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Supreme Court: समय रैना समेत पांच इंफ्लुएंसर की पेशी, दिव्यांग का मजाक उड़ाने के मामले में देना होगा जवाब

Tue, 15 Jul 2025 03:43 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 15 Jul 2025 03:43 PM IST
सार

दुर्लभ बीमारी एसएमए और दिव्यांगों का मजाक उड़ाने के आरोप में समय रैना, विपुल गोयल समेत पांच सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। मामले में कोर्ट ने सख्त रुफ अपनाते हुए दो हफ्तों में जवाब मांगा और अगली सुनवाई में भी व्यक्तिगत पेशी के निर्देश दिए हैं।

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Supreme Court Social media influencers Samay Raina IGL Show reply on ridiculing disabled persons hindi updates
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

दिव्यांग और दुर्लभ बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (एसएमए) से पीड़ित लोगों का मजाक उड़ाने के मामले में समय रैना समेत पांच सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही पीठ ने अगली सुनवाई में भी उनको अदालत में पेश होने को कहा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शारीरिक कारण से सोनाली ठक्कर को पेशी से छूट दे दी और उन्हें वर्चुअली सुनवाई में पेश होने का निर्देश दिया। 

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बता दें कि इस मामले में समय रैना, विपुल गोयल, बलराज सिंह घई, सोनाली ठक्कर उर्फ सोनाली आदित्य देसाई, निशांत तंवर की कोर्ट में पेशी हुई है। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने शो में दुर्लभ बीमारी से पीड़ित लोगों का मजाक उड़ाया, जिससे समाज में गलत संदेश गया।

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दो हफ्ते के भीतर जवाब देने का निर्देश
सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को दो हफ्तों के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा और जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते से ज्यादा का समय नहीं दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की तरफ से अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमानी को सुनवाई में शामिल होने को कहा है। साथ ही सोशल मीडिया दिशा-निर्देश तैयार करने में भी मदद देने को कहा है।
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मामले में कोर्ट का सख्त रुख
मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि किसी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) दूसरों के जीवन और गरिमा के अधिकार (अनुच्छेद 21) से ऊपर नहीं हो सकती। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि अगर अनुच्छेद 19 और 21 के बीच दौड़ लगे, तो 21 को हमेशा प्राथमिकता मिलेगी। किसी को भी दूसरे की गरिमा का अपमान करने की छूट नहीं दी जा सकती। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह सोशल मीडिया पर कंटेंट से जुड़े स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिकों की गरिमा दोनों का संतुलन बना रहे।

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अब समझिए क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि मामले में इन पांचो इन्फ्लुएंसर्स पर आरोप है कि उन्होंने अपने यूट्यूब शो और अन्य माध्यमों पर दिव्यांग और दृष्टिहीन लोगों का मजाक उड़ाया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगर अगली सुनवाई में ये दोबारा हाजिर नहीं हुए, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा। मामले में एक इन्फ्लुएंसर सोनाली ठक्कर उर्फ सोनाली आदित्य देसाई को उनके स्वास्थ्य कारणों के चलते वर्चुअली पेश होने की अनुमति दी गई है।


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