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SC: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- उत्तर प्रदेश के अफसरों में शीर्ष अदालत के प्रति जरा भी सम्मान नहीं, यह है पूरा मामला

Thu, 13 Jul 2023 06:23 AM IST
जलज मिश्रा राजीव सिन्हा, अमर उजाला
राजीव सिन्हा, अमर उजाला Published by: जलज मिश्रा Updated Thu, 13 Jul 2023 06:23 AM IST
सार

जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने बुधवार को निर्देश दिया कि यदि अधिकारी याचिकाकर्ताओं की समय पूर्व रिहाई के सभी लंबित आवेदनों पर चार सप्ताह में फैसला नहीं करते हैं, तो राज्य के गृह विभाग के प्रमुख सचिव 29 अगस्त को अगली सुनवाई के दिन कोर्ट में मौजूद रहेंगे।

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supreme Court said Uttar Pradesh officers have no respect apex court Latest News Updates
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सरकारी अधिकारियों के मन में देश की सर्वोच्च अदालत के प्रति जरा भी सम्मान नहीं है। शीर्ष कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा काट रहे कुछ कैदियों की सजा में छूट के संबंध में उसके निर्देशों के अनुपालन में करीब एक साल की देरी पर गहरी नाराजगी जताते हुए यह टिप्पणी की।

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जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने बुधवार को निर्देश दिया कि यदि अधिकारी याचिकाकर्ताओं की समय पूर्व रिहाई के सभी लंबित आवेदनों पर चार सप्ताह में फैसला नहीं करते हैं, तो राज्य के गृह विभाग के प्रमुख सचिव 29 अगस्त को अगली सुनवाई के दिन कोर्ट में मौजूद रहेंगे। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने पीठ के समक्ष कहा, सिफारिशों के बाद सजा में छूट पर अंतिम निर्णय राज्यपाल को लेना होता है। कोर्ट का राज्यपाल को डेडलाइन देना सही नहीं होगा। इस पर पीठ ने कहा, कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। ऐसे लोग भी हैं, जो करीब 30 वर्षों से परेशान हैं। पिछले साल 16 मई को हमने तीन महीने में निर्णय लेने का निर्देश दिया था। तब भी प्रशासन ने कई कैदियों की याचिका पर अभी तक फैसला नहीं किया है। बरेली जेल में बंद याचिकाकर्ता कैदियों ने बिना छूट 14 साल से अधिक की वास्तविक सजा पूरी कर ली थी।

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कठोर कदम उठाने पड़ेंगे
पीठ ने एडिशनल एडवोकेट जनरल अर्धेंदुमौली कुमार प्रसाद से कहा, आपके राज्य में यही हो रहा है। आपके अफसर जितना अनादर दिखा रहे हैं, हमें लगता है कि कुछ कठोर कदम उठाने होंगे। पिछले साल कोर्ट पहुंचने वाले 42 दोषियों में से कई को हाईकोर्ट ने माफी याचिका पर फैसले तक रिहा या बरी कर दिया था। सात आवेदन अब भी लंबित हैं।

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कोर्ट ले डीडीए और अन्य को लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और अन्य संबंधित निकाय मेट्रो ट्रेन डिपो से सटे एक फुटपाथ का इस्तेमाल पैदलयात्रियों के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए करने की इजाजत नहीं दे सकते। शीर्ष अदालत ने भूमि अधिग्रहण से संबंधित एक मामले पर फैसला सुनाते हुए यह टिप्प्णी की। कोर्ट ने मेट्रो डिपो की तस्वीरों को देखा और पाया कि इस जगह से जुड़े फुटपाथ के एक हिस्से पर एक कार क्लिनिक और अन्य विक्रेताओं ने कब्जा कर लिया है। जस्टिस एएस ओका और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ ने यह फैसला सुनाया।


सीजेआई चंद्रचूड़, साथी न्यायाधीशों ने कॉफी का लुत्फ उठाया
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ और सुप्रीम कोर्ट के कई अन्य न्यायाधीशों ने एक कॉफी का लुत्फ उठाया। जस्टिस चंद्रचूड़ गुरुवार को अन्य साथी न्यायाधीशों के साथ शीर्ष अदालत परिसर में बने कैफेटेरिया पहुंचे और कॉफी पीकर दिनभर की थकान को दूर किया। इससे पहले सीजेआई ने सुबह में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के कार्यकारी सदस्यों से मुलाकात की थी।

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