फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   supreme court seek reply from centre over poissibility mutual agreements on child custody with america

Supreme Court: चाइल्ड कस्टडी के मुद्दे पर क्या अमेरिका से जल्द समझौता हो सकता है? कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

Wed, 01 Feb 2023 11:03 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Wed, 01 Feb 2023 11:03 PM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि 'हमें लगता है कि हेग कन्वेंशन में भारत शामिल नहीं है लेकिन क्या अमेरिका के साथ इस मामले में कोई समझौता होने की संभावना है क्योंकि इस तरह के मामले काफी बढ़ रहे हैं।' 

विज्ञापन
supreme court seek reply from centre over poissibility mutual agreements on child custody with america
Supreme Court - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि अमेरिका में रहने वाले भारतीय दंपतियों के बीच चाइल्ड कस्टडी को लेकर विवाद के कई मामले सामने आए हैं, ऐसे में क्या चाइल्ड कस्टडी को लेकर भारत का अमेरिका के साथ कोई समझौता हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सरकार से जवाब मांगा है। एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से यह जवाब मांगा है। दरअसल महिला ने याचिका में अपने पति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवमानना करने का आरोप लगाया है। 

विज्ञापन


सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एएस ओका की बेंच ने कहा कि इस बात पर शंका करने की कोई वजह नहीं है कि प्रतिवादी ने जानबूझकर अदालत के आदेश की अवहेलना की है। कोर्ट ने इसे काफी गंभीर माना है। कोर्ट ने कहा कि 'हमें लगता है कि हेग कन्वेंशन में भारत शामिल नहीं है लेकिन क्या अमेरिका के साथ इस मामले में कोई समझौता होने की संभावना है क्योंकि इस तरह के मामले काफी बढ़ रहे हैं।' कोर्ट अब इस मामले पर 6 फरवरी को सुनवाई करेगा। सीबीआई ने आरोपी व्यक्ति को 31 जनवरी तक पेश होने का नोटिस जारी किया है। बता दें कि अभी तक आरोपी व्यक्ति वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कोर्ट की सुनवाई में शामिल हो रहा था। 
विज्ञापन


क्या है मामला
बता दें कि अजमेर में रहने वाली महिला की अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्ति से शादी हुई थी। साल 2013 में पति ने महिला और नवजात बच्चे को अपनी मां और बहन के पास कनाडा भेज दिया। महिला का आरोप है कि युवक की मां और बहन ने उसे प्रताड़ित कर घर से निकाल दिया। जिसके बाद महिला अपने बच्चे के साथ भारत लौट आई। व्यक्ति ने कनाडा की कोर्ट में याचिका दाखिल कर एकतरफा तरीके से बच्चे की कस्टडी ले ली। 
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके खिलाफ महिला ने राजस्थान हाईकोर्ट में बच्चे की कस्टडी के लिए याचिका दाखिल की। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया। सुप्रीम कोर्ट में दोनों के बीच समझौता हो गया। इस समझौते के तहत बच्चा, जो कि अभी कक्षा छह का छात्र है, वह दसवीं कक्षा में आने तक अपनी मां के पास अजमेर में रहेगा। इस बीच वह हर साल जून महीने में अपने पिता के साथ अमेरिका और कनाडा जा सकता है। महिला का आरोप है कि बीते साल उसका बेटा अपने पिता के साथ कनाडा गया लेकिन अभी तक वापस नहीं आया है। जिसके चलते ही महिला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।  

केंद्र ने राष्ट्रीय हाथी संरक्षण प्राधिकरण क्यों नहीं बनाया : सुप्रीम कोर्ट
 सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से हाथी गलियारों के संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए प्रस्तावित निकाय राष्ट्रीय हाथी संरक्षण प्राधिकरण (एनईसीए) को वैधानिक दर्जा देने पर 2010 की ‘गज रिपोर्ट’ में की गई सिफारिश पर जवाब देने को कहा है। वहीं, सरकार ने दावा किया कि वह हाथियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और बिजली के झटके सहित उनकी मौत को रोकने के लिए कई कदम उठाती रही है।

देश में हाथियों की संख्या 29,964 (2017 की गणना के अनुसार) तक पहुंच गई है। हाथियों के आवासों को पूरे भारत में समेकित किया जा रहा है। हाथी आरक्षित क्षेत्र को बढ़ा दिया गया है। कार्यकर्ता प्रेरणा सिंह बिंद्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ‘गज’ रिपोर्ट में यह सिफारिश की गई थी कि ‘प्रोजेक्ट एलिफेंट’ को एक वैधानिक एजेंसी में परिवर्तित किया जाए। पीठ ने सुझाव दिया कि संशोधन किया जा सकता है ताकि प्राधिकरण को वैधानिक दर्जा प्रदान किया जा सके। पीठ ने कहा कि टास्क फोर्स ने प्रस्तावित किया है कि नए निकाय को ‘राष्ट्रीय हाथी संरक्षण प्राधिकरण’ कहा जा सकता है।

पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को कार्यकर्ता प्रेरणा सिंह बिंद्रा की दायर जनहित याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। पीठ ने हाथियों के संरक्षण के संबंध में प्रासंगिक निर्देशों और दिशानिर्देशों की निगरानी और कार्यान्वयन के उद्देश्य से केंद्रीय परियोजना हाथी निगरानी समिति की स्थापना पर स्थिति रिपोर्ट भी मांगी है। शीर्ष अदालत ने मंत्रालय और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि हाथियों के बिजली के झटके से बचने के लिए संरक्षित क्षेत्रों के निरीक्षण की सुविधा के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed