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न्यायिक प्रक्रिया से अलग हुई पत्नी को भी गुजारा भत्ते का हक: सुप्रीम कोर्ट 

Fri, 08 Dec 2017 02:59 AM IST
एजेंसी / नई दिल्ली
एजेंसी / नई दिल्ली Updated Fri, 08 Dec 2017 02:59 AM IST
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Supreme Court Says Wife's right to alimony with judicial process
supreme court
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि न्यायिक प्रक्रिया से अलग हुई पत्नी को भी तलाकशुदा पत्नी की तरह गुजारा भत्ते का हक है और इससे उसे वंचित रखने का कोई कारण नहीं हो सकता। शीर्ष अदालत ने 2014 में पटना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली एक महिला की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह कहा है। हाईकोर्ट ने महिला के पति की ओर से दायर याचिका पर यह फैसला दिया था। इसमें उन्होंने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें उसे महिला को गुजारे भत्ता के लिए हर महीने 4,000 रुपये देने का आदेश दिया गया था। 
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लेकिन शीर्ष अदालत में जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए मामले को नए सिरे से विचार के लिए वापस कर दिया। शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान पति के वकील ने दलील दी कि महिला गुजारा भत्ते की हकदार नहीं है और न्यायिक प्रक्रिया से अलग हुए मामले पर पहले भी ऐसा ही फैसला आया है।
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पीठ ने कहा हमें कोई ठोस तथ्य नजर नहीं आता इसलिए हम इसे खारिज करते हैं

Supreme Court Says Wife's right to alimony with judicial process
प्रतीकात्मक तस्वीर
पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘चूंकि इस दलील में हमें कोई ठोस तथ्य नजर नहीं आता इसलिए हम इसे खारिज करते हैं। यदि कोई तलाकशुदा पत्नी गुजारा भत्ते की हकदार है तो यह कोई वजह नहीं हो सकती कि वह न्यायिक प्रक्रिया से अलग हुई है और उसे गुजारा भत्ता न दिया जाए।

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि वह हाईकोर्ट के इस नजरिये से सहमत नहीं है कि चूंकि निचली अदालत ने महिला को खुद की देखभाल करने में सक्षम नहीं हो पाने की वजह नहीं बताई इसलिए उसे गुजारा भत्ता नहीं दिया जा सकता। हाईकोर्ट को इस सवाल पर गौर करना चाहिए कि याचिकाकर्ता (महिला) गुजारा भत्ता पाने की हकदार है या नहीं और यदि है तो इसकी राशि तय करनी चाहिए।’ महिला के वकील ने शीर्ष अदालत को बताया कि उसे पिछले नौ वर्षों से गुजारे के लिए एक भी पैसा नहीं मिला है। 
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