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किसी भी मामले पर छह माह से अधिक रोक नहीं, जानिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला

Thu, 29 Mar 2018 09:11 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 29 Mar 2018 09:11 AM IST
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supreme court said no stay on trial for more than six months, know why this decision is important

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक अहम फैसला लिया है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी दीवानी व आपराधिक मुकदमे की कार्यवाही पर छह महीने से अधिर रोक नहीं हो सकती। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि जिन मुकदमों की कार्रवाई पर पहले से रोक लगी हुई है, उस पर रोक आज से छह महीने बाद खत्म हो जाएगी। शीर्ष अदालत का यह आदेश लंबित मामलों के बोझ को कम करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।

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शीर्ष अदालत ने हालांकि यह कहा है कि कुछ अपवाद मामलों में कार्यवाही पर रोक छह महीने से अधिक जारी रह सकती है। लेकिन इसके लिए अदालत को बाकायदा आदेश पारित करना होगा। ये ऐसे मामले होंगे जिनके बारे में अदालत को लगता हो कि उन मुकदमों पर रोक, उनके निपटारे से अधिक जरूरी है। शीर्ष अदालत ने यह फैसला भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर दिया है।
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न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल, न्यायमूर्ति रोहिंग्टन एफ नरीमन और न्यायमूर्ति नवीन गुप्ता की पीठ ने कहा कि मुकदमे की कार्रवाई पर अनिश्चितकालीन रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। पीठ ने कहा है कि इस सुधार की दरकार न सिर्फ भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में हैं बल्कि सभी दीवानी और फौजदारी मामलों में है। पीठ ने कहा कि कार्यवाही पर रोक लगने से मामला अनिश्चितकाल के लिए लटक जाता है। 
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पीठ ने यह भी कहा कि कभी-कभी तो रोक हटने की सूचना की जानकारी नहीं पहुंचती है जिस कारण कार्यवाही भी शुरू नहीं हो पाती है। लिहाजा पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश पर परीक्षण कर सकता है। लेकिन ट्रायल पर रोक छह महीने से अधिक तक नहीं लगा सकता। पीठ ने कहा कि उन तमाम दीवानी और आपराधिक मामले जिनमें कार्यवाही पर रोक लगी हुई है, उन पर रोक आज से छह महीने बाद खत्म हो जाएगी। 

supreme court said no stay on trial for more than six months, know why this decision is important

शीर्ष अदालत ने यह भी कहा है कि भविष्य में किसी भी मुकदमे की कारवाई की रोक छह महीने की अवधि तक के लिए ही लगाई जाएगी। यदि रोक छह महीने से अधिक होती है तो अदालत को आदेश पारित करना होगा। आदेश में बताना होगा कि वह मामला क्यों अपवाद है और ट्रायल पर रोक उसके निपटारे से अधिक महत्वपूर्ण क्यों है। शीर्ष अदालत ने कहा कि मुकदमों पर रोक की अवधि छह महीने के बाद खत्म हो जाए तो ट्रायल कोर्ट को खुद बिना किसी इंतजार के कार्यवाही शुरू कर देनी होगी।

शीर्ष अदालत ने कहा है कि किसी मामले में आरोप तय होने का आदेश पारित किया जाता तो वह आदेश न तो अंतरिम होता है और न ही अंतिम। हाईकोर्ट के समक्ष जब मामला परीक्षण के लिए आए तो हाईकोर्ट को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मामले के जल्द निपटारे में अनावश्यक बाधा न हो।

शीर्ष अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट भी इस संबंध में निर्देश जारी कर सकता है। साथ ही हाईकोर्ट यह निगरानी कर सकता है कि दीवानी या आपराधिक मामले लंबे समय तक लंबित न पड़े रहें। शीर्ष अदालत ने इस आदेश की प्रति सभी हाईकोर्ट तक पहुंचाने के लिए कहा है जिससे कि इस संबंध में जरूरी कदम उठाए जा सकें।

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