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महिलाओं की सहभागिता: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- महिला चीफ जस्टिस बनने का समय आ गया है

Fri, 16 Apr 2021 03:43 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Fri, 16 Apr 2021 03:43 AM IST
सार

  • घरेलू जिम्मेदारियों का हवाला देकर अक्सर जज बनने का प्रस्ताव ठुकरा देती हैं महिला वकील

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Supreme Court said time has come for appointment of woman as Chief Justice of India
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

विस्तार

न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी की कमी के बीच सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अब महिलाओं के भारत का प्रधान न्यायाधीश बनने का समय आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिला वकील अक्सर घरेलू जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए जज बनने से इनकार कर देती हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि महिला वकीलों को जल्द जज बनना चाहिए ताकि वह वरिष्ठता क्रम में प्रधान न्यायाधीश के पद तक पहुंच सकें।

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चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सूर्यकांत की विशेष पीठ ने हाईकोर्ट में अस्थायी जजों की नियुक्ति से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि हाईकोर्ट कॉलेजियम को महिला वकीलों में से जज चुनने में क्या परेशानियां आती हैं। चीफ जस्टिस बोबडे ने कहा, अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जब महिला वकीलों को जज बनने का प्रस्ताव दिया जाता है, तो घरेलू जिम्मेदारियों या बच्चों की पढ़ाई का हवाला देकर जज बनने का प्रस्ताव ठुकरा देती हैं।
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बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान वकील शोभा गुप्ता और स्नेहा कलिता ने पीठ से सुप्रीम कोर्ट महिला वकील एसोसिएशन की और से दायर याचिका पर भी गौर करने की गुहार लगाई। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में महिलाओं की भागीदारी कम है। ऐसे में महिला वकीलों को जज बनने का मौका दिया जाना चाहिए।
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महिलाओं की सहभागिता अहम, पर पात्र प्रत्याशी भी जरूरी
पीठ ने कहा कि समाज के विकास और लैंगिक समानता के लिए न्याय वितरण प्रणाली में उनकी सहभागिता महत्वपूर्ण है। हालांकि कोर्ट ने इस याचिका पर नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने भरोसा दिलाया कि उसके दिमाग में महिलाओं का हित है, लेकिन इसके लिए योग्य उम्मीदवार का होना जरूरी है।

हाईकोर्ट में 661 जज में केवल 70 महिला
एसोसिएशन का कहना था कि हाईकोर्ट में स्थायी और एडिशनल जजों की स्वीकृत क्षमता 1,080 है। उसमें फिलहाल 661 जज हैं, जिनमें केवल 70 (11.04 फीसदी) ही महिला जज हैं। याचिका में कहा गया है कि 25 हाईकोर्ट में से 5 हाईकोर्ट मणिपुर, मेघालय, पटना, त्रिपुरा और उत्तराखंड में एक भी महिला जज फिलहाल नहीं है। याचिका में बड़ी संख्या में लंबित मुकदमों को देखते हुए अस्थायी जजों की नियुक्ति की मांग की गई है।


लंबित 10 नामों पर तीन माह में फैसला लेगी सरकार
अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया कि जुलाई 2019 में हाईकोर्ट के जज नियुक्त करने के लिए 10 नाम भेजे गए थे। केंद्र सरकार उन नामों पर तीन माह के अंदर विचार करेगी। विभिन्न हाईकोर्ट में 416 जजों के रिक्त पदों में से 196 नामों के प्रस्ताव सरकार व सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के पास विचाराधीन हैं। जबकि 220 पदों के लिए अब तक कोई सिफारिश नहीं आई है।

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