फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court seeks response from Center on IAS-IPS cadre allocation policy

सुप्रीम कोर्ट ने आईएएस-आईपीएस कैडर आवंटन नीति पर केंद्र से मांगा जवाब

Tue, 18 Jun 2019 01:14 AM IST
Avdhesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Tue, 18 Jun 2019 01:14 AM IST
विज्ञापन
Supreme Court seeks response from Center on IAS-IPS cadre allocation policy
Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दो दर्जन से अधिक 2018 बैच के प्रशिक्षु आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की याचिकाओं पर केंद्र सरकार से कैडर आवंटन नीति-2017 पर जवाब तलब किया है। इन लोगों ने याचिकाओं में अपने 20 सहयोगियों की भांति सरकार की कैडर आवंटन स्कीम में समानता की मांग की है। 
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने 17 मई को अपने एक फैसले में 2018 बैच के 20 प्रशिक्षु आईएएस और आईपीएम अधिकारियों को राहत देते हुए उनकी प्राथमिकता के अनुसार कैडर देने का आदेश दिया था। साथ ही इन लोगों को समायोजित करने के लिए राज्य कैडर में एक-एक सीट की बढ़ोतरी को कहा था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया था कि यह आदेश एक अपवाद है और इसे नजीर नहीं समझा जाना चाहिए। इस आदेश के बाद अब 2018 बैच के प्रशिक्षु आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने दो समूह में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 
विज्ञापन


20 प्रशिक्षु अधिकारियों के एक समूह ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें उसने 2018 बैच के आईएएस, आईपीएस अधिकारियों के कैडर आवंटन को रद्द कर दिया था और पूरी प्रक्रिया को फिर से पूरी करने के लिए कहा था। पांच अधिकारियों के दूसरे समूह ने नई रिट याचिका दाखिल कर अपने 20 सहयोगियों की तरह कैडर आवंटन की मांग की है। कई अन्य प्रशिक्षु आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने इन दो याचिकाओं के साथ खुद संबद्ध कर राहत मांगी है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस सूर्य कांत की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि वे प्रथम दृष्टया हाईकोर्ट की राय से सहमत नहीं है। यह हमारा प्रारंभिक दृष्टिकोण है और सरकार को भी इस तरह इसे मानना नहीं चाहिए। पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी को इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से हलफनामा दाखिल करने को कहा। इस मामले की सुनवाई दो हफ्ते बाद नियमित पीठ के सामने होगी।


 दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं के वकील संजय हेगड़े और शशांक रत्नू ने कहा कि सरकार केवल चुनिंदा प्रशिक्षु अधिकारियों को ही राहत नहीं पहुंचा सकती है। वहीं अपने सहयोगी की तरह समानता की मांग करने वाले समूह की वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि इन प्रशिक्षु अधिकारियों के समान अधिकार है और इन्हें भी अपनी प्राथमिकता के अनुसार कैडर चुनने की अनुमति दी जानी चाहिए। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed