{"_id":"62a60772fa62660078240a87","slug":"supreme-court-said-that-after-acquisition-and-payment-of-compensation-the-land-is-completely-owned-by-the-government","type":"story","status":"publish","title_hn":"Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्प्णी, कहा- अधिग्रहण और मुआवजा चुकाने के बाद जमीन पूरी तरह सरकार की","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्प्णी, कहा- अधिग्रहण और मुआवजा चुकाने के बाद जमीन पूरी तरह सरकार की
Sun, 12 Jun 2022 09:04 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sun, 12 Jun 2022 09:04 PM IST
सार
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास संबंधित भूमि पर कब्जे का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि अधिग्रहण के बाद भूमि पूरी तरह राज्य का हिस्सा हो चुकी है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार यदि किसी जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया के तहत मुआवजा देकर कब्जा ले लेती है तो फिर उस जमीन पर भू स्वामी का कोई दावा नहीं रह जाता। ऐसी जमीन पर यदि वह कब्जा करता है तो इसे अवैध माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सही करार दिया है।
विज्ञापन
जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अवकाशकालीन पीठ उत्तर प्रदेश निवासी एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें 2 फरवरी को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के नोटिस को चुनौती दी गई थी। प्राधिकरण ने संबंधित व्यक्ति को जमीन के एक हिस्से से अपना अतिक्रमण हटाने के लिए कहा था।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता की जमीन का अधिग्रहण 1996 में ही हो चुका है, कब्जा लिया जा चुका है और 1894 के भूमि अधिग्रहण कानून के मुताबिक मुआवजा भी चुकाया जा चुका है। यूपी सरकार ने बताया कि राजस्व अभिलेखों में भी स्वामित्व बदला जा चुका है। इसके बावजूद याचिकाकर्ता ने उस जमीन पर अतिक्रमण कर रखा है।
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास संबंधित भूमि पर कब्जे का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि अधिग्रहण के बाद भूमि पूरी तरह राज्य का हिस्सा हो चुकी है। इस मामले में हस्तक्षेप से इन्कार कर हाईकोर्ट ने सही फैसला दिया है और हम हाईकोर्ट द्वारा व्यक्त किए गए विचारों से पूरी तरह सहमत हैं। यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।