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Supreme Court: कोर्ट बोला- हम केरल स्टोरी देखेंगे तब प्रमाणपत्र पर चुनौती को सुनेंगे, अगली सुनवाई जुलाई में

Fri, 19 May 2023 05:46 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 19 May 2023 05:46 AM IST
सार

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सिनेमा नियमन अधिनियम 1954 के सेक्शन 6 (1) का उपयोग लोगों की असहिष्णुता को बढ़ा चढ़ा कर आंकने में नहीं कर सकती।

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Supreme Court said We will see the Kerala story then listen to the challenge on the certificate news an update
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने द केरल स्टोरी फिल्म पर दायर याचिकाओं की सुनवाई में कहा कि वह खुद फिल्म को देखेगी और सेंसर बोर्ड के प्रमाणपत्र जारी करने को चुनौती वाली याचिकाओं पर सुनवाई का निर्णय लेगी। इन याचिकाओं के निस्तारण के लिए 18 जुलाई की तारीख रखी गई है।

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फिल्म निर्माता ने पश्चिम बंगाल सरकार के फिल्म पर प्रतिबंध और तमिलनाडु में सिनेमा हॉल मालिकों द्वारा स्क्रीनिंग न करने के निर्णय को चुनौती दी थी। फिल्म में दावा किया गया है कि केरल की लड़कियों का इस्लाम में जबरन धर्म परिवर्तन कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट में शामिल कराया गया।
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सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सिनेमा नियमन अधिनियम 1954 के सेक्शन 6 (1) का उपयोग लोगों की असहिष्णुता को बढ़ा चढ़ा कर आंकने में नहीं कर सकती। इससे तो सभी फिल्मों पर असर होगा। हमारा प्रथम दृष्टया मानना है कि राज्य में लगा प्रतिबंध कानूनी तौर पर कमजोर है। सरकार ने जवाबी हलफनामे में जो बातें बताई व तथ्य रखे, उनके आधार पर प्रतिबंध न्यायोचित नहीं लगता, इसलिए राज्य के सूचना एवं संस्कृति विभाग के एडिशनल सेक्रेटरी के आदेश के तहत केरल स्टोरी पर लगे प्रतिबंध पर रोक लगाई जाती है।
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दोनों पक्षों के तर्क
निर्माता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि राज्य प्रमाणपत्र के विरोध में अपील नहीं कर सकते। कोई कानूनी अपील प्रमाणपत्र जारी करने को लेकर भी किसी ने नहीं की है। महाराष्ट्र में इस फिल्म का कोई विरोध नहीं कर रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार अकोला में हुई हिंसा से चिंता दिखा रही है। तमिलनाडु में सिनेमा हॉल 95 से 10 प्रतिशत तक भरे थे, लेकिन राज्य सरकार ने ऐसा माहौल बनाया कि लोगों को फिल्म पसंद नहीं है।

दूसरे पक्ष के वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि चुनावों से पहले एक समुदाय को बुरा बताने का चलन बन गया है। उन्होंने फिल्म को प्रोपेगेंडा करार दिया। केरल के पत्रकार कुरबान अली ने भी केरल हाईकोर्ट द्वारा फिल्म की रिलीज रोकने से इन्कार करने के आदेश को चुनौती दी थी।

समस्याएं पैदा हुईं तो विपक्ष हमें न दोष दे : तृणमूल
सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानने की बात कहते हुए पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि अगर फिल्म दिखाने से समस्याएं पैदा हुईं तो विपक्ष हमें न दोष दे। तृणमूल कांग्रेस ने यह भी कहा कि विवादित फिल्म के प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने का राज्य सरकार का फैसला खुफिया सूचनाओं पर आधारित था और पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

विपक्षी भाजपा और कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत किया। जबकि पार्टी ने दावा किया कि फैसले ने टीएमसी की सांप्रदायिक राजनीति को उजागर किया, कांग्रेस ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार इस मामले को अलग तरीके से संभाल सकती थी।

तृणमूल ने सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश की : भाजपा
भाजपा नेता राहुल सिन्हा ने कहा कि फिल्म प्रतिबंधित कर सत्ताधारी दल ने समुदायों के बीच तनाव पैदा करने की कोशिश की। उसने एक समुदाय को संदेश देने के लिए यह प्रतिबंध लगाया था, उसकी सांप्रदायिक राजनीति उजागर हुई।

चीतों को केएनपी से राजस्थान भेजने पर विचार करे केंद्र
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क (केएनपी) में दो महीने से भी कम समय में तीन चीतों की मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को चिंता व्यक्त की और केंद्र से कहा कि वह राजनीति से ऊपर उठकर उन्हें राजस्थान में स्थानांतरित करने पर विचार करे। चीतों को दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से यहां स्थानांतरित किया गया है। 

न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ ने कहा, विशेषज्ञों की रिपोर्ट और लेखों से प्रतीत होता है कि इतनी बड़ी संख्या में चीतों के लिए केएनपी पर्याप्त नहीं है। एक जगह पर चीतों की अधिक सघनता उनकी प्रजाति के विकास के लिए ठीक नहीं है। आप राजस्थान में उपयुक्त स्थान की तलाश क्यों नहीं करते? केवल इसलिए कि राजस्थान में विपक्षी पार्टी का शासन है, इसका मतलब यह नहीं है कि आप इस पर विचार नहीं करेंगे।


केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा, टास्क फोर्स मामलों की जांच कर रही है। उन्हें अन्य अभयारण्यों में स्थानांतरित करने समेत सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। 

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