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सुप्रीम कोर्ट: आम्रपाली परियोजनाओं के लिए बैंकों के समूह ने दी 1500 करोड़ की अंतिम मंजूरी, 150 करोड़ वितरित हुए
Mon, 04 Apr 2022 09:35 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Mon, 04 Apr 2022 09:35 PM IST
सार
आम्रपाली मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बताया है कि सात बैंकों के समूह ने 1500 करोड़ रुपये की पूंजी का निवेश करने के अंतिम अनुमति दे दी है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
विस्तार
आम्रपाली समूह की रुकी हुई परियोजनाओं के निर्माण के प्रयासों को बढ़ावा देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि सात बैंकों के एक संघ ने 1500 करोड़ रुपये के निवेश के अंतिम मंजूरी दे दी है। इनसे में 150 करोड़ रुपये की राशि सीधे राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) को दी गई है।
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न्यायाधीश यूयू ललित और बेला एम त्रिवेदी की पीठ को कोर्ट रिसीवर आर वेंकटरमणि ने बताया कि बाकी बची राशि को जारी नहीं किया जा सका क्योंकि बैंकों का कहना है कि राशि वितरण के प्रयोजन के लिए उन्हें पूर्व शर्त के रूप में स्वामित्व विलेख जमा करके समान बंधक की आवश्यकता होगी।
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सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि इसका एक कारण इस अदालत की ओर से दिए गए 23 जुलाई 2019 के फैसले के एक पैराग्राफ में की गई कुछ टिप्पणियों से संबंधित है और इसमें कुछ स्पष्टीकरण मांगा गया था।
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वेंकटरमणि ने अपने नोट में कहा कि शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि आम्रपाली ग्रुप ऑफ कंपनीज के समर्थन वाली सभी लीज रद्द की जाती हैं। इसका मतलब था कि ऐसा कोई स्वामित्व दस्तावेज नहीं होगा जिसे बैंकों में जमा किया जा सकता है।
कोर्ट रिसीवर और बैंकों के संघ की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने पीठ को बताया कि अगर आम्रपाली ग्रुप ऑफ कंपनीज का नाम कोर्ट रिसीवर द्वारा बदला जा सकता है तो स्थिति को बचाया जा सकता है। इस पर पीठ ने कहा कि फैसले में इस्तेमाल की जाने वाली बातें कोर्ट रिसीवर में निहित हैं।
अदालत ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों को आम्रपाली परियोजनाओं से संबंधित पट्टा विलेखों को वापस लेने का निर्देश दिया। साथ ही इन विलेखों को कोर्ट रिसीव’ को उपलब्ध कराने को कहा ताकि उसे समूह में शामिल बैंकों के पास रखा जा सके। पीठ ने कहा कि जो भी काम जरूरी हो, उसे सात दिनों के अंदर पूरा किया जाए।