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SC: सौर ऊर्जा परियोजना का विरोध करने पर एनजीओ को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, कहा- ऐसे कैसे देश प्रगति करेगा

Tue, 01 Apr 2025 08:22 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Tue, 01 Apr 2025 08:22 PM IST
सार

महाराष्ट्र के जायकवाड़ी बांध पर बन रही सौर ऊर्जा परियोजना का एक एनजीओ ने विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि यह क्षेत्र पर्यावरण के प्रति संवेदनशील है और इस परियोजना से जैव विविधता प्रभावित होगी। इस सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई। 

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Supreme Court slams NGO for opposing energy project, said- how will the country progress like this?
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महाराष्ट्र के जायकवाड़ी बांध पर बन रही सौर ऊर्जा परियोजना का विरोध करने वाले एनजीओ को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे हर परियोजना का विरोध किया जाएगा तो देश कैसे प्रगति करेगा? जयकवाड़ी बांध को पक्षी अभयारण्य और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया है। जस्टिस सूर्यकांत और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने एनजीओ कहार समाज पंच समिति की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि आपको किसने लगाया और किसने आपको फंड दिया? पर्यावरण संरक्षण में आपका पिछला अनुभव क्या है?
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पीठ ने एनजीओ की याचिका को खारिज कर दिया। एनजीओ ने अपनी याचिका में नौ सितंबर 2024 के एनजीटी के फैसले को चुनौती दी गई थी। पीठ ने कहा कि एनजीटी ने सही सामग्री की सराहना की थी। पीठ ने एनजीओ से कहा कि आप एक भी परियोजना को काम करने नहीं दे रहे हैं। अगर हर परियोजना का विरोध किया जाएगा तो देश कैसे प्रगति करेगा? सौर ऊर्जा परियोजना के साथ भी आपको समस्या है।
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एनजीओ के वकील ने कहा कि यह क्षेत्र पर्यावरण के प्रति संवेदनशील है और इस परियोजना से जैव विविधता प्रभावित होगी। पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि टेंडर हारने वाली कंपनी ने एनजीओ को फंड दिया है और अब वह बेकार मुकदमेबाजी  कराकर परियोजना को रोकने की कोशिश कर रही है।
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पिछले साल 9 सितंबर को एनजीओ की याचिका को खारिज करते हुए एनजीटी की पश्चिमी क्षेत्र की पीठ ने कहा था कि वह पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की गतिविधि को प्रतिबंधित करने वाला कोई कानून नहीं दिखा सका। महाराष्ट्र सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने जयकवाड़ी बांध पर तैरती सौर परियोजना स्थापित करने के विचार की शुरुआत करते हुए एक निविदा जारी की थी। इसका काम टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड को मिला।  एनजीओ ने बांध पर प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर पावर प्रोजेक्ट को रद्द करने के लिए टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड को निर्देश जारी करने की मांग की।


एनजीओ की ओर से कहा गया कि तैरती सौर परियोजना बांध के पानी में जलीय जीवन के लिए हानिकारक होगी और क्षेत्र में जैविक विविधता को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है। यह घोषित पक्षी अभयारण्य के लिए कई समस्याएं पैदा कर सकता है। नाथ सागर जलाशय जयकवाड़ी बांध द्वारा निर्मित है, जो  55 किलोमीटर लंबा और 27 किलोमीटर चौड़ा है और 350 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।

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एनजीओ ने कहा था कि जलाशय के कारण कुल डूब क्षेत्र लगभग 36,000 हेक्टेयर (89,000 एकड़) था और जयकवाड़ी बांध के डूब क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था, इसलिए बांध पर तैरती सौर परियोजना की स्थापना को पर्यावरणीय मानदंडों और जैव विविधता के संरक्षण की अवधारणा पर विचार करने की अनुमति नहीं दी जा सकती थी।

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