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SC: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- रिकॉर्ड पर क्रूरता लाए बिना विवाह का विघटन नहीं हो सकता, पढ़ें पूरी खबर
Wed, 20 Sep 2023 05:50 AM IST
जलज मिश्रा
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Wed, 20 Sep 2023 05:50 AM IST
सार
पीठ ने नए सिरे से सुनवाई के लिए अपील को हाईकोर्ट में वापस भेज दिया है। मामले के मुताबिक, व्यक्ति की याचिका पर कार्रवाई करते हुए एक फैिमली कोर्ट ने तलाक के आदेश की बजाय न्यायिक अलगाव का आदेश पारित किया।
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सुप्रीम कोर्ट।
- फोटो : ANI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि हाईकोर्ट विवाह के अपूरणीय टूट के सिद्धांत के आधार पर तलाक की कार्यवाही में पक्षों के बीच विवाह को भंग नहीं कर सकता है। साथ ही शीर्ष अदालत ने यह भी कहा है कि जीवनसाथी की ओर से क्रूरता की बात दर्ज किए बिना विवाह को समाप्त करने के लिए विवाह के अपूरणीय विघटन या टूट के सिद्धांत का उपयोग नहीं किया जा सकता है।
यह कहते हुए जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने एक जोड़े की शादी को भंग करने के मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने तलाक का आदेश देने के लिए विवाह के अपरिवर्तनीय विघटन के सिद्धांत पर भरोसा किया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि दंपति 12 साल से अलग रह रहे हैं और उन्हें अपने रिश्ते को जारी रखने के लिए मजबूर करने का मतलब उनकी पीड़ा को लम्बा खींचना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, हमारा मानना है कि हाईकोर्ट ने तलाक की कार्यवाही में पक्षों के बीच विवाह को भंग करने के लिए विवाह के अपरिवर्तनीय टूटने के सिद्धांत पर भरोसा करके कानूनन त्रुटि की है। पीठ ने कहा है कि हाईकोर्ट ने पत्नी की ओर से क्रूरता के आरोप पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया, जिस पर फैमिली कोर्ट एक विशिष्ट नतीजे पर पर पहुंची थी। पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि अपील के उचित निर्णय के लिए क्रूरता के पहलू पर निष्कर्ष निकालना आवश्यक था।
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मामला वापस हाईकोर्ट में भेजा
पीठ ने नए सिरे से सुनवाई के लिए अपील को हाईकोर्ट में वापस भेज दिया है। मामले के मुताबिक, व्यक्ति की याचिका पर कार्रवाई करते हुए एक फैिमली कोर्ट ने तलाक के आदेश की बजाय न्यायिक अलगाव का आदेश पारित किया। फैमिली कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि पत्नी के कुछ कार्य क्रूरता के दायरे में आते हैं। फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ पति और पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। 23 मार्च, 2022 के एक निर्णय द्वारा हाईकोर्ट ने विवाह को भंग कर दिया। पति ने कहा कि क्रूरता का पता चलने पर तलाक का आदेश दिया जाना चाहिए था। वहीं पत्नी ने न्यायिक अलगाव के आदेश को चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट ने क्रूरता पर निष्कर्ष नहीं निकाला
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि हाईकोर्ट ने तलाक का आदेश देने के लिए विवाह के अपरिवर्तनीय टूटने के सिद्धांत को लागू किया है। पीठ ने कहा है, हाईकोर्ट ने सबूतों पर विस्तार से विचार किया है लेकिन ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं निकला है कि अपीलकर्ता-पत्नी की ओर से प्रतिवादी-पति के साथ क्रूरता की गई थी। फैमिली कोर्ट के फैसले के उस पहलू का हाईकोर्ट के फैसले में समाधान नहीं किया गया था।
हाईकोर्ट ने कहा था, सुलह के प्रयास विफल रहे
मद्रास हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि दोनों पक्ष 12 साल से अधिक समय से अलग-अलग रह रहे हैं। उसने कहा था, दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने का प्रयास विफल रहा। परिणामस्वरूप, भावनात्मक और व्यावहारिक रूप से विवाह खत्म हो गया है। नाममात्र के लिए रिश्ते को जारी रखना पीड़ा को लम्बा खींचना है और एकसाथ रहने के लिए कहना दोनों पक्षों के लिए क्रूरता होगी। इसलिए हमारी सुविचारित राय है कि पक्षों के बीच विवाह अपरिवर्तनीय रूप से टूट गया है और अब वे पति-पत्नी के रूप में एक साथ नहीं रह सकते हैं।
अनुच्छेद 142 का किया था प्रयोग
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने गत मई को दिए अपने एक फैसले में कहा था कि वह संविधान के अनुच्छेद 142 (1) के तहत अपनी असाधारण शक्ति का उपयोग कर निर्धारित प्रक्रिया और हिंदू विवाह अधिनियम के तहत प्रतीक्षा अवधि से छूट देते हुए उन विवाहों को भंग कर सकता है जो अपूरणीय रूप से टूट गई हो।
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यह कहते हुए जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने एक जोड़े की शादी को भंग करने के मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने तलाक का आदेश देने के लिए विवाह के अपरिवर्तनीय विघटन के सिद्धांत पर भरोसा किया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि दंपति 12 साल से अलग रह रहे हैं और उन्हें अपने रिश्ते को जारी रखने के लिए मजबूर करने का मतलब उनकी पीड़ा को लम्बा खींचना होगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, हमारा मानना है कि हाईकोर्ट ने तलाक की कार्यवाही में पक्षों के बीच विवाह को भंग करने के लिए विवाह के अपरिवर्तनीय टूटने के सिद्धांत पर भरोसा करके कानूनन त्रुटि की है। पीठ ने कहा है कि हाईकोर्ट ने पत्नी की ओर से क्रूरता के आरोप पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया, जिस पर फैमिली कोर्ट एक विशिष्ट नतीजे पर पर पहुंची थी। पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि अपील के उचित निर्णय के लिए क्रूरता के पहलू पर निष्कर्ष निकालना आवश्यक था।
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मामला वापस हाईकोर्ट में भेजा
पीठ ने नए सिरे से सुनवाई के लिए अपील को हाईकोर्ट में वापस भेज दिया है। मामले के मुताबिक, व्यक्ति की याचिका पर कार्रवाई करते हुए एक फैिमली कोर्ट ने तलाक के आदेश की बजाय न्यायिक अलगाव का आदेश पारित किया। फैमिली कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि पत्नी के कुछ कार्य क्रूरता के दायरे में आते हैं। फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ पति और पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। 23 मार्च, 2022 के एक निर्णय द्वारा हाईकोर्ट ने विवाह को भंग कर दिया। पति ने कहा कि क्रूरता का पता चलने पर तलाक का आदेश दिया जाना चाहिए था। वहीं पत्नी ने न्यायिक अलगाव के आदेश को चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट ने क्रूरता पर निष्कर्ष नहीं निकाला
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि हाईकोर्ट ने तलाक का आदेश देने के लिए विवाह के अपरिवर्तनीय टूटने के सिद्धांत को लागू किया है। पीठ ने कहा है, हाईकोर्ट ने सबूतों पर विस्तार से विचार किया है लेकिन ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं निकला है कि अपीलकर्ता-पत्नी की ओर से प्रतिवादी-पति के साथ क्रूरता की गई थी। फैमिली कोर्ट के फैसले के उस पहलू का हाईकोर्ट के फैसले में समाधान नहीं किया गया था।
हाईकोर्ट ने कहा था, सुलह के प्रयास विफल रहे
मद्रास हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि दोनों पक्ष 12 साल से अधिक समय से अलग-अलग रह रहे हैं। उसने कहा था, दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने का प्रयास विफल रहा। परिणामस्वरूप, भावनात्मक और व्यावहारिक रूप से विवाह खत्म हो गया है। नाममात्र के लिए रिश्ते को जारी रखना पीड़ा को लम्बा खींचना है और एकसाथ रहने के लिए कहना दोनों पक्षों के लिए क्रूरता होगी। इसलिए हमारी सुविचारित राय है कि पक्षों के बीच विवाह अपरिवर्तनीय रूप से टूट गया है और अब वे पति-पत्नी के रूप में एक साथ नहीं रह सकते हैं।
अनुच्छेद 142 का किया था प्रयोग
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने गत मई को दिए अपने एक फैसले में कहा था कि वह संविधान के अनुच्छेद 142 (1) के तहत अपनी असाधारण शक्ति का उपयोग कर निर्धारित प्रक्रिया और हिंदू विवाह अधिनियम के तहत प्रतीक्षा अवधि से छूट देते हुए उन विवाहों को भंग कर सकता है जो अपूरणीय रूप से टूट गई हो।