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Supreme Court: 'बिना ट्रायल लंबे समय तक कैद की अनुमति नहीं दे सकते', चार साल से बंद आरोपियों को जमानत

Sat, 27 Aug 2022 04:40 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 27 Aug 2022 04:40 PM IST
सार

2018 के एक मामले में बिना ट्रायल के जेल में बंद दो आरोपियों को अदालत ने जमानत दे दी है। दोनों आरोपी पिछले चार सालों से जेल में बंद थे। दोनों आरोपियों को न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने जमानत दी।

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Supreme Court says in 2018 narcotics seizure case Can not allow incarceration for long without trial
कोर्ट का फैसला - फोटो : amar ujala

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने दो आरोपियों को जमानत दी है। ये दोनों कैदी पश्चिम बंगाल में एक आपराधिक मामले में चार साल से बंद थे।  जमानत देते हुए न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि वह ऐसी स्थिति नहीं बनने दे सकते जहां किसी व्यक्ति को बिना किसी अपराधिक ट्रॉयल के लंबे समय तक जेल में रखा जाए। 

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दरअसल, 2028 में 414 किलोग्राम प्रतिबंधित गांजा की कथित जब्ती का मामला दर्ज किया गया था। 2018 के इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। दोनों आरोपी बीते चार साल से जेल में बंद हैं। उनका ट्रॉयल भी नहीं हुआ है। इसे लेकर दोनों आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दोनों की अपील पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सुनवाई के बाद दोनों आरोपियों को जमानत दे दी है। अदालत मे कहा कि इस मामले में अभी अभियोजन पक्ष के पहले गवाह से भी पूछताछ की जानी बाकी है। अदालत ने आगे कहा कि अगर अपीलकर्ता मुकदमे में देरी करना चाहते हैं, तो हम निचली अदालत को अपीलकर्ताओं को वापस कैद में रखने की अनुमति देते हैं।'
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न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा एक आरोप पत्र दायर किया गया था और आरोप तय किए गए थे, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ रहा था। पीठ ने इस सप्ताह के शुरूआत में दिए गए अपने फैसले में कहा था, "हम ऐसी स्थिति नहीं बनने दे सकते जहां व्यक्ति को लंबे समय तक कैद में रखा जाता है और मुकदमा शुरू होना मुश्किल है।"

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