says hearings should be held daily government must set special courts
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने 2023 में भड़की हिंसा से जुड़े आपराधिक मामलों की प्रतिदिन सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित करने का सुझाव दिया है, ताकि पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके। साथ ही जांच एजेंसियों को जांच जल्द से जल्द पूरी करने का निर्देश भी दिया है।

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सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों को क्या निर्देश दिए?
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि कई पीड़ित परिवारों को अब तक केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और राज्य की विशेष जांच टीम (एसआईटी) की ओर से दाखिल आरोपपत्रों की प्रतियां नहीं मिली हैं। पीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश दिया कि कानूनी सहायता वकील के संपर्क करने के एक सप्ताह के भीतर पीड़ितों और उनके वकीलों को आरोपपत्र हर हाल में उपलब्ध कराए जाएं। पीठ ने राज्य सरकार, सीबीआई और एसआईटी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से उन मामलों का ब्योरा एकत्र करने को कहा, जिनमें जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। साथ ही उन मामलों का भी पूरा विवरण मांगा, जिनकी जांच अभी लंबित है।
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मणिपुर हिंसा में अब तक क्या-क्या हुआ है?
राज्य में बहुसंख्यक मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के विरोध में 3 मई, 2023 को कुकी-जो समुदाय द्वारा निकाले गए मार्च के बाद व्यापक हिंसा भड़क गई थी। कई महीनों तक चले हिंसक दौर में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई, सैकड़ों लोग घायल हुए और हजारों लोग बेघर हो गए। सीबीआई अब तक 21 मामलों में आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है, जबकि 11 मामलों की जांच अभी जारी है। वहीं राज्य की विशेष जांच टीम (एसआईटी) आठ जिलों में दर्ज 3,020 मामलों की जांच कर रही है। इनमें से 301 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं, जबकि 10 मामलों में सुनवाई शुरू हो चुकी है।
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लापता लोगों के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने लापता हुए 30 लोगों के मामलों पर मणिपुर हाईकोर्ट को विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया है। साथ ही सीबीआई, एसआईटी और अदालत की ओर से नियुक्त निगरानी समिति को मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों पर नई स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है।


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क्या मणिपुर में अब भी तनाव बना हुआ है?
मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच अब भी तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हाल ही में इंफाल पश्चिम जिले में एक बार फिर हिंसा भड़क गई थी। उपद्रवियों ने कांतो सबाल गांव में मैतेई समुदाय के कई खाली घरों में आग लगा दी, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। तनाव बढ़ने पर करीब 600 लोगों की भीड़ ने प्रदर्शन किया, लेकिन सुरक्षा बलों ने समय रहते स्थिति को नियंत्रित कर लिया। आगजनी और हिंसा की घटनाओं के सिलसिले में पुलिस अब तक दो लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

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