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सुप्रीम कोर्ट: मौजूदा चिकित्सीय हालत को कारण बता क्लेम देने से नहीं मुकर सकता बीमाकर्ता

Wed, 29 Dec 2021 03:01 AM IST
ओम. प्रकाश एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: ओम. प्रकाश Updated Wed, 29 Dec 2021 03:01 AM IST
सार

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निस्तारण आयोग (एनसीडीआरसी) के निर्णय के खिलाफ दायर मनमोहन नंदा की अपील पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया। इस मामले में अमेरिका में नंदा की चिकित्सा पर हुआ खर्च दिलाने की अपील ठुकरा दी गई थी।

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Supreme Court said Give reason to current medical condition  Insurer cannot refuse to pay claim
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सर्वोच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि बीमाकर्ता प्रस्ताव फॉर्म में बीमारी का उल्लेख होने के बाद पॉलिसी जारी कर मौजूदा चिकित्सीय हालत को आधार बना क्लेम देने से नहीं मुकर सकता। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बीवी नागरत्थन की खंडपीठ ने एक निर्णय में कहा कि प्रस्तावक का कर्तव्य है कि वह बीमाकर्ता को अपनी जानकारी के मुताबिक सभी तथ्यों से अवगत कराए।
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प्रस्तावित बीमे के संबंध में माना जाता है कि प्रस्तावक को सभी तथ्यों और हालात की जानकारी है। प्रस्तावक केवल उन्हीं तथ्यों की जानकारी दे सकता है, जो उसके संज्ञान में हैं, लेकिन उसका काम यहीं खत्म नहीं होता। उसका काम उन तथ्यों तक भी पहुंचना है, जो उसे सामान्य तौर पर जानने चाहिए। एक बार पॉलिसी जारी हो जाए तो बीमित की चिकित्सीय हालत का हवाला देकर क्लेम देने से इनकार नहीं किया जा सकता, जबकि वह प्रस्ताव फॉर्म में उल्लेखित है और उसके कारण क्लेम किया गया है।
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राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निस्तारण आयोग (एनसीडीआरसी) के निर्णय के खिलाफ दायर मनमोहन नंदा की अपील पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया। इस मामले में अमेरिका में नंदा की चिकित्सा पर हुआ खर्च दिलाने की अपील ठुकरा दी गई थी। अमेरिका जाने से पहले नंदा ने ओवरसीज मेडिक्लेम बिजनेस एंड हॉलीडे पॉलिसी ली थी। सेन फ्रांसिस्को एयरपोर्ट पहुंचने पर दिल का दौरा पड़ गया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। वहां उनकी एंजियोप्लासी हुई और दिल की धमनियों में जमे थक्के खोलने के लिए तीन स्टेंट डालने पड़े।
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पॉलिसी में बीमारी न बताने का आरोप

नंदा ने इलाज खर्च दिलाने का दावा किया तो उसे यह कहकर खारिज कर दिया गया कि नंदा का हाइपरलिपिडिमिया और डायबिटीज का इतिहास है, जिसका जिक्र बीमा पॉलिसी खरीदते वक्त नहीं किया गया था। एनसीडीआरसी ने भी इसी आधार पर उनका दावा खारिज कर दिया था।
 
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