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घोर कलियुग में हम वायरस से नहीं लड़ सकते, हमें अपने स्तर पर लड़ना होगा : सुप्रीम कोर्ट

Thu, 19 Mar 2020 12:52 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 19 Mar 2020 12:52 AM IST
सार

भारत समेत दुनियाभर में जानलेवा कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते संक्रमण से चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने भी बुधवार को एहतियात बरतने की नसीहत दी।

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Supreme Court says We have to tackle corona virus on our own
सुप्रीम कोर्ट

विस्तार

भारत समेत दुनियाभर में जानलेवा कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते संक्रमण से चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने भी बुधवार को एहतियात बरतने की नसीहत देते हुए कहा, ऐसी महामारी हर सौ साल में एक बार होती है। घोर कलियुग में हम वायरस से लड़ नहीं सकते। इंसान की कमजोरी देखिए, आप हर तरह हथियार ईजाद कर सकते हैं लेकिन आप ऐसे वायरस से लड़ नहीं सकते। इससे हमें अपने स्तर पर ही लड़ना होगा। सिर्फ सरकारी स्तर पर जारी लड़ाई पर्याप्त नहीं है। 

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वोडाफोन-आइडिया के दूरसंचार विभाग को बकाया भुगतान वाले मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा ने यह टिप्पणी की। दरअसल, सुनवाई के दौरान वोडाफोन-आइडिया की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील आर्यमान सुंदरम कई वकीलों के साथ आए तब पीठ में शामिल दूसरे जज जस्टिस एमआर शाह ने कहा, आप पांच-छह वकीलों के साथ आते हैं। हम आपसे और बार एसोसिएशन से भी आग्रह करते हैं कि एक वरिष्ठ वकील अपने साथ महज एक वकील ही लेकर कोर्ट रूम में आए। आखिर यह हमारे भले के लिए ही है। ये सभी की सुरक्षा के लिए अहम है।

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आज से चार पीठ ही बैठेंगी

कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए बृहस्पतिवार से सुप्रीम कोर्ट में आधा स्टाफ ही ड्यूटी पर आएगा। सुप्रीम कोर्ट में बृहस्पतिवार से केवल चार पीठ ही बैठेंगी। केवल जरूरी मामलों की ही सुनवाई होगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने छह पीठ बैठाने का निर्णय लिया था। इससे पहले भी शीर्ष अदालत ने 31 मार्च तक केवल जरूरी मामलों की सुनवाई की बात कही थी।

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स्कूल बंद हैं तो बच्चों को कैसे मिल रहा मिड डे मील, राज्यों को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र व सभी राज्यों को एकसमान नीति को लेकर यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि कोरोना वायरस के प्रकोप को रोकने के क्रम में स्कूलों के बाद होने से बच्चों व आंगनवाड़ी के जरिए महिलाओं को मिलने वाले पौष्टिक आहार से वंचित न रहना पड़े। कोर्ट ने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए एक समस्या को निपटने में दूसरी समस्या पैदा हो जाए। 


चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर पूछा कि स्कूल बंद किए जाने पर बच्चों को मिड-डे मील कैसे उपलब्ध कराया जा रहा है? पौष्टिक आहार न मिलने से वे कुपोषण का शिकार होंगे, जिससे उनके संक्रमण का खतरा बढ़ जाएगा। 


पीठ ने वरिष्ठ वकील संजय हेगडे़ को इस मामले में न्याय मित्र नियुक्त किया है। पीठ ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव के अलावा सभी राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी करते हुए एक हफ्ते में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।

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