फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   supreme court said pained to see son unable to bury father in village move apex court

SC: 'बेटे को अपने पिता को दफनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट आना पड़ रहा है, ये दुखद', सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी

Mon, 20 Jan 2025 03:28 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Mon, 20 Jan 2025 03:28 PM IST
सार

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने रमेश बघेल नामक याचिकाकर्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। रमेश बघेल ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

विज्ञापन
supreme court said pained to see son unable to bury father in village move apex court
Supreme Court - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि एक बेटे को अपने पिता को दफनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट आना पड़ रहा है, ये बेहद दुखद है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने रमेश बघेल नामक याचिकाकर्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। रमेश बघेल ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। दरअसल उच्च न्यायालय ने रमेश के पिता को, जो कि एक ईसाई पादरी थे, गांव के कब्रिस्तान में दफनाने की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। 
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि 'एक व्यक्ति को, जो उस गांव में रहा, उसे मृत्यु के बाद गांव के कब्रिस्तान में दफनाने क्यों नहीं दिया जा रहा है? शव बीती 7 जनवरी से मोर्चरी में रखा हुआ है। ये कहते हुए दुख हो रहा है कि एक व्यक्ति को अपने पिता को दफनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट आना पड़ रहा है। न तो पंचायत, न ही राज्य सरकार या उच्च न्यायालय कोई भी इस समस्या को सुलझा नहीं सका। हम उच्च न्यायालय की टिप्पणी से भी हैरान हैं कि इससे कानून व्यवस्था खराब होती।'
विज्ञापन


सॉलिसिटर जनरल की दलील- कानून व्यवस्था को हो सकता है खतरा
बघेल ने याचिका में कहा है कि गांव के लोगों ने उसके पिता को दफनाने का आक्रामक तरीके से विरोध किया। राज्य सरकार की तरफ से अदालत में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि गांव में ईसाईयों के लिए कोई कब्रिस्तान नहीं है और शव को गांव से 20 किलोमीटर दूर एक कब्रिस्तान में दफनाया जा सकता है। बघेल की तरफ से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्वेस ने दलील दी कि उसके परिवार के अन्य सदस्यों को गांव के ही कब्रिस्तान में दफनाया गया है, लेकिन मृतक ईसाई है, इसलिए उसे दफनाने की इजाजत नहीं दी जा रही है। इस पर तुषार मेहता ने कहा कि मृतक का बेटा गांव के ही कब्रिस्तान में पिता के शव को दफनाने पर अड़ा है और इससे आदिवासी हिंदू और आदिवासी ईसाई समुदाय के बीच वैमनस्य पैदा हो सकता है। मेहता ने कहा कि इस मामले पर भावनाओं के आधार पर फैसला नहीं लिया जाना चाहिए और वे इस पर बहस के लिए तैयार हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई अब 22 जनवरी तक के लिए टाल दी है। इस मामले में ग्राम पंचायत का कहना है कि गांव में ईसाईयों का कब्रिस्तान नहीं है, वहीं याचिकाकर्ता का दावा है कि गांव में ईसाईयों के लिए कब्रिस्तान है और इसके लिए मौखिक तौर पर जगह आवंटित की गई थी। अब गांव के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed