{"_id":"630ff712d179b13d2c47c875","slug":"supreme-court-said-rajasthan-highcourt-heard-the-matter-of-land-possession-improperly","type":"story","status":"publish","title_hn":"Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राजस्थान हाईकोर्ट ने जमीन पर कब्जे का मामला अनुचित ढंग से सुना","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राजस्थान हाईकोर्ट ने जमीन पर कब्जे का मामला अनुचित ढंग से सुना
Thu, 01 Sep 2022 05:34 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 01 Sep 2022 05:34 AM IST
सार
जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच इतने पर नहीं रुकी, कहा, ‘आवंटन के बाद 6 महीने में कब्जा लेना होता है, वरना आवंटन रद्द माना जाता है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
युद्ध में अपाहिज हुए दिवंगत सैनिक की विधवा को जमीन आवंटन का राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने मामले को ‘पूरी तरह अनुचित ढंग’ से सुना। साथ ही कहा कि हाईकोर्ट ने अपने दायरे से बाहर जाकर जमीन पर कब्जा दिलाया, जबकि जमीन देने के लिए विधवा के नाम आवंटन पत्र तक जारी नहीं हुआ था।
विज्ञापन
जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच इतने पर नहीं रुकी, कहा, ‘आवंटन के बाद 6 महीने में कब्जा लेना होता है, वरना आवंटन रद्द माना जाता है। विचाराधीन मामले में कथित आवंटन के 27 साल बाद तक जमीन का कब्जा नहीं लिया गया।
विज्ञापन
आगे कहा, ‘अदालती कार्यवाही में नजर आता है कि हाईकोर्ट ने खास दिलचस्पी ली, केवल जमीन आवंटन के लिए ही नहीं, बल्कि उसी जमीन के आवंटन में जिसे देने की बात 1971 में हो रही थी और जो अब नेशनल हाईवे के पास है।
विज्ञापन
यह था मामला
1965 के भारत-पाक युद्ध में पैर गंवा चुके सैनिक ने 1963 में बने कानून के तहत जमीन आवंटन के लिए आवेदन किया। इस पर 1971 में राजस्व विभाग के सैन्य कल्याण प्रभाग की अनुशंसा पर रोहिखेड़ा गांव में 25 बीघा जमीन देने का निर्णय हुआ। 1988 में सिपाही की मृत्यु हुई। उसकी विधवा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि सरकार जो जमीन दे रही है, वह खेती के लायक नहीं है। इस पर सरकार ने पूर्व में बताई जमीन ही आवंटित कर दी, लेकिन यहां से 60 साल से खेती कर रहे लोगों को निकाला जाने लगा तो हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई।