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सुप्रीम कोर्ट : उगाही की रकम का भुगतान करना आतंकी फंडिंग नहीं
Sat, 10 Apr 2021 03:01 AM IST
Jeet Kumar
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली।
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 10 Apr 2021 03:01 AM IST
सार
- कहा, प्रोटेक्शन मनी देने का मतलब यह नहीं कि प्रतिबंधित संगठन को बढ़ावा दिया गया
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सर्वोच्च न्यायालय
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा है कि उगाही की रकम का भुगतान करना आतंकी फंडिंग नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि प्रोटेक्शन मनी देने को यह नहीं कहा जा सकता कि उसने प्रतिबंधित संगठन को बढ़ावा देने के लिए फंड दिया।
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सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए अपीलकर्ता सुरेश केडिया को जमानत दे दी है जिस पर आरोप है कि उसने झारखंड में अपने कोयला परिवहन कारोबार को सही तरीके से चलाने के लिए आतंकी संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) के सदस्यों को रकम दी थी।
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जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एस रवींद्र भट्ट की पीठ ने केडिया को जमानत देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता पर मुख्य आरोप यह है कि उसने उगाही की रकम आतंकी संगठन को दी। पीठ ने कहा कि उगाही की रकम का भुगतान करने को टेरर फंडिंग नहीं कहा जा सकता।
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सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि पूरक चार्जशीट से भी यह साफ है कि इस मामले में आतंकी संगठन के सदस्य और आरोपी आम्रपाली और मगध इलाके के बिजनेसमैन से उगाही करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी करते हुए झारखंड हाईकोर्ट के उस फैसले को दरकिनार कर दिया है जिसमें विशेष अदालत द्वारा केडिया को देने से इनकार किए जाने के फैसले को सही ठहराया गया था। केडिया को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) सहित अन्य कानूनों के तहत आरोपित किया गया है।
आतंकियों से मुलाकात साजिश का मामला नहीं
केडिया पर आतंकी संगठन के सदस्यों से मिलने के आरोप पर सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि सीआरपीसी की धारा-164 के तहत दिए बयान में केडिया ने कहा था कि उसने जिस प्रोटेक्शन मनी का भुगतान किया था, उस संबंध में संगठन के सदस्यों ने उसे तलब किया था।
पीठ ने कहा कि पहली नजर में ही हम इस बात से संतुष्ट नहीं हैं कि संगठन के सदस्यों से मिलने के आधार पर उस पर षड्यंत्र का मामला बनता है।