फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   supreme court says Panchayat election candidates obligated to disclose info on pending cases

Supreme Court: पंचायत चुनाव उम्मीदवारों को भी लंबित मामलों की जानकारी देना जरूरी, सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

Sat, 26 Apr 2025 02:49 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Sat, 26 Apr 2025 02:49 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने भी उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा, लेकिन ये भी कहा कि जिस मामले को छिपाने का आरोप है, उसमें बसंत लाल को बरी किया जा चुका है। ऐसे में छह साल का प्रतिबंध सख्त है। 

विज्ञापन
supreme court says Panchayat election candidates obligated to disclose info on pending cases
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के एक आदेश को बरकरार रखते हुए कहा है कि पंचायत चुनाव के उम्मीदवारों को भी अपने नामांकन पत्र में अपने खिलाफ लंबित मामलों की जानकारी देना जरूरी है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखते हुए एक ग्राम प्रधान के निर्वाचन को रद्द कर दिया। मामला मंडी जिले के पंगना ग्राम पंचायत का है। 
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने क्या टिप्पणी की
सुप्रीम कोर्ट पीठ ने अपने फैसले में कहा कि 'उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को हम योग्य नहीं पाते हैं, क्योंकि राज्य चुनाव आयोग द्वारा बनाए गए नियमों को उच्च न्यायालय ने अधीनस्थ कानून का हिस्सा माना है। कानून के तहत पंचायत चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को भी इसके प्रावधानों का पालन करना जरूरी है।' इससे पहले 16 अक्तूबर 2024 को उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि 'तथ्यों को छिपाना हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 के प्रावधानों का उल्लंघन है। यह चुनाव को अमान्य घोषित करने का वैध आधार हो सकता है।' 
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- Kailash Manasarovar Yatra: जून से अगस्त तक चलेगी कैलाश मानसरोवर यात्रा, विदेश मंत्रालय ने दिया बड़ा अपडेट
विज्ञापन
विज्ञापन


छह साल चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध को सुप्रीम कोर्ट ने कठोर बताया
उच्च न्यायालय ने प्रधान बसंत लाल के निर्वाचन को रद्द करने का आदेश दिया था। इतना ही नहीं उच्च न्यायालय ने लंबित मामले को छिपाने के आरोप में बसंत लाल को छह साल तक चुनाव लड़ने से भी प्रतिबंधित कर दिया। इस आदेश के खिलाफ बसंत लाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा, लेकिन ये भी कहा कि जिस मामले को छिपाने का आरोप है, उसमें बसंत लाल को बरी किया जा चुका है। ऐसे में छह साल का प्रतिबंध सख्त है। 

ये भी पढ़ें- Porsche Crash: आरोपी किशोर की मां जेल से बाहर आई, सुप्रीम कोर्ट ने चार दिन पहले दी थी अंतरिम जमानत

उल्लेखनीय है कि बसंत लाल 17 जनवरी 2021 को प्रधान निर्वाचित हुए थे, लेकिन तीसरे नंबर पर रहे जितेंद्र महाजन ने बसंत लाल के निर्वाचन के खिलाफ सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट के सामने याचिका दायर कर नामांकन पत्र में लंबित मामलों की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया। आरोप साबित होने पर सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट ने निर्वाचन रद्द कर दिया। इसके खिलाफ बसंत लाल ने उच्च न्यायालय में अपील की, लेकिन वहां से भी निराशा हाथ लगी। 

संबंधित वीडियो

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed