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Supreme Court: ठोस सुबूत के बिना सह-आरोपी की गैर-न्यायिक स्वीकारोक्ति का महत्व नहीं, सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला 

Fri, 27 May 2022 09:49 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 27 May 2022 09:49 PM IST
सार

पीठ ने कहा कि आरोपी अदालत के समक्ष निश्चित रूप से दोषी होना चाहिए, न कि दोषी होने की संभावना होनी चाहिए और दोषसिद्धि निश्चित निष्कर्षों पर आधारित होनी चाहिए। 

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Supreme Court says, Non-judicial confession of co-accused without concrete evidence is of no importance
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहम फैसला देते हुए कहा कि किसी आरोपी के खिलाफ किसी ठोस सुबूत के बिना सह-आरोपित द्वारा कथित रूप से की गई गैर-न्यायिक स्वीकारोक्ति का महत्व नहीं है। ऐसी स्वीकारोक्ति के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा हुआ है जिसमें प्रेमी युगल की संदिग्ध मौत हो गई थी।

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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने कहा कि गैर-न्यायिक स्वीकारोक्ति ऐसी स्थिति में बेहद विश्वसनीय होगी जब उसकी पुष्टि करने वाली पुख्ता परिस्थितियां हों और अभियोजन के अन्य सुबूत भी उसकी पुष्टि करते हों। पीठ ने कहा कि आरोपी अदालत के समक्ष निश्चित रूप से दोषी होना चाहिए, न कि दोषी होने की संभावना होनी चाहिए और दोषसिद्धि निश्चित निष्कर्षों पर आधारित होनी चाहिए, न कि अस्पष्ट अनुमान पर।  इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने हत्या के आरोपी को बरी करने का आदेश दिया। आरोपी ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया था।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार इस मामले में एक महिला और पुरुष के बीच प्रेम प्रसंग था, लेकिन महिला के पिता और उसके चाचा इसके खिलाफ थे। दिसंबर 1994 में प्रेमी युगल लापता हो गया और कुछ दिनों बाद दोनों के शव पेड़ से लटके हुए मिले। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें मरे हुए आठ-दस दिन हो गए थे और मौत आत्महत्या की ओर इशारा कर रही थी। अभियोजन के मुताबिक, दो दिसंबर, 1994 को आरोपी चंद्रपाल मृत मिले पुरुष को अपने घर ले गया था जहां एक अन्य सह-आरोपी ने उसकी हत्या कर दी। बाद में दो अन्य सह-आरोपियों ने महिला की हत्या कर दी। निचली अदालत ने चारों को हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन हाई कोर्ट ने बाकी तीन आरोपियों को हत्या के आरोप से बरी कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी को भी रिहा कर दिया है। 
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