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SC: सर्वोच्च अदालत ने कहा- उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष के लिए परीक्षा की जरूरत नहीं, पढ़ें पूरी खबर

Fri, 08 Mar 2024 06:30 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Fri, 08 Mar 2024 06:30 AM IST
सार

शीर्ष अदालत देश भर के उपभोक्ता मंचों के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी। शीर्ष पीठ ने कहा, जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोगों के अध्यक्ष के लिए परीक्षा में छूट नहीं होगी। कहा, लिखित परीक्षा में छूट का मतलब पिछले दरवाजे से अयोग्य उम्मीदवार का प्रवेश होगा।

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Supreme Court said no need for examination for Chairman of Consumer Commission
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य उपभोक्ता आयोगों के अध्यक्षों का चयन लिखित परीक्षा और मौखिक परीक्षा के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। हालंकि, इस पद पर नियुक्ति अब भी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श और सहमति के अधीन ही होगी। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने तर्क दिया कि एक सेवानिवृत्त हाईकोर्ट के न्यायाधीश को परीक्षा देने के लिए कहना वैसा ही है जैसे किसी सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) प्रमुख नियुक्त होने से पहले पर्यावरण कानून का पेपर देने के लिए कहना। 

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दरअसल मार्च 2023 में जस्टिस एमआर शाह और एमएम सुंदरेश की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने राज्य और जिला आयोगों के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति लिखित परीक्षा में उनके प्रदर्शन के आधार पर करने को कहा था।

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जिला उपभोक्ता आयोगों के अध्यक्ष के लिए परीक्षा में छूट नहीं
शीर्ष अदालत देश भर के उपभोक्ता मंचों के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी। शीर्ष पीठ ने कहा, जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोगों के अध्यक्ष के लिए परीक्षा में छूट नहीं होगी। कहा, लिखित परीक्षा में छूट का मतलब पिछले दरवाजे से अयोग्य उम्मीदवार का प्रवेश होगा। सीजेआई ने कहा, केंद्र प्रस्तावित नियमों का मसौदा क्यों नहीं तैयार करता है। बेहतर होगा कि हम इसे नियम लागू होने के बाद सुनें। कोर्ट ने कहा कि वह केंद्र सरकार से सहमत है कि जिला मंचों पर नियुक्तियां निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। लिहाजा कोर्ट ने केंद्र को उन नियमों में संशोधन के प्रस्ताव के साथ वापस आने का निर्देश दिया जिनके तहत ऐसी नियुक्तियां होती हैं।

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