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सुप्रीम कोर्ट: बख्शीश या परोपकार में देने के लिए नहीं है सरकारी आवास
Fri, 13 Aug 2021 06:26 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 13 Aug 2021 06:26 AM IST
सार
- शीर्ष अदालत ने कहा, सेवारत स्टाफ के लिए बने आवास, अवकाशप्राप्त के लिए नहीं
- कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि किसी को सदा के लिए सरकारी आवास नहीं दिए जा सकते
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Supreme Court
- फोटो : ANI
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विस्तार
कश्मीर मूल के और खुफिया विभाग से रिटायर्ड अधिकारी को सरकारी आवास खाली करने का आदेश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह आवास सेवारत स्टाफ के लिए है, रिटायर्ड स्टाफ को परोपकार या बख्शीश में देने के लिए नहीं।
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2006 में रिटायर होने के बाद यह नागरिक सरकारी आवास में रह रहा था, उसका कहना था कि कश्मीर में हालात सामान्य होने तक वह वापस नहीं लौट सकता। उसे पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकारी आवास में रहने की अनुमति दी थी, लेकिन केंद्र ने इस आदेश के खिलाफ अपील कर दी, जिसे स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर किया गया है।
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जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच ने कहा कि 31 अक्तूबर तक यह रिटायर्ड अधिकारी फरीदाबाद स्थित सरकारी आवास खाली कर उसका कब्जा सरकार को सौंपे। साथ ही रिटायर होकर भी सरकारी आवास में रह रहे कर्मचारियों व अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए इसकी रिपोर्ट 15 नवंबर तक देने के लिए केंद्र सरकार से कहा गया है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि किसी को सदा के लिए सरकारी आवास नहीं दिए जा सकते।
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अक्तूबर 2006 में रिटायर अधिकारी ने अपने विभाग में आवेदन कर कहा कि उसे एक साल के लिए रहने दें। जून 2007 में दूसरा आवेदन कर कहा कि उसे नाम मात्र के शुल्क पर इस आवास में रहने दें। उसे आवास खाली करने के नोटिस दिए गए, जिसे न मानने पर उसे निकालने का निर्णय हुआ। वह दिल्ली की एक जिला अदालत से स्टे ले आया। इसे दिल्ली अदालत के क्षेत्राधिकार का मामला न मानते हुए विभाग ने आपत्ति की, जिस पर व्यक्ति ने मामला दिल्ली से वापस लेकर फरीदाबाद अदालत में दायर किया, जहां वह खारिज हो गया। इस बार उसने पंजाब और चंडीगढ़ हाईकोर्ट में अपील की, वह भी सिंगल जज ने खारिज कर दी।
यह भी कहा सुप्रीम कोर्ट ने
- दया की भावना चाहे जितनी सही हो, रिटायर्ड व्यक्ति को सरकारी आवास पर कब्जा देने का अधिकार नहीं देती। जम्मू-कश्मीर में विकट हालात हैं, तब भी सरकार की जिम्मेदारी नहीं है कि वह व्यक्ति को सरकारी आवास की व्यवस्था करे।
- रिटायर्ड लोग रिटायरमेंट के सभी लाभ लेते हैं, उन्हें ऐसी स्थिति में नहीं माना जा सकता, जिन्हें सरकार हमेशा के लिए आवास मुहैया करवाए।
- किसी राज्य से विस्थापित लोगों को उन लाखों नागरिकों पर प्राथमिकता नहीं दी जा सकती, जिनके सिर पर छत नहीं है। सरकारी आवास केवल अस्थायी तौर पर कुछ समय के लिए दिया जाता है।
- व्यक्ति बेहद गरीब वर्ग का प्रवासी भी नहीं है, वह नौकरशाही के ऊंचे पायदानों पर रह चुका है। उसका यह कहना कि हालात सामान्य होंगे तब वह अपने राज्य लौटेगा, भ्रामक है।