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Supreme Court: पुनर्विचार याचिका में खारिज दलीलें नहीं दोहराई जा सकतीं, मुआवजे की मांग वाली अर्जी खारिज

Fri, 19 Aug 2022 05:03 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Fri, 19 Aug 2022 05:03 AM IST
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Supreme Court said Dismissed arguments cannot be repeated in review petition
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : सोशल मीडिया

पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पुरानी व खारिज की जा चुकी दलीलों को दोहराने की अनुमति नहीं दी जा सकती। 55 साल पुराने भूमि विवाद मामले में सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने गुरुवार को यह टिप्पणी की।

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सीजेआई एनवी रमण, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने पुनर्विचार अर्जी से जुड़े कानून की व्याख्या करते हुए कहा कि फौजदारी मामलों में विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सिर्फ पुनर्विचार करने के नाम पर याचिकाएं दाखिल करना गलत है। लगातार यह पाया गया है कि समीक्षा में न्यायालय का क्षेत्राधिकार अपील के समान नहीं है।
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गलत अभियोजन पर पीड़ित को मुआवजे के लिए दिशानिर्देश की मांग वाली अर्जी खारिज
किसी मामले में गलत तरीके से फंसाए गए व्यक्ति को मुआवजा देने और झूठी आपराधिक शिकायत दर्ज करवाने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए सरकार को गाइडलाइन तैयार करने का निर्देश देने की मांग से संबंधित दो याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी।  पीठ ने कहा, याचिकाओं में जो प्रार्थना की गई वह गाइडलाइन तैयार करने अथवा कानून बनाने की प्रकृति की है।
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पसंद की तैनाती पर दिव्यांगों को नहीं गंवानी होगी वरिष्ठता : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शारीरिक रूप से दिव्यांग कर्मचारी की स्थिति व परेशानी को ध्यान में रखते हुए कहा है कि दिव्यांग कर्मचारियों को नियुक्ति स्थान चुनने के लिए वरिष्ठता को छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस जेके माहेश्वरी की पीठ ने अपीलकर्ता दिव्यांग कर्मचारी नेतराम यादव को राहत दी है। कर्मी को सुविधाजनक स्थान पर स्थानांतरित तो कर दिया गया था, लेकिन उसकी वरिष्ठता कम कर दी गई थी।

अपीलकर्ता ओबीसी श्रेणी का दिव्यांग अभ्यर्थी था और वर्ष 1999 में उसका चयन प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से हुआ था। उसकी नियुक्ति बीकानेर में वरिष्ठ शिक्षक के रूप में हुई थी। हालांकि उसकी जहां नियुक्ति थी वह उसके गृह जिले अलवर से  करीब 550 किलोमीटर दूर था।


राजस्थान सरकार के वित्त विभाग द्वारा एक सर्कुलर जारी किया गया था, जिसमें नियुक्ति अथॉरिटी को दिव्यांग व्यक्तियों की उस स्थान पर या उसके निकट नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश दिया, जिसे वो नियुक्ति के समय चुनते हैं। इस सर्कुलर के मद्देनजर अपीलकर्ता के आग्रह पर उसका तबादला अलवर जिले में कर दिया गया लेकिन उसकी वरिष्ठता 870 से 1318 कर दी गई। उसने हाईकोर्ट का रुख किया लेकिन राहत नहीं मिली। फिर उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

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